पुलिया निर्माण में अवैध पत्थर का उपयोग

Updated at : 30 Jun 2017 9:31 AM (IST)
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पुलिया निर्माण में अवैध पत्थर का उपयोग

निरीक्षण नहीं होने से सड़क निर्माण में नहीं हो रहा गुणवत्ता का पालन लोहरदगा : आरइओ द्वारा पेशरार प्रखंड क्षेत्र के दुगू से लावापानी होते हुए बोंडोबार तक पांच करोड़ रुपये की लागत से पथ निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. इस निर्माण कार्य के संवेदक जितेंद्र प्रसाद साहू हैं. पथ में कई स्थानों […]

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निरीक्षण नहीं होने से सड़क निर्माण में नहीं हो रहा गुणवत्ता का पालन
लोहरदगा : आरइओ द्वारा पेशरार प्रखंड क्षेत्र के दुगू से लावापानी होते हुए बोंडोबार तक पांच करोड़ रुपये की लागत से पथ निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. इस निर्माण कार्य के संवेदक जितेंद्र प्रसाद साहू हैं.
पथ में कई स्थानों पर कल्वर्ट पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है. बाला अंबा तथा मदनपुर के बीच गार्ड वॉल तथा बाक्स पुलिया एवं लावापानी से पहले बाक्स पुलिया का निर्माण संवेदक द्वारा कराया जा रहा है. पुलिया का निर्माण में अवैध पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है. सही पत्थर नहीं होने की वजह से पुलिया निर्माण में गड़बड़ी हो रही है. बाक्स पुलिया निर्माण में गुणवत्ता का पालन नहीं किया जा रहा है. सूत्र बताते हैं कि सड़क निर्माण कार्य संवेदक द्वारा बेतरतीब तरीके से पूरा कर लिया गया था. निर्माण कार्य घटिया होने की शिकायत जब जिला परिषद की बैठक में उठायी गयी तो आरइओ के अभियंताओं द्वारा सड़क को तोड़ कर पुर्ननिर्माण कराया जा रहा है.
पेशरार क्षेत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी एवं संवेदक की मिली भगत के कारण काम जैसे तैसे पूरा किया जा रहा है. उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र होने का बहाना बनाकर विभागीय अधिकारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण नहीं करते है. सरकारी राशि की बंदरबांट का यह अद्भुत नमूना है. आरइओ विभाग के अधिकारी मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि एक तो इतने दिनों बाद निर्माण कार्य हो रहा है उस पर भी घोटाला किया जा रहा है. लोगों ने अविलंब घटिया निर्माण कार्य करने वाले संवेदक को काली सूची में डालने एवं दोषी आरइओ के पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है. इस संबंध में विधायक सुखदेव भगत का कहना है कि विकास कार्यों में अनियमितता हो रही है तो विभागीय अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए. अधिकारी क्षेत्र में जायेंगे तब उन्हें जानकारी होगी लेकिन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में नजर ही नहीं आते हैं.
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