झारखंड के अफसरों को दिवाली का बंपर गिफ्ट: हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की सरकार की अधिसूचना की रद्द

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झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रंजन

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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा 2023 रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है. 2000 से अधिक नियुक्त अधिकारियों को मिली बड़ी राहत.

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JSSC CGL Exam Cancellation Case: झारखंड में JSSC परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी करने वाले हजारों अभ्यर्थियों को 6 नवंबर 2026 को दिवाली का बड़ा तोहफा मिला है. झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JGGLCCE-2023) के तहत हुई JSSC नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना को विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई भर्ती के मामले में क्वैश कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्त अभ्यर्थियों को सेवा में निरंतरता के साथ कार्यरत माना जाएगा. उन्हें वेतन समेत किसी भी प्रकार के सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकेगा.

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यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा के बाद जनवरी 2026 में नियुक्ति पत्र मिला था और वे विभिन्न पदों पर काम कर रहे थे. अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि इन नियुक्तियों पर आपराधिक मुकदमों के अंतिम परिणाम का प्रभाव बना रहेगा. यानी जांच में किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता प्रमाणित होने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी.

पेपर लीक के आरोप पर पहले भी हुई थी सुनवाई

JSSC के विज्ञापन JGGLCCE-2023 के तहत सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, योजना सहायक और अंचल निरीक्षक सह कानूनगो के पदों पर नियुक्ति होनी थी. इसके लिए विज्ञापन संख्या 10/2023 जारी किया गया था. परीक्षा 28 जनवरी और चार फरवरी 2024 को होनी थी, लेकिन पेपर लीक की शिकायत के बाद इसे रद्द कर 21 और 22 सितंबर 2024 को दोबारा आयोजित किया गया.

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पुनर्परीक्षा में भी गड़बड़ी के लगे आरोप

इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका और 1011 असफल अभ्यर्थियों की ओर से याचिका दायर की गयी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तीन दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए परीक्षा का परिणाम जारी करने और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का निर्देश दिया था. साथ ही एसआइटी को छह महीने में जांच पूरी करने को कहा था. 28 संदिग्ध अभ्यर्थियों में से दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाये गये 10 अभ्यर्थियों का परिणाम जांच पूरी होने तक रोकने का निर्देश भी दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. हालांकि नियुक्तियों को सभी आपराधिक मुकदमों के अंतिम परिणाम के अधीन रखा था.

जांच पूरी होने से पहले सामूहिक रूप से भर्ती रद्द करना अनुचित

जुलाई 2026 में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को 22 परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी. इसमें JGGLCCE-2023 की भर्ती भी शामिल थी. इसके खिलाफ नियुक्त अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस परीक्षा से जुड़े विवाद पर फैसला दे चुके हैं. ऐसे में बिना जांच पूरी हुए और किसी ठोस साक्ष्य के सामूहिक रूप से नियुक्तियां रद्द करना न्यायिक आदेशों के विपरीत है. वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि सीआइडी जांच में संगठित गड़बड़ी, ओएमआर शीट में छेड़छाड़, डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर और अधिकारियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं. ऐसे में ईमानदार और गड़बड़ी से लाभ लेनेवाले अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं है.

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ठोस साक्ष्य के बिना नहीं रद्द की जा सकती पूरी भर्ती

हाईकोर्ट ने अपने विश्लेषण में कहा कि सरकार ने भर्ती रद्द करने के लिए जिस जांच और सामग्री का हवाला दिया, उससे पूरी परीक्षा में व्यवस्थित और व्यापक गड़बड़ी साबित नहीं होती. जांच अभी अधूरी है और अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की गयी है. सरकार यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि गड़बड़ी में शामिल अभ्यर्थियों को अलग करना क्यों संभव नहीं है. अदालत ने कहा कि आपराधिक जांच लंबित रहने मात्र से पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता. सामूहिक रूप से नियुक्तियां समाप्त करने के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री जरूरी है. नियुक्त कर्मचारी केवल चयनित अभ्यर्थी नहीं, बल्कि सरकारी सेवा में कार्यरत हैं. इसलिए उनकी सेवा समाप्त करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन भी आवश्यक है.

एसआईटी जांच जारी रहेगी, दोषियों पर होगी कार्रवाई

अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती रद्द करने की अधिसूचना निरस्त होने का मतलब यह नहीं है कि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप समाप्त हो गये हैं. एसआइटी को जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने और उसे शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया है. नियुक्त अभ्यर्थियों को भी जांच में सहयोग करना होगा. यदि जांच में किसी अन्य सफल अभ्यर्थी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. इस तरह हाईकोर्ट ने एक ओर करीब 1932 नियुक्त कर्मचारियों की सेवा और सेवा लाभ सुरक्षित रखे हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच जारी रखने का रास्ता भी खुला रखा है.

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