ओरियातू में ठंड से गयी बेघर की जान

Updated at : 04 Dec 2017 12:26 PM (IST)
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ओरियातू में ठंड से गयी बेघर की जान

भदानीनगर: रामगढ़ जिला अंतर्गत पतरातू प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव ओरियातू में शनिवार को कड़ाके की ठंड से शनिचर उरांव (50) की मौत हो गयी. शनिचर उरांव गत दो माह से कपड़े के टेंटनुमा घर में रह रहा था. दो माह पूर्व बरकाकाना-रांची रेल लाइन निर्माण के दौरान उसके घर पर बुलडोजर चला दिया गया था. […]

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भदानीनगर: रामगढ़ जिला अंतर्गत पतरातू प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव ओरियातू में शनिवार को कड़ाके की ठंड से शनिचर उरांव (50) की मौत हो गयी. शनिचर उरांव गत दो माह से कपड़े के टेंटनुमा घर में रह रहा था.

दो माह पूर्व बरकाकाना-रांची रेल लाइन निर्माण के दौरान उसके घर पर बुलडोजर चला दिया गया था. वह गरीब था. इसके कारण बेघर होने के बाद वह किसी तरह कपड़े का घेरा डाल कर उसमें रहने को विवश था. विगत एक सप्ताह से ठंड बढ़ने के कारण शनिचर को ठंड लग गयी. शनिचर के परिवार में कोई नहीं है.

गांव वालों ने रविवार को मसानादाह अंबर घाट में अंतिम संस्कार कर दिया. इधर, ठंड से मौत की सूचना के बाद पंचायत की मुखिया रेखा देवी भी चिंतित हैं. सोमवार वह गांव पहुंच कर कंबल बांटेंगी. उन्होंने बताया कि गांव में कंबल भेज दिया गया है. प्रभावित परिवारों की सुध ली जायेगी. इधर, रामगढ़ एसडीअो अनंत कुमार ने कहा कि हमें मामले की जानकारी नहीं है. प्रशासन त्वरित संज्ञान लेते हुए इस मामले की जानकारी लेगा.
आंदोलन करेगा झाविमो : गोविंद
ठंड से हुई मौत के मामले पर झाविमो के जिलाध्यक्ष गोविंद बेदिया ने कहा कि ओरियातू सहित आसपास के गांवों में रेलवे व प्रशासन द्वारा की गयी कार्रवाई के दौरान वे वहां गये थे. उन्होंने पुनर्वास की मांग की थी. बगैर पुनर्वास के गरीबों के घर पर बुलडोजर चला दिया गया. यह तानाशाही का प्रतीक है. प्रशासन अविलंब वहां के अन्य प्रभावित परिवारों को ठंड से बचाने की व्यवस्था करे. अन्यथा झाविमो आंदोलन करेगा.
दर्जनों लोग झेल रहे हैं ठंड की मार
बरकाकाना-रांची रेल लाइन निर्माण के दौरान करीब दो माह पूर्व प्रशासन ने यहां दर्जनों घरों पर बुलडोजर चला दिया था. मात्र 15 दिन के अलटीमेटम पर बगैर पुनर्वास की व्यवस्था कराये प्रशासन ने घरों को तोड़ा था. ओरियातू के अलावा सिलदाग व निम्मी पतरा गांव के लोग भी बेघर हुए थे. बेघर होने के बाद गरीब ग्रामीण अपना ठौर-ठिकाना अब तक नहीं खोज सके. ऐसे ही लोगों में शनिचर उरांव भी शामिल था. इसके अलावा सुकरा उरांव, आजाद उरांव, प्रकाश टोप्पो व रामदेव उरांव अपने परिवार के साथ अब भी कपड़े का टेंट बना कर रह रहे हैं. कुछ लोग दूसरों के यहां पनाह लिये हुए हैं. कुछ लोग स्कूलों में भी शरण लिये हुए हैं. रेलवे से प्रभावित अन्य गांवों की भी तस्वीर ऐसी ही है.
अब तक नहीं मिला है मुआवजा
रेलवे से प्रभावित हुए कई लोगों को अब भी मुआवजा नहीं मिला है. ऐसे लोग प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं. ऐसे लोगों में निम्मी पतरा, ओरियातू गांव के सुनील उरांव, प्रकाश टोप्पो, पहलू उरांव, अनिल उरांव, कलेंद्र महतो, दांदू मुंडा, जुगल उरांव शामिल हैं.
अमानवीय है रेल व प्रशासन का व्यवहार : फागू
रैयत विस्थापित मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा ने शनिचर उरांव की ठंड से हुई मौत पर चिंता जतायी. कहा कि झारखंड में विस्थापितों को देखने वाला कोई नहीं है. ओरियातू की घटना रेलवे व प्रशासन की अमानवीय व्यवहार का परिचायक है. यहां विस्थापितों के घरों पर बगैर पुनर्वास की व्यवस्था के बुलडोजर चला दिया गया. गरीब आदिवासी टेंट में रह रहे थे. प्रशासन ने कड़ाके की ठंड में उनकी सुध नहीं ली. प्रभावित स्थान पर मोर्चा अपनी टीम भेजेगी.
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