मौसम की बेरुखी से किसान फसल ढोने के बजाय, ढो रहे हैं पुआल

Updated at : 20 Nov 2018 6:28 AM (IST)
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मौसम की बेरुखी से किसान फसल ढोने के बजाय, ढो रहे हैं पुआल

रामप्रसाद पाल, कैरो, लोहरदगा : प्रखंड के दर्जनाधिक गांवों के किसान मौसम के बेरूखी की मार झेल रहे हैं. वे अपने अपने खेतों से मेहनत से उपजाये फसल लाने के बजाय सूखा पुआल ढो रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र के गाराडीह, गजनी, चाल्हो, महुवरी, गोपालगंज, टाटी, सढाबे, खरता, हनहट, हुदू, गितिलगढ़, तोडांग, कैरो, उतका, नवाटोली आदि […]

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रामप्रसाद पाल, कैरो, लोहरदगा : प्रखंड के दर्जनाधिक गांवों के किसान मौसम के बेरूखी की मार झेल रहे हैं. वे अपने अपने खेतों से मेहनत से उपजाये फसल लाने के बजाय सूखा पुआल ढो रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र के गाराडीह, गजनी, चाल्हो, महुवरी, गोपालगंज, टाटी, सढाबे, खरता, हनहट, हुदू, गितिलगढ़, तोडांग, कैरो, उतका, नवाटोली आदि गांव के किसान अपने अपने खेतों में धान, मटर, टमाटर, आलू इत्यादि का फसल इस उम्मीद से लगाये थे कि इस बार फसल अच्छी होगी.
लेकिन इस साल मौसम की बेरुखी किसानों पर कहर बनकर गिरी है. क्षेत्र के किसान अपेक्षाकृत खेती नहीं होने के कारण मायूस हैं. लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खेतो में दरारें पड़ गयी है. धान का बाली निकलने के समय लगभग दो माह से बारिश नहीं होने से खेती बर्बादी के कगार पर पहुंच गयी है. अक्तूबर माह के एक दो दिन तक चली तितली चक्रवात के आने से हल्की बारिश से खेतो में लगी फसल को थोड़ा फायदा हुआ, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण ज्यादातर फसल सूख गये.
कुआं, तालाब, डोभा, नहर आदि जल साधन के आस पास खेतों में लगी फसल भी मुरझाते जा रहे है. खेतों में लगी फसल को बचाने के लिए किसान अभी भी जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. फसल को बर्बाद होने से बचाने के किसान ज्यादा मूल्य देकर पटवन के लिए केरासन बाजार से खरीद रहे हैं. उपर से बाधित विद्युत आपूर्ति किसान के लिए सर दर्द है.
वर्तमान परिस्थिति में सरकार की ओर से कोई भी सुविधा मुहैया नहीं करायी गयी है. जिसके कारण किसानों का अथक प्रयास कारगर साबित नहीं हो पा रहा है. खेतों में लगी धान की फसल लगभग 70 से 75 प्रतिशत बर्बाद हो चुकी है. हनहट ग्राम के किसान अमान अंसारी, इरसाद अंसारी, बुधवा उरांव, समीम अख्तर आदि का कहना है कि शुरुआती दौर में भी समय समय पर पर्याप्त मात्रा में बारिश नही होने से किसान पटवन की कमी की मार झेल चुके हैं.
जिसके कारण किसान समय पर ना तो बिचड़ा तैयार कर सके और न ही समय पर धनरोपनी का कार्य ही कर सके. इससे अलग नंदिनी जलाशय से निकलने वाली नहरों से अम्बवा, नरौली, उतका, कैरो, नवाटोली, एडादोन आदि गांव के कुछ किसानों के खेतों में ही नहर की पानी पहुंच सका. जिसका लाभ इस क्षेत्र के किसानों को मिला है.
मौसम की मार झेल रहे किसान अब सिर्फ खेतों से पुआल लाने को मजबूर हैं. किसानों का कहना है कि यदि सरकार द्वारा किसानों के लिये कोई लाभकारी कार्य नही किये गये, तो किसानों के सामने पलायन के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा.
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