उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक व तकनीकी सुधार जरूरी

Updated at : 30 Nov 2018 7:38 AM (IST)
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उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक व तकनीकी सुधार जरूरी

मेदिनीनगर: गुरुवार को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुआ. पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति नगर भवन में इसका आयोजन किया गया था. राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के 162 प्रतिभागियों ने भाग लिया.शिक्षकों व शोधार्थियों ने उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक विकास पर जोर दिया. कहा कि उच्चतर […]

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मेदिनीनगर: गुरुवार को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुआ. पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति नगर भवन में इसका आयोजन किया गया था. राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के 162 प्रतिभागियों ने भाग लिया.शिक्षकों व शोधार्थियों ने उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक विकास पर जोर दिया.
कहा कि उच्चतर शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के बदौलत ही राज्य का मानव संसाधन विकसित होगा. इसके लिए यह आवश्यक है कि उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक व तकनीकी सुधार किया जाये. बेहतर प्रबंधन व समुचित विकास के लिए उच्च शिक्षा में गुणात्मक व तकनीकी सुधार जरूरी है.
संगोष्ठी में बाहर से आये विभिन्न विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक व तकनीकी सुधार विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला. दो दिवसीय संगोष्ठी में विद्वत जनों के मंथन के बाद यह बात उभर कर सामने आया कि उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक सुधार तभी हो सकता है, जब शिक्षकों व विद्यार्थियों के अलावा समाज व राजनीति से जुड़े लोग सकारात्मक प्रयास करेंगे. सबकी सक्रिय सहभागिता व सकारात्मक प्रयास से ही उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक सुधार संभव है.
झारखंड के उच्चतर शिक्षा को सामाजिक सरोकार के रूप में महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि अनुसंधानों का उपयोग जन कल्याण के लिए किया जा सके. विद्यार्थियों को केवल उपाधि धारक नहीं बनाया जाये, बल्कि उन्हें क्षमता धारक मानव के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. विद्यार्थियों को भी अपने जीवन का लक्ष्य तय कर के पूरी तनम्यता के साथ पढ़ाई करनी चाहिए, ताकि वे क्षमता धारक मानव बन सके न की उपाधि धारक. बदलते परिवेश में विद्यार्थियों को सर्वगुण संपन्न होने की जरूरत है.
उच्चतर शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान में भी पारंगत होना चाहिए. मेक इन इंडिया का उपयोग केवल औद्योगिक विकास में ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन के विकास में भी किया जाना चाहिए. आजादी के बाद देश में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों की संख्या में वृद्धि हुई है. विद्यार्थियों की संख्या 60 गुणा व शिक्षकों की संख्या 25 गुणा बढ़ी है.
उच्चतर शिक्षा के लिए संसाधनों का विकास व व्यवस्था में सुधार की जरूरत है. संगोष्ठी में रांची विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ श्यामली बनर्जी, डॉ एसएन प्रजापति, संत जेवियर्स कॉलेज के डॉ हरेश्वर दयाल, बीएचयू के डॉ वीर प्रताप, डॉ रामा शंकर आदि ने विचार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ विभा शंकर, डॉ मनोरमा सिंह, डॉ निशा रानी गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया.
मौके पर डॉ अनिता सिन्हा, प्रोफेसर के के मिश्रा, प्रो एससी मिश्रा, डॉ प्रवीण प्रभाकर, डॉ वीडी सिंह, डॉ विजय कुमार प्रसाद, डॉ अजीत सेठ, डॉ विनय कुमार बैठा, प्रो अर्जुन प्रसाद, प्रो कुर्रतुल्लाह, प्रो. उमेश सहाय, प्रो अरुण कुमार पाठक, डॉ एसके पांडेय, डॉ एनके सिंह, डॉ घनश्याम पांडेय, डॉ अरुण कुमार सिंह, सुकृति कुमारी, मनोज चौधरी, प्रियंका गुप्ता, पूजा कुमारी, रीमा कुमारी, मधु कुमारी, सोनिका मिंज सहित अन्य लोग मौजूद थे. पांच तकनीकी सत्र में संगोष्ठी संपन्न हुआ.
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