20 लाख 40 हजार रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोप

Updated at : 26 Apr 2018 4:17 AM (IST)
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20 लाख 40 हजार रुपये की सरकारी राशि के गबन  का आरोप

लोहरदगा\कुड़ू : अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चौधरी एहसान मोइज की अदालत ने सरकारी राशि के गबन के आरोपी कर्मजित उरांव, मगना भगत, दुखना उरांव तथा अजित तिर्की को तीन-तीन वर्ष की सजा और 10-10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनायी. इन अभियुक्तों पर जेट्रोफा खेती के नाम पर 20 लाख 40 हजार रुपये की […]

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लोहरदगा\कुड़ू : अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चौधरी एहसान मोइज की अदालत ने सरकारी राशि के गबन के आरोपी कर्मजित उरांव, मगना भगत, दुखना उरांव तथा अजित तिर्की को तीन-तीन वर्ष की सजा और 10-10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनायी. इन अभियुक्तों पर जेट्रोफा खेती के नाम पर 20 लाख 40 हजार रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोप है़ इन अभियुक्तों के खिलाफ कुडू थाना में काण्ड संख्या 83/2010 धारा 403,408,409,466 और 477 भादवी के तहत मामला दर्ज है. इस कांड में कुड़ू के तत्कालिन बीडीओ और पंचायत सेवक पर अनुसंधान लंबित है.

चारों अभियुक्त जेट्रोफा उत्पादन समिति जिंगी और जोंजरो के अध्यक्ष और सचिव हैं. मामले में सरकार की ओर से एपीपी सिद्धार्थ सिंह ने अभियोजन का पक्ष रखा. यहां बता दें कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के तहत प्रखंड के जिंगी पंचायत के दो स्थानों जोंजरो और जिंगी में जेट्रोफा खेती तथा बायोडीजल बनाने के लिए फलों को भेजने के मामले में हुई गड़बड़ी में पहली सजा का ऐलान हो गया है. तत्कालिन रोजगार सेवक समेत लाभुक समिति के तीन सदस्यों को तीन साल की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है. शेष नामजद सात आरोपियों तथा एक अन्य पर फैसला आना बाकी है. मामले पर सभी की निगाहें लगी हुई है .
क्या है मामला, किन-किन पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के तहत साल 2004-2005 में प्रखंड के जिंगी पंचायत के दो गांवों जोंजरो तथा जिंगी में बायोडीजल बनाने की योजना के तहत जेट्रोफा की खेती करने के लिए कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. जेट्रोफा की खेती के लिए दोनों योजनाओं के लिए लगभग 44 लाख रुपये आंवटित किया गया था. खेती के लिए जेट्रोफा का पौधा तथा खाद सेवामित्र संस्था ने आपूर्ती की थी. जेट्रोफा की खेती कराने व निगरानी के लिए लाभुक समिति का गठन किया गया था. योजना के तहत तय किया गया था कि तीन साल तक जेट्रोफा की खेती की देखरेख करनी है.
जेट्रोफा का फल तैयार होने के बाद बायोडीजल बनाने के लिए भेजना था. जेट्रोफा खेती के नाम पर आंवटित राशि की निकासी करने के तीन साल बाद फल तैयार होना तो दूर जेट्रोफा खेती का नामोनिशान तक नहीं बचा था. मामला सामने आने के बाद तत्कालिन उपायुक्त के आदेश पर डीडीसी ने जांच किया. जांच के बाद जेट्रोफा खेती के नाम पर सरकारी राशि के दुरूपयोग का मामला सामने आया था. डीडीसी के आदेश पर तत्कालीन बीडीओ जय कुमार राम ने 11 लोगों पर 19़ 11़़ 2010 को थाना कांड संख्या 83-10 में मामला दर्ज कराया था़ इसमें तत्कालिन बीडीओ बंका राम, तत्कालिन पंचायत सचिव खैरूल खान, रोजगार सेवक मंगा उरांव, सेवामित्र संस्था के अशोक राज,
दिलीप कुमार, लाभुक समिति जिंगी तथा जोंजरो के सदस्यों में चमरा उरांव, कर्मजीत उरांव, अजित तिर्की, दुखना उरांव, दुबराज उरांव, पौलुस तिर्की तथा एक अज्ञात पर सरकारी राशि के गबन का मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने जांच के बाद चार्ज सीट दाखिल किया.
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