तीन करोड़ रुपये के अवार्ड का भुगतान लंबित

Updated at : 04 Feb 2017 7:29 AM (IST)
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तीन करोड़ रुपये के अवार्ड का भुगतान लंबित

बीमा कंपनियों पर अदालती आदेशों का असर नहीं एमएसीटी ट्रिब्यूनलों से फैसला होने के महीनों तक भुगतान की आशा में पीड़ित परिवार कई मुकदमों में महीनों बीत जाने के बाद भी हाजिर नहीं हो रही बीमा कंपनियां कई कंपनी ने नहीं रखा है जिले में वकील सुनील कुमार लातेहार : लातेहार जिला में वाहन दुर्घटना […]

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बीमा कंपनियों पर अदालती आदेशों का असर नहीं
एमएसीटी ट्रिब्यूनलों से फैसला होने के महीनों तक भुगतान की आशा में पीड़ित परिवार
कई मुकदमों में महीनों बीत जाने के बाद भी हाजिर नहीं हो रही बीमा कंपनियां
कई कंपनी ने नहीं रखा है जिले में वकील
सुनील कुमार
लातेहार : लातेहार जिला में वाहन दुर्घटना के शिकार हुए व्यक्तियों के परिजनों द्वारा दायर दावा वादों में ट्रिव्यूनलों द्वारा अवार्ड घोषित किये जाने के महीनों बीत जाने के बाद भी बीमा कंपनियों द्वारा पीड़ित पक्षकारों को भुगतान नहीं दिया जा रहा है. व्यवहार न्यायालय, लातेहार में प्रधान जिला जज समेत कुल चार ट्रिव्यूनल कार्यरत हैं, इन ट्रिब्यूनलों से लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश विभिन्न वादों में विभिन्न बीमा कपंनियों को दिया जा चुका है, लेकिन पीड़ित पक्षकारों को बीमा कपंनियों ने फूटी कौड़ी का भी भुगतान नहीं किया है.
इन मामलों में हुआ है भुगतान का आदेश : एमवी दावा वाद संख्या 44/ 2014 में प्रधान जिला जज सह एमएसीटी राजेश कुमार वैश्य की अदालत से 22 जून 2016 को दावाकर्ता पूनम देवी एवं अन्य को 62 लाख 91 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दी ओरियंटेल बीमा कंपनी को दिया गया है.
एमवी दावा वाद संख्या 40/2014 में तृतीय जिला जज सह एमएसीटी अनिल कुमार पांडेय की अदालत ने 10 जुलाई 2016 को 70 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश यूनाईटेड बीमा कंपनी को दिया है. एमवी वाद संख्या 3/2013 में प्रधान जिला सह एमएसीटी श्री वैश्य की अदालत ने 20 लाख रुपये का भुगतान गीता देवी को करने का आदेश नेशनल बीमा कंपनी को दिया है. एमवी दावा वाद संख्या 26/2015 में श्री वैश्य की अदालत ने 16 लाख रुपये का भुगतान पुष्पालता देवी को करने का आदेश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दिया है. एमवी दावा वाद संख्या 22/2014 में एमएसीटी तीन श्री पांडेय की अदालत ने आवेदिका कविता देवी को 25 लाख रुपये के भुगतान का आदेश वाहन मालिक रजब मिंया को दिया है.
एमवी दावा वाद संख्या 7/2015 में प्रथम जिला जज सह एमएसीटी उमेशानंद मिश्रा की अदालत ने आवेदक जुलियस कोंगड़ी को चार लाख 52 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को दिया है. श्री मिश्रा की अदालत ने एमवी दावा वाद संख्या 6/2015 में 50 हजार रुपये के भुगतान का आदेश नेशनल कंपनी को दिया है. एमवी दावा वाद संख्या 08/2015 में एमसीटी तीन श्री पांडेय की अदालत ने मुनिया देवी को 50 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश रिलायंस जेनरल बीमा कंपनी को दिया है.
एमवी दावा वाद संख्या 37/2014 में एमएसीटी प्रथम उमेशानंद मिश्रा की अदालत ने दावाकर्ता परोइया देवी को 360000 रुपये भुगतान करने का आदेश बजाज एलियांज बीमा कंपनी को दिया है. एमवी दावा वाद संख्या 29/ 2010 में एमएसीटी द्वितीय ने गत 29 जनवरी 2016 को आवेदक बाबुलाल सिंह के पक्ष में दो लाख 60 हजार रुपये भुगतान करने का आदेश दी ओरियंटेल बीमा कंपनी को दिया है. एमवी दावा वाद संख्या 29/2015 में तृतीय एमएसीटी श्री पांडेय की अदालत ने आवेदक प्रियतम मिस्त्री के पक्ष में 50 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश एचडीएफसी एरगो कंपनी को दिया है.
महीनों से हाजिर नहीं हो रही है बीमा कंपनियां : एमवी दावा वाद संख्या 13/2015, 14/16, 18/16, 19/16 समेत दो दर्जन वादों में विभिन्न बीमा कंपनियों के हाजिर नहीं होने से वाद की कार्रवाई यथावत है. जबकि इन कंपनियों के प्रबंधन ने अदालत का सम्मन लगभग एक साल पहले रिसिव किया है.
अदालती आदेशों का अनुपालन बीमा कंपनियों द्वारा नहीं किये जाने से दुर्घटना में जान अथवा हाथ-पैर गंवा बैठे व्यक्तियों के परिजनों को आर्थिक परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ रहा है. मालूम हो कई बीमा कंपनियों ने दूसरे जिलों के अधिवक्ताओं को अपना रिटेनर नियुक्त किया है. इसकी वजह से मामलों का निष्पादन अपेक्षा से कम हो रहा है.
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