तत्कालीन इइ, एइ, जेइ पर हुआ आठ करोड़ का सर्टिफिकेट केस

Updated at : 29 Jun 2017 10:20 AM (IST)
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तत्कालीन इइ, एइ, जेइ पर हुआ आठ करोड़ का सर्टिफिकेट केस

ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन जेइ विवेका चौधरी पर लटकी तलवार कोडरमा : वर्षों पूर्व करोड़ों रुपये की राशि लेकर विकास योजनाओं को पूरा नहीं करने व गुणवत्ता का पालन नहीं करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गयी है. ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सोनेलाल दास, अरुण कुमार भेंगरा, सहायक अभियंता ललन […]

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ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन जेइ विवेका चौधरी पर लटकी तलवार
कोडरमा : वर्षों पूर्व करोड़ों रुपये की राशि लेकर विकास योजनाओं को पूरा नहीं करने व गुणवत्ता का पालन नहीं करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गयी है. ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सोनेलाल दास, अरुण कुमार भेंगरा, सहायक अभियंता ललन राम, दीनानाथ प्रसाद, कनीय अभियंता रामेश्वर प्रसाद, विवेकानंद चौधरी के विरुद्ध जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी मनीषा वत्स के पास सर्टिफिकेट केस दर्ज कराया गया है. सर्टिफिकेट केस ग्रामीण विकास विभाग के वर्तमान इइ रामजी राम प्रजापति ने दर्ज कराया है.
इस मामले के बाद इन सभी अभियंताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. खासकर पहले से विवादों में रहे जेइ विवेकानंद चौधरी पर कार्रवाई की तलवार लटकी है. जिन चार मामलों को लेकर सर्टिफिकेट केस दर्ज कराया गया है, उनमें विवेकानंद चौधरी आरोपी है. जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की चार बड़ी योजनाओं का काम अबतक अपूर्ण है. साथ ही योजना के काम में भारी पैमाने पर गड़बड़ी बरती गयी थी.
इस मामले में जांच टीम द्वारा इसे गुणवत्ता के स्तर में घटिया बताये जाने व हैंडओवर के लिए उपयुक्त नहीं बताये जाने के बाद मामला लटका हुआ था. इस मामले में मिली जांच रिपोर्ट के बाद डीसी संजीव कुमार बेसरा ने संबंधित कार्य एजेंसी ग्रामीण विकास विभाग को रिकवरी के लिए सर्टिफिकेस केस दर्ज करने का आदेश दिया था. इस आदेश पर अब जाकर केस दर्ज कराया गया है. इस संबंध में विभाग के इइ ने पत्रांक-594 दिनांक 28-6-2017 के जरिये नीलाम पत्र पदाधिकारी के पास आवेदन दिया है. बताया जाता है की सर्टिफिकेट केस की कुल राशि आठ करोड़, 11 लाख, 15 हजार रुपये हैं.
चार योजनाओं के कार्य को लेकर किया गया केस
जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरकच्चो का निर्माण तीन करोड़, 35 लाख रुपये से किया जाना था, पर निर्माण आज तक पूरा भी नहीं हुआ और इसका एनडीटी टेस्ट (गैर विध्वंसक जांच) डाउट फूल रहने के कारण कोई कार्य आगे नहीं बढ़ा.
इस निर्माण कार्य के लिए समय-समय पर राशि जारी करने व पर्यवेक्षण नहीं करने के आरोप में ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन इइ सोनेलाल दास, अरुण कुमार भेंगरा, एइ ललन राम, दीनानाथ प्रसाद, जेइ रामेश्वर प्रसाद के साथ कनीय अभियंता विवेकानंद चौधरी पर आरोप लगा है.
वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलडीहा का कार्य एक करोड़, नौ लाख आठ हजार रुपये से होना था. इसका भी कार्य अपूर्ण व एनडीटी टेस्ट डाउट फूल रहने पर सोनेलाल दास, अरुण कुमार भेंगरा, ललन राम, रामेश्वर प्रसाद, विवेकानंद चौधरी पर मामला दायर किया गया है.
इसके अलावा दो करोड़, 74 लाख रुपये की लागत से बननेवाले मातृ शिशु कल्याण केंद्र लोकाई का कार्य अपूर्ण व एनडीटी टेस्ट डाउट फुल रहने और ईटाय में 92 लाख, 65 हजार की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण अपूर्ण व एनडीटी टेस्ट डाउन फूल रहने पर चार लोगों पर सर्टिफिकेट केस किया गया है. जानकारी यह भी सामने आयी है कि तत्कालीन इइ व एइ को इसलिए आरोपी बनाया गया है, क्योंकि उन्होंने समय-समय पर राशि को विमुक्त किया और पर्यवेक्षण नहीं कर कार्य चलता रहा. परिणाम हुआ कि करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं अधूरी रह गयी.
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