परिवार मांग रहा इच्छा मृत्यु दाने-दाने को हो गये मोहताज

Updated at : 14 Feb 2018 8:25 AM (IST)
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परिवार मांग रहा इच्छा मृत्यु दाने-दाने को हो गये मोहताज

सुरेंद्र/शंकर रजरप्पा : सीसीएल रजरप्पा वाशरी के केटेगरी चार में कार्यरत लापता रामप्रसाद मांझी के परिवार जिंदगी से परेशान हो गये हैं. यह परिवार अब इच्छा मृत्यु मांग रहा है. प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक अपनी फरियाद कर चुके हैं, लेकिन कहीं से भी इन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है. राशन कार्ड से प्रतिमाह […]

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सुरेंद्र/शंकर

रजरप्पा : सीसीएल रजरप्पा वाशरी के केटेगरी चार में कार्यरत लापता रामप्रसाद मांझी के परिवार जिंदगी से परेशान हो गये हैं. यह परिवार अब इच्छा मृत्यु मांग रहा है. प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक अपनी फरियाद कर चुके हैं, लेकिन कहीं से भी इन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है. राशन कार्ड से प्रतिमाह मिलनेवाले 18 किलो चावल से किसी तरह चार लोगों की जीविका चल रही है.

यह लोग एक शाम खाते हैं, तो एक शाम भूखे रहते हैं. लापता रामप्रसाद की पत्नी ज्योति बास्के उर्फ बेबी कुमारी ने बताया कि मेरे पति ने 22 वर्षों तक सीसीएल की सेवा की. वह 11 मई 2014 को ड्यूटी से आने के बाद शाम में क्वार्टर से मोटरसाइकिल (जेएच02डब्ल्यू-5098) से निकले थे. इसके बाद वह वापस नहीं आये. उन्होंने 14 मई 2014 को अपने पति की गुमशुदगी का मामला रजरप्पा थाना में दर्ज कराया था.

एसपी को भी पत्र लिख कर पति की खोजबीन की मांग की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. इस बीच, परिवार की स्थिति दयनीय होती गयी. रजरप्पा प्रबंधन को 2014 से 2017 तक कई बार पत्र भेज कर आर्थिक सहायता की मांग की गयी, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की गयी. ज्योति ने प्रबंधन से सीसीएल द्वारा की गयी कटाैती से भी राशि देने की मांग की, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली. उन्होंने महाप्रबंधक को पत्र लिख कर बच्चों की स्कूल फीस माफ कराने की मांग की, लेकिन इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया. गाैरतलब हो कि रामप्रसाद मांझी के परिजन रजरप्पा प्रोजेक्ट डीएस कॉलोनी 661 नंबर क्वार्टर में रह रहे हैं.

जीवन से हार गयी हूं : पत्नी

चार वर्षों में ही जीवन से हार गयी हूं. अब हमारे पास शक्ति नहीं है. खाने – पीने के लाले पड़ गये हैं. प्रबंधन से भी काम मांगा, लेकिन मुझे झाड़ू -पोंछा का भी काम नहीं मिला. अपने तीन बच्चे अंजली स्नेहा बास्के वर्ग (10) अभिषेक बास्के ( नवम) व अक्षय राज बास्के (छह ) की बोझ नहीं उठा पा रही हूं. किसी तरह की कोई सहायता भी नहीं मिल रही है. अब हमलोग प्रशासन व प्रबंधन से इच्छा मृत्यु मांग रहे हैं.

मंत्री के लिखने के बावजूद फीस माफ नहीं हुई

ज्योति ने विधायक सह पेयजल व स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी को अपने बच्चों की फीस माफ कराने के लिए आवेदन दिया था. इस पर मंत्री श्री चौधरी ने महाप्रबंधक को डीएवी पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत तीनों बच्चों की फीस माफ करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद फीस माफ नहीं की गयी. तीन छात्रों की फीस लगभग 12 हजार बाकी है.

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