Ranchi Diwali: सड़क किनारे दुकानदारों की दिवाली, दीयों में छिपी उम्मीद
रांची में सड़क किनारे सजती है गरीबों की दिवाली. (Credit: Achal Priyadarshy)
रांची की दीपावली में सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों की कहानी. जानिए कैसे दीये, फूल और घरौंदे बेचकर ये परिवार त्योहार में कमाई और खुशियों की उम्मीद रखते हैं.
बड़े शोरूम और चमकते बाजारों के बीच सड़क किनारे सजी छोटी-छोटी दुकानें भी दीपावली की कहानी कहती हैं. किसी के हाथ में मिट्टी का दीया है, तो किसी की दुकान पर गेंदे की माला, घरौंदा और पूजा सामग्री.
रांची के अपर बाजार, लालपुर, कोकर, कचहरी, डोरंडा और मेन रोड की सड़कों पर बैठे इन छोटे विक्रेताओं के लिए दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे साल की कमाई बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है.

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ग्राहकों की भीड़ में तलाशते हैं अपनी खुशियां
दीपावली नजदीक आते ही रांची की सड़कों पर अस्थायी दुकानें सज जाती हैं.

मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, रंगोली, फूल-माला, करंज तेल, सजावटी सामान और घरौंदे बेचने वाले छोटे दुकानदार सुबह से देर रात तक ग्राहकों का इंतजार करते हैं.

इस बार भी रांची के बाजारों में दीये, रंगोली और सजावटी लाइट की दुकानों पर ग्राहकों की अच्छी आवाजाही देखी गई.
अपर बाजार और दूसरे प्रमुख बाजारों में खरीदारी की रौनक रही.
कुछ दिनों की कमाई से चलता है घर का खर्च
इनमें कई विक्रेता ऐसे हैं, जो दीपावली के कुछ दिनों को अपनी अतिरिक्त कमाई का सबसे बड़ा मौका मानते हैं. कोई गांव से मिट्टी के दीये और घरौंदे लेकर आता है, तो कोई थोक बाजार से फूल और पूजा सामग्री खरीदकर सड़क किनारे बेचता है.

इनकी पूंजी सीमित होती है और मुनाफा भी बहुत बड़ा नहीं होता. मौसम, ग्राहकों की संख्या और बिक्री पर इनकी कमाई निर्भर करती है.
अगर सामान समय पर बिक गया, तो घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और जरूरी जरूरतों के लिए कुछ अतिरिक्त पैसे जुट जाते हैं. वहीं, बचा हुआ सामान अगले दिन की चिंता बन सकता है.

मिट्टी के दीये से लेकर घरौंदे तक, हर सामान की अपनी कहानी
रांची में दीपावली के दौरान सड़क किनारे मिट्टी के दीयों और घरौंदों की खास मांग रहती है. वर्ष 2025 में शहर के अस्थायी पूजा बाजारों में सामान्य दीये 150-200 रुपये सैकड़ा और डिजाइनर दीये 10-20 रुपये प्रति पीस तक बिके थे. घरौंदों की कीमत 250 से 400 रुपये तक दर्ज की गई थी.

इस साल भी मिट्टी और हस्तनिर्मित उत्पादों का बाजार लोगों को आकर्षित कर रहा है. खासकर स्थानीय कारीगरों और छोटे विक्रेताओं के लिए यह परंपरा रोजगार का अवसर बनती है.

आपकी छोटी खरीदारी, किसी के घर की बड़ी खुशी
दीपावली पर हम घरों को रोशन करने के लिए हजारों रुपये खर्च करते हैं. लेकिन बाजार में सड़क किनारे बैठे छोटे विक्रेताओं से कुछ दीये, फूल या सजावटी सामान खरीदना भी किसी परिवार की दिवाली बेहतर बना सकता है.


इनके लिए हर ग्राहक सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि त्योहार की उम्मीद है.
बड़े बाजारों की चमक अपनी जगह है, लेकिन रांची की असली दिवाली उन छोटी दुकानों में भी दिखाई देती है, जहां मेहनत से कमाई गई थोड़ी-सी रकम में पूरे परिवार की मुस्कान छिपी होती है.

इस दीपावली जब आप बाजार जाएं, तो सड़क किनारे बैठे उस छोटे दुकानदार को भी याद रखें. हो सकता है, आपके खरीदे हुए कुछ दीये उसके घर में भी खुशियों की रोशनी जला दें.

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