जहरीला फल खाने से 10 स्कूली बच्चे बीमार

Updated at : 16 Dec 2016 8:05 AM (IST)
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जहरीला फल खाने से 10 स्कूली बच्चे बीमार

बीमार बच्चों सदर अस्पताल में कराया गया भरती, फिलहाल बच्चों की स्थिति नियंत्रण में झुमरीतिलैया : प्रखंड के गझंडी रोड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय खरेड़वा में जहरीला फल खाने से दर्जनों बच्चे बीमार हो गये. बीमार बच्चों आनन-फानन में सदर अस्पताल कोडरमा में भरती कराया गया. फिलहाल बच्चों की स्थिति नियंत्रण में है. घटना के […]

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बीमार बच्चों सदर अस्पताल में कराया गया भरती, फिलहाल बच्चों की स्थिति नियंत्रण में
झुमरीतिलैया : प्रखंड के गझंडी रोड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय खरेड़वा में जहरीला फल खाने से दर्जनों बच्चे बीमार हो गये. बीमार बच्चों आनन-फानन में सदर अस्पताल कोडरमा में भरती कराया गया.
फिलहाल बच्चों की स्थिति नियंत्रण में है. घटना के बाद स्कूल के शिक्षक स्कूल बंद कर भाग निकले. जानकारी के मुताबिक गुरूवार को स्कूल खुलने के बाद बच्चे स्कूल के बगल में लगे बगरंडा के फल खा लिये. इसके बाद बच्चों को उल्टी होने लगी. बच्चे किसी तरह अपने-अपने घर पहुंचे और उन्होंने अपने अभिभावकों को फल खाने की बात बतायी. फल खाने की वजह से बच्चे लगातार उल्टी कर रहे थे. ग्रामीणों ने मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधीक्षक परबला खेस को दी. इसके बाद उन्होंने उत्क्रमित उच्च विद्यालय गझंडी के शिक्षक उदय सिंह, रवींद्र कुमार व जागेश्वर यादव को खरेड़वा भेजा.
जब वे लोग वहां पहुंचे, तो विद्यालय बंद था. ग्रामीणों के सहयोग से शिक्षकों ने बच्चों को एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचाया. घटना की सूचना मिलते ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोडरमा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रंजीत कुमार सदर अस्पताल पहुंच बच्चों की इलाज में जुट गये. इस दौरान बच्चे लगातार उल्टियां कर रहे थे. बाद में घटना की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गयी.
ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लगाया लापरवाही का आरोप: बच्चों द्वारा जहरीला फल खाने के मामले में खरेड़वा के ग्रामीणों ने विद्यालय में कार्यरत शिक्षक सोहर यादव, बासुदेव यादव, ललित चौरसिया व संतोष कुमार सिन्हा पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक बच्चों के प्रति ध्यान नहीं देते हैं. बच्चों को स्कूल भेजने के बाद बच्चों की जवाबदेही शिक्षकों पर होती है. उनकी लापरवाही से ही बच्चों ने जहरीला फल खा लिया. इसकी जवाबदेही भी शिक्षकों पर ही बनती है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने से अधिक बात करने में समय व्यतीत करते हैं.
घटना के बाद बिना अभिभावकों को सूचित किये तथा बच्चों का उपचार कराये बिना 11:15 बजे ही विद्यालय में ताला लगाकर भाग जाना, बच्चों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है. ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में प्रतिदिन 30 से 35 बच्चे जाते हैं और विद्यालय में चार शिक्षक हैं. विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मनोज यादव ने बताया कि विद्यालय के शिक्षक उनकी बातों को तरजीह नहीं देते हैं तथा विद्यालय में अपनी मनमानी चलाते हैं. विद्यालय के शिक्षक बासुदेव यादव ने बताया कि ग्रामीण उन पर झूठा दोषारोपण कर रहे हैं. वे विद्यालय में ताला लगा कर एंबुलेंस लाने गये थे.
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