4700 हेक्टेयर में बिचड़ा लगाने का लक्ष्य

By Prabhat Khabar Digital Desk
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जुलाई के प्रथम सप्ताह में बारिश होने से किसान आशान्वित
मेदिनीनगर : जून माह में औसत वर्षापात से काफी कम बारिश हुई है. यदि जुलाई माह में यहीं स्थिति रही, तो परेशानी बढ़ सकती है. यद्यपि जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में मौसम का मिजाज देख कर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि स्थिति में अपेक्षित बदलाव होगा. जून माह का औसत वर्षापात 152 मिमी है.
लेकिन इसके विरुद्ध इस वर्ष जून माह में मात्र 30 मिमी बारिश हुई है. जोकि औसत वर्षापात से 122 मिमी कम है. यह स्थिति कृषि के दृष्टिकोण से उचित नहीं है. जानकारों की माने तो जून ने निराश किया है. यदि जुलाई में औसत वर्षापात हो तो स्थिति में बदलाव आ जायेगा. जून में कम बारिश होने के कारण धान के बिचड़े लक्ष्य के अनुरूप नहीं लगाया जा सका है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पलामू में 4700 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा लगाने का लक्ष्य रखा गया है. जुलाई के प्रथम सप्ताह तक बिचड़ा लगाने का काम पूरा हो जाना चाहिए था. लेकिन कम बारिश होने के कारण यह संभव नहीं हो सका.
क्योंकि धान के खेत में पानी नहीं है. ऐसे में बिचड़ा कहां से होगा? जुलाई के प्रथम सप्ताह में जो बारिश हुई है, उससे उम्मीद जगी है कि कृषि के लिए बेहतर होगा. क्योंकि पिछले 15 वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें, तो वर्ष 2016 ही ऐसा वर्ष था जब पलामू में औसत वर्षापात हुई. इस बार भी अच्छी बारिश की उम्मीद है, लेकिन अभी तक की स्थिति किसानों के लिए निराशाजनक ही है. वैसे पिछले दो-तीन दिन में जो बारिश हुई, उससे किसानों के चेहरे पर खुशी देखी जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि 10 जुलाई तक बिचड़ा लगाया जायेगा.
क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी
पलामू के जिला कृषि पदाधिकारी एडमंड मिंज का कहना है कि यह सही है कि जून में अपेक्षित बारिश नहीं हुई है. फिर भी अभी निराश होने की जरूरत नहीं है. किसानों के पास अभी भी पर्याप्त समय है. किसानों को विभाग द्वारा कम समय में तैयार होने वाला बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. पलामू की परिस्थिति को देखते हुए यहां के किसानों को चाहिए कि वह धान के वैसे प्रजाति का बिचड़ा लगाये, जो कम समय में तैयार हो जाये. उन्होंने बताया कि 110 से 115 दिन में तैयार होने वाले धान का बिचड़ा अभी किसान लगा सकते हैं. धान के उपज में कोई कमी नहीं आयेगी.
पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसान परेशान
गांव में पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है. यह स्थिति भी किसानों को परेशान कर रहा है. अभी गांव में औसतन 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है. वह भी नियमित नहीं. बताया जाता है कि किसान बिजली के इंतजार में रात भर खेत के पास ही गुजार दे रहे हैं और कभी कभी स्थिति यह हो जाती है कि रात भर बिजली नहीं आती.
किसान मदन मोहन मिश्र का कहना है कि यदि ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की कोई समय निर्धारित कर दिया जाता कि इस अवधि में बिजली मिलेगी ही, तब किसान कुछ बेहतर कर सकते थे. जून में बारिश नहीं हुई थी. अभी जुलाई में हो रही है. पटवन के लिए यदि बिजली मिलती, तो किसान पटवन कर धान का बिचड़ा लगा सकते थे.
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