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पुल नहीं बना, तो आंदोलन किया जायेगा

Updated at : 08 Jun 2025 7:04 PM (IST)
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पुल नहीं बना, तो आंदोलन किया जायेगा

चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के चांदो में रविवार को चांदो और चियांकी स्टेशन के बीच कोयल नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों की बैठक हुई

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कोयल नदी पर पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने की बैठक, कहा

करीब पचास वर्षों से हो रही पुल की मांग

2009 में पुल बनाने की मिली थी स्वीकृति

पुल बनने से बीस गांव के लगभग पैंतीस हजार की जनसंख्या होती लाभान्वित

फोटो: 08 डालपीएच 06

प्रतिनिधि: चैनपुर. चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के चांदो में रविवार को चांदो और चियांकी स्टेशन के बीच कोयल नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता शिवप्रसाद यादव नें की. बैठक में पुल निर्माण कराने को लेकर चर्चा की गयी. कहा गया कि इस क्षेत्र के जनता का अनदेखी करते हुए पुल निर्माण कार्य को लंबित रखा गया है. जबकि पुल बन जाने से 20 गांव के लगभग पैंतीस हजार जनता लोग लाभान्वित होते. पुल नहीं बनने से शहर मजदूरी करने जाने वाले मजदूर, छात्र छात्राएं और प्रतिदिन शहर जाने वाले लोग प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के लिए 2009 में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति मिली है. 2014 में झारखंड सरकार के तत्कालीन मंत्री केएन त्रिपाठी नें पुल निर्माण की आधारशिला भी रखी थी. इसके लिए पीडब्लूडी विभाग द्वारा तकनीकी प्रक्रिया पूरा कर राज्य सरकार के पास रिपोर्ट भेजी गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग पुल निर्माण के लिए स्थानीय सांसद, विधायक से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास व वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गुहार लगा चुके हैं. लेकिन सभी के द्वारा सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है. ग्रामीणों नें सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पुल निर्माण के लिए एक बार पुनः राज्य सरकार से गुहार लगायी जाये. इस बार भी राज्य सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है तो इस क्षेत्र के सभी ग्रामीण उग्र आंदोलन और चुनाव का बहिष्कार करेंगे. बैठक में सुधीर कुमार यादव, मदन कुमार यादव, विरेंद्र सिंह, राजेंद्र प्रसाद, रमेश प्रसाद, ब्रजभूषण चौबे, विजय सिंह, नंदलाल सिंह, राजकुमार वर्मा, अजय कुमार सिंह, राजाराम सिंह, जितेंद्र भुईयां, प्रमोद कुमार सिंह, श्रवण कुमार चौधरी सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

सर्वप्रथम 1976 में पूल निर्माण की उठी थी मांग

दोकरा गांव के ग्रामीण राजकिशोर ठाकुर नें बताया कि 1976 के बरसात में नदी पार करने के दौरान एक नाव पलटने से सात लोगों की मौत हो गयी थी. तभी से चांदो और चियांकी के बीच पुल निर्माण की मांग की जा रही है.

पूल निर्माण से चांदो मेदिनीनगर की कम हो जाती दूरी

चांदो गांव के पूर्व सरपंच शिव प्रसाद यादव ने बताया कि अभी लगभग 17-18 किलोमीटर दूरी तय कर लोग मेदिनीनगर जाते हैं जबकि पूल बन जाने से मेदिनीनगर की दूरी सिर्फ 8-9 किलोमीटर ही रह जाती.

मेदिनीनगर जाने में खर्च में भी होती कमी

चांदो के ग्रामीण विष्णुदेव सिंह ने बताया कि यह पिछड़ा क्षेत्र है यहां के लोग प्रतिदिन मजदूरी करने मेदिनीनगर जाते हैं तथा इस क्षेत्र के पढ़नेवाले बच्चों को कॉलेज कोचिंग जाने के लिए प्रतिदिन 60 रुपया गाड़ी भाड़ा लगता है, जबकि पुल बनने से मात्र 10 रुपए में मेदिनीनगर पहुंच जाते.

बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

चांदो के ग्रामीण संजय सिंह नें बताया कि पूल का निर्माण नहीं होने से इस क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रहा है क्योंकि विद्यार्थियों को पढ़ाई करने जाने के लिए 60 रुपए गाड़ी भाड़ा में ही चला जाता है और अन्य खर्च अलग से होता है. जिससे गरीब विद्यार्थी को प्रतिदिन मेदिनीनगर आना जाना मुश्किल हो जाता है और मजबूरन पढ़ाई बीच में छोड़ देना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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