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Uttarakhand Glacier Disaster : लोहरदगा के 9 मजदूरों को सकुशल वापस लाने 5 सदस्यीय टीम रवाना हुई चमोली, परिजनों की बढ़ी आस

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : लोहरदगा के 9 मजदूरों के चमोली में लापता होने पर परिजनों की बढ़ी चिंता.
Jharkhand news : लोहरदगा के 9 मजदूरों के चमोली में लापता होने पर परिजनों की बढ़ी चिंता.
फाइल फोटो

Uttarakhand Glacier Disaster, Jharkhand News, Lohardaga News, लोहरदगा : उत्तराखंड के चमोली में हुए हादसे के बाद से लोहरदगा जिला के 9 मजदूर लापता हैं. इन्हें सकुशल वापस लाने के लिए शुक्रवार को 5 सदस्यीय टीम चमोली के लिए रवाना हुई. बता दें कि लोहरदगा जिला के किस्को ब्लाॅक अंतर्गत बेठहठ से 9 मजदूर काम करने चमोली गयी थे.

शुक्रवार को लोहरदगा के 9 मजदूरों को वापस लाने 5 सदस्यीय टीम चमोली के लिए रवाना हुई. इस टीम में श्रम अधीक्षक धीरेंद्र नाथ महतो, दिगंबर महतो (रांची), सीताराम उरांव (हेसापीढ़ी, बेटहठ), सेवक बाखला (चोटांगी,बेटहठ) और करमदास भगत ( हेसापीढ़ी, बेटहठ) शामिल हैं. टीम में छठे सदस्य के रूप में विकास बाखला (गम्हरिया, घाघरा) नयी दिल्ली से शामिल होंगे.

मालूम हो कि रोजगार की तलाश में उत्तराखंड गये किस्को ब्लॉक अंतर्गत बेठहठ के 9 मजूदरों का कोई पता नहीं चल रहा है. अब तक कोई पता नहीं चलने से बेठहठ से पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 9 मजदूरों के परिवार वालों का रो- रोकर बुरा हाल है. परिजन आज भी प्रशासन और सरकार से जल्द खोजबीन करने की गुहार लगा रहे हैं.

किस्को ब्लाॅक के बेठहट से चमोली के पावर प्रोजेक्ट में करने गये मजदूरों में ज्योतिष बाखला, सुनील बाखला, मजनू बाखला, उर्बनुष बाखला, नेमहस बाखला, रवींद्र उरांव, दीपक कुजूर, विक्की भगत एवं प्रेम उरांव का अब तक कोई पता नहीं चला है. इन 9 मजदूरों की खोजबीन के लिए शुक्रवार को 5 सदस्यीय टीम चमोली के लिए रवाना हुई.

इधर, इन मजदूरों के परिजन आज भी काफी सदमे में हैं. अपनों से जल्द मिलने की आस लगाये बैठे हैं. उत्तराखंड गये विक्की भगत के पिता करमदास भगत का कहना है कि घर में विक्की का भाई है, जो झारखंड पुलिस में कार्यरत है. विक्की का विवाह नहीं हुआ है. आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से काम करने उत्तराखंड गये थे. विक्की भगत के घर में माता- पिता के अलावा भाई और बहन भी हैं, जो विक्की को याद कर काफी भावुक हो जाते हैं.

वहीं, मजनू बाखला के परिवार वालों का कहना है कि मजनू की पत्नी का देहांत एक साल पहले हो गया था. घर में माता- पिता के अलावा एक भाई और एक बहन है. परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए परिवार के सदस्यों को छोड़कर बाहर कमाने गये हैं. घर में कमाने वाले एकमात्र सदस्य थे जिसके लापता होने के बाद बुजुर्ग माता- पिता की हालत काफी खराब हो गयी है. आज भी माता- पिता अपने बेटे की आस में पलके संजोए बैठे हैं.

नेमहस बाखला एवं सुनील बाखला के परिजनों का कहना है कि दोनों भाई उत्तराखंड गये हैं. घर में माता- पिता हैं. घर की माली हालात सुधारने को लेकर माता- पिता को छोड़कर बाहर गये. घर वाले अपने बेटे के आने की इंतजार कर रहे हैं. वहीं, दीपक कुजूर पिता रामकिसुन उरांव के परिवार का कहना है कि दीपक कुजूर उत्तराखंड गये हैं, जबकि बड़े भाई सुदर्शन कुजूर तमिलनाडु में काम कर रहे हैं. एक बहन घर में है जिसकी शादी की खातिर दीपक बाहर गया है.

Posted By : Samir Ranjan.

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