रांची : पितृसत्तात्मक व्यवस्था पुरुषों को हिंसक बनाती है : भसीन

Updated at : 10 Oct 2018 6:37 AM (IST)
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रांची : पितृसत्तात्मक व्यवस्था पुरुषों को हिंसक बनाती है : भसीन

संपूर्ण क्रांति आंदोलन की नेत्री नूतन की स्मृति में प्रभावती सम्मान अौर व्याख्यान समारोह का आयोजन रांची : प्रख्यात नारीवादी कार्यकर्ता, लेखिका अौर समाज विज्ञानी कमला भसीन ने कहा है कि पितृसत्ता, जातिवाद अौर पूंजीवाद एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इन तमाम वाद से हमें मिल कर लड़ना होगा. महिलाअों के खिलाफ हिंसा खत्म करने […]

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संपूर्ण क्रांति आंदोलन की नेत्री नूतन की स्मृति में प्रभावती सम्मान अौर व्याख्यान समारोह का आयोजन
रांची : प्रख्यात नारीवादी कार्यकर्ता, लेखिका अौर समाज विज्ञानी कमला भसीन ने कहा है कि पितृसत्ता, जातिवाद अौर पूंजीवाद एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. इन तमाम वाद से हमें मिल कर लड़ना होगा. महिलाअों के खिलाफ हिंसा खत्म करने में पुरुषों की भूमिका अहम है. पुरुषों में हिंसा कोई बायोलॉजिकल चीज नहीं है. तृसत्तात्मक व्यवस्था पुरुषों को हिंसक बनाती है. वह मंगलवार को एसडीसी सभागार में आयोजित संपूर्ण क्रांति आंदोलन की नेत्री नूतन की स्मृति में आयोजित प्रभावती सम्मान अौर व्याख्यान समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं.
यह आयोजन देशज मार्ग पटना अौर संवाद के तत्वावधान में किया गया था. कमला भसीन ने महिला हिंसा के संबंध में कहा कि भारत में अभी तक 63 मिलियन लड़कियां पितृसत्तात्मक व्यवस्था की वजह से मारी जा चुकी हैं. किसी की दहेज हत्या हुई, तो किसी को गर्भ में ही मार दिया गया.
इन्हें मारने वाले इनके परिवार के ही थे. ऐसे में लगता है कि एक लड़की के लिए सबसे खतरनाक जगह उसका परिवार ही है. यह पितृसत्तात्मक व्यवस्था ही है, जिसमें विवाह के समय लड़की का कन्यादान किया जाता है. दान निर्जीव वस्तुअों का होता है अौर लड़की कोई वस्तु नहीं है. उस पर किसी का हक नहीं होना चाहिए. समारोह को साहित्यकार डॉ रोज केरकेट्टा, श्रावणी, शशि बारला ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र नारायण कर्ण ने किया. पंकज बेतिया ने कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी.
प्रभावती सम्मान से सम्मानित हुईं प्रो मालंच घोष : कार्यक्रम में प्रो मालंच घोष को प्रभावती सम्मान 2018 से सम्मानित किया गया. मालंच घोष महिला महाविद्यालय से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं. उन्होंने महिला उत्पीड़न विरोधी एवं विकास समिति नाम की संस्था बनायी है. संस्था के माध्यम से वह महिला हिंसा के खिलाफ तथा महिला सशक्तीकरण का काम कर रही हैं. कार्यक्रम में घनश्याम, मनोरमा, डॉ मीनाक्षी मुंडा सहित अन्य उपस्थित थे.
अब प्रताड़ित होने पर चुप रहने को तैयार नहीं हैं महिलाएं
कमला भसीन ने कहा है कि बलात्कार ताकत से जुड़ा अपराध है. अब एक माहौल बन रहा है, जब महिलाएं प्रताड़ित होने पर चुप रहने को तैयार नहीं हैं. नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता मामले को यह कह कर हम खारिज नहीं कह सकते कि यह दस साल पुराना मामला है़
हम यह नहीं कह सकते कि सबरीमाला मंदिर या तीन तलाक के मामले इतने वर्षों के बाद क्यों उठे? मेरे साथ भी आठ साल की उम्र में यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी और मैंने 45 साल बाद इस विषय पर अपना मुंह खोला़ बातें तब सामने आती हैं, जब सही अवसर और माहौल मिलता है़
वर्षों बाद भी महिलाएं इसलिए बोलती हैं, क्योंकि वे परिस्थितियों में बदलाव चाहती हैं. वह मंगलवार को एसडीसी सभागार, पुरूलिया रोड में पत्रकारों से रूबरू थीं. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाओं के खिलाफ प्रताड़ना के मामले कम होते हैं.
आर्थिक रूप से सशक्त महिलाओं के खिलाफ प्रताड़ना के छह प्रतिशत मामले होते हैं, तो आर्थिक रूप से निर्भर महिलाआें की प्रताड़ना की दर 47 प्रतिशत है़ इसके लिए धर्म, संस्कार और सांस्कृतिक तौर-तरीके भी जिम्मेदार हैं.
हमें स्त्री को वस्तु समझने का पुरुषवादी नजरिया बदलने की जरूरत है़ एक सांस्कृतिक आंदोलन की जरूरत है़ आदिवासी समाज में स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव अपेक्षाकृत कम है, पर उनमें भी हिंदुत्व व ईसाइयत ने पितृसत्ता फैला दी है़
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