रांची : रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी करने पर रद्द होगा रजिस्ट्रेशन

Updated at : 07 Aug 2018 5:47 AM (IST)
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रांची : रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी करने पर रद्द होगा रजिस्ट्रेशन

रांची : शोधार्थी द्वारा रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी करने पर उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जायेगा, जबकि शिक्षक की नौकरी भी जा सकती है.इसमें रिसर्च करानेवाले गाइड भी शामिल होंगे. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नये नियम को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है. यूजीसी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर […]

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रांची : शोधार्थी द्वारा रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी करने पर उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जायेगा, जबकि शिक्षक की नौकरी भी जा सकती है.इसमें रिसर्च करानेवाले गाइड भी शामिल होंगे. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नये नियम को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है. यूजीसी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर यह कदम उठाया है.
मंत्रालय ने यूजीसी को जानकारी दी है कि कई अभ्यर्थियों ने दूसरे द्वारा किये गये शोध पत्र का सिर्फ टाइटल बदल कर शोध की डिग्री हासिल कर ली है.
इस पर रोक लगाना आवश्यक है. जानकारी के अनुसार यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा अौर साहित्य चोरी की रोकथाम के लिए प्रोत्साहन विनियम 2018 को अधिसूचित कर दिया है. वायर के अनुसार यूजीसी ने पिछले दिनों बैठक कर नियमावली को मंजूरी देते हुए साहित्यक चोरी के लिए दंड का प्रावधान भी किया है. इसके अनुसार दंड के चार स्तर निर्धारित किये गये हैं.
इनमें शून्य स्तर पर कोई पेनाल्टी नहीं है, जबकि तीसरे स्तर पर रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जायेगा. डिग्री मिल जाने की स्थिति में शोधार्थी को अपनी मूल कॉपी (मेनस्क्रिप्ट ) वापस लेने के लिए कहा गया जायेगा. लगातार दो वार्षिक इंक्रीमेंट का अधिकार नहीं दिया जायेगा अौर तीन साल के लिए बिना किसी नये एमफिल/पीएचडी के लिए सुपरवाइजर नहीं बन सकेंगे.
यानी 10 प्रतिशत तक साहित्यिक चोरी करने पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है, जबकि 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच चोरी पकड़े जाने पर छह महीने के भीतर संशोधित शोध पत्र पेश करना होगा. इसी तरह 40 से 60 प्रतिशत समानताएं मिलने पर छात्रों को एक साल के लिए संशोधित पेपर जमा करने से रोक दिया जायेगा. इससे ऊपर के मामले में रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जायेगा.
इस नियम के तहत शिक्षकों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है. उनके शोध में 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत समानता पर मूल कॉपी वापस लेने को कहा जायेगा.
इससे अधिक यानी 40 से 60 प्रतिशत समानता पर तीन वर्ष की अवधि के लिए पीएचडी छात्र का सुपरविजन करने से रोक दिया जायेगा अौर दो वेतन वृद्धि के अधिकार से वंचित किया जायेगा. 60 प्रतिशत से अधिक समानता पर उनके खिलाफ निलंबन या सेवा समाप्ति का भी कदम उठाया जायेगा.
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