शहरी क्षेत्र में बदलेगी गोचर भूमि की प्रकृति - अमर बाउरी
Updated at : 19 Jan 2019 12:06 AM (IST)
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रांची़ : शहरी क्षेत्र या नगर निकायों में स्थित गोचर भूमि को चिह्नित कर इसकी प्रकृति बदली जायेगी. इससे संबंधित आदेश सभी उपायुक्तों को दे दिया गया है. यह बात भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने विधानसभा सत्र के दौरान कही. गोचर भूमि को लेकर तारांकित प्रश्नों के दौरान विधायक अमित मंडल ने गोड्डा नगर परिषद […]
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रांची़ : शहरी क्षेत्र या नगर निकायों में स्थित गोचर भूमि को चिह्नित कर इसकी प्रकृति बदली जायेगी. इससे संबंधित आदेश सभी उपायुक्तों को दे दिया गया है. यह बात भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने विधानसभा सत्र के दौरान कही.
गोचर भूमि को लेकर तारांकित प्रश्नों के दौरान विधायक अमित मंडल ने गोड्डा नगर परिषद समेत पूरे राज्य के नगर निकायों में गोचर भूमि का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में गोचर भूमि पर पशुपालक नहीं हैं, जिसके कारण भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है.
शहर में कई नयी योजनाओं का क्रियान्वयन भी इसलिए नहीं हो रहा है कि शहर में जमीन उपलब्ध नहीं है. उन्होंने ऐसे भूमि की प्रकृति परिवर्तन करने की मांग की.
जवाब में मंत्री ने कहा कि 17.11.2016 को विभागीय संकल्प द्वारा झारखंड राज्य अंतर्गत संताल परगना प्रमंडल प्रक्षेत्र में गैर मजरुआ गोचर भूमि के हस्तांतरण के संबंध में गोचर भूमि के प्रतिपूर्ति के लिए अन्य गैर मजरुआ भूमि को गोचर भूमि अधिसूचित करने एवं उसे अंतर्विभागीय नि:शुल्क हस्तांतरण करने की शक्ति संबंधित जिला के उपायुक्त को अधिकृत किया गया है.
विधायकों द्वारा कहा गया कि अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी है. विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि वन भूमि की तर्ज पर गोचर भूमि के लिए भी अलग जगह चिह्नित की जाये. इरफान अंसारी ने कहा कि जामताड़ा में गोचर भूमि से 40 घरों को उजाड़ दिया गया है. मंत्री ने कहा कि पूरे शहरी क्षेत्र की गोचर भूमि को ही चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
विस्थापन के मुद्दे पर आयोग बनाने की मांग
रांची़ सदन में विस्थापन का मुद्दा जोर-शोर से उठा़ पक्ष-विपक्ष के विधायकों का कहना था कि झारखंड में लाखों लोग विस्थापित हुए है़ं विस्थापन का दंश झारखंड ने झेला है़ विस्थापितों को कुछ नहीं मिला़ जमीन चली गयी, नौकरी व मुआवजा भी नहीं मिला़
इसके लिए सरकार एक आयोग बनाये, जहां विस्थापितों को न्याय मिल सके़ मंत्री अमर बाउरी का जवाब था कि सरकार ने वर्ष 2015 में विस्थापितों की समस्या को देखते हुए त्रिस्तरीय कमेटी बनायी है़ राज्य सरकार विस्थापितों के मामले को संजीदगी से देख रही है़
सत्ता पक्ष के विधायक विरंची नारायण ने बोकारो स्टील सिटी के विस्थापितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बोकारो सहित बीसीसीएल, सीसीएल, सिंचाई परियोजना से लाखों लोग विस्थापित हुए है़ं
70 साल हो गये, इन विस्थापितों को न्याय नहीं मिला़ ढुल्लू महतो ने बीसीसीएल के विस्थापितों का मामला उठाते हुए कहा कि विस्थापितों को ना नौकरी मिली, ना ही मुआवजा मिला़
योगेश्वर महतो बाटुल का कहना था कि राज्य में सही तरीके से जांच हो तो पता चलेगा कि 30 प्रतिशत लोग विस्थापित है़ं मासस विधायक अरूप चटर्जी का कहना था कि ऐसी जमीन चिह्नित होनी चाहिए़
झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी का कहना था कि राज्य सरकार केंद्र की बात कर पल्ला नहीं झाड़ सकती है़ स्पीकर दिनेश उरांव का कहना था कि सरकार इस मामले को देखे़ कमेटी को काम करने दिया जाये़ मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि कमेटी समय सीमा के अंदर काम करेगी़ कमेटी को मौका दिया जाये़
विधायक अमित मंडल ने कहा कि शहरी क्षेत्र में गोचर भूमि पर पशुपालक नहीं हैं, जिसके कारण भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है
विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि वन भूमि की तर्ज पर गोचर भूमि के लिए भी अलग जगह चिह्नित की जाये
इरफान अंसारी ने कहा कि जामताड़ा में गोचर भूमि से 40 घरों को उजाड़ दिया गया है
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