रांची : अनुबंध, दैनिक वेतनभोगी व अस्थायी कर्मचारियों का विस्तृत ब्योरा दे सरकार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Feb 2019 9:01 AM
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संविदा पर नियुक्त कर्मियों की सेवा स्थायी करने पर हाइकोर्ट ने मांगी जानकारी रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने संविदा पर कार्यरत कर्मियों की सेवा स्थायी करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया. अदालत ने मुख्य सचिव को राज्य में कार्यरत अनुबंध, दैनिक […]
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संविदा पर नियुक्त कर्मियों की सेवा स्थायी करने पर हाइकोर्ट ने मांगी जानकारी
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने संविदा पर कार्यरत कर्मियों की सेवा स्थायी करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया. अदालत ने मुख्य सचिव को राज्य में कार्यरत अनुबंध, दैनिक वेतनभोगी व अस्थायी कर्मचारियों के संबंध में विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने काे कहा.
अदालत ने माैखिक रूप से कहा कि अदालत में अनुबंध और अस्थायी रूप से काम करनेवाले कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में सेवा नियमित करने का आग्रह किया है. सेवा नियमित करने से संबंधित याचिकाएं नियमित रूप से दायर हो रही हैं.
अदालत ने कर्नाटक बनाम उमा देवी केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विभागों से लेकर जिला स्तर के कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों (तृतीय व चतुर्थ वर्ग के पदों सहित) का ब्योरा दिया जाये. किस विभाग में कितने स्वीकृत पद हैं, स्वीकृत पदों पर कितने कर्मी कार्यरत हैं. इसमें अनुबंध, अस्थायी व दैनिक वेतन भोगी कर्मी कितने हैं. ये कर्मी किस समय से काम कर रहे हैं.
इसके लिए मुख्य सचिव को छह सप्ताह के अंदर शपथ पत्र के माध्यम से रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया. अदालत ने उक्त आदेश की प्रति महाधिवक्ता कार्यालय को भेजने का निर्देश दिया, ताकि मुख्य सचिव को सूचित किया जा सके. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने छह सप्ताह के बाद तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी नीतिन कुमार भगत व अन्य की अोर से याचिका दायर की गयी है.
याचिका में प्रार्थियों ने कहा है कि वह अनुबंध पर काम करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में 10 वर्ष या अधिक समय से कार्यरत अनुबंधकर्मियों की सेवा नियमित करने का आदेश दिया है, लेकिन राज्य सरकार उक्त आदेश का अनुपालन नहीं कर रही है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में सेवा नियमित करने की मांग की है.
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