चतुर्थवर्गीय कर्मचारी घोषित करे सरकार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 May 2016 6:46 AM (IST)
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मांग. िजला जल सहिया संघर्ष मोरचा के राज्य महासचिव ने िकया बैठक, कहा : जामताड़ा : गांधी मैदान में जिला जल सहिया संघ की बैठक सोमवार को बबीता देवी की अध्यक्षता में की गयी. जिसमें झारखंड राज्य जलसहिया संघर्ष मोरचा के प्रदेश अध्यक्ष मीणा देवी तथा मोरचा के राज्य महासचिव प्रवीण शरण मुख्य रूप से […]
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मांग. िजला जल सहिया संघर्ष मोरचा के राज्य महासचिव ने िकया बैठक, कहा :
जामताड़ा : गांधी मैदान में जिला जल सहिया संघ की बैठक सोमवार को बबीता देवी की अध्यक्षता में की गयी. जिसमें झारखंड राज्य जलसहिया संघर्ष मोरचा के प्रदेश अध्यक्ष मीणा देवी तथा मोरचा के राज्य महासचिव प्रवीण शरण मुख्य रूप से मौजूद थे. संबोधन में श्री शरण ने कहा कि जल सहिया एवं रसोइया के साथ सरकार अन्याय कर रही है. जल सहिया पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के गांव स्तर की एक कर्मचारी है,
जो बिना भुगतान के कई वर्षों से काम कर रही है. लेकिन सरकार एवं विभाग जल सहिया का शोषण कर रही है. उन्होंने सरकार से मांग की कि जल सहिया और रसोइया को चतुर्थवर्गीय कर्मचारी बनाया जाय. जल सहिया को यात्रा भत्ता भी नहीं दिया जाता है. वहीं रसोइयों के बारे में कहा कि रसोइया पर विद्यालय के शिक्षक के द्वारा तरह-तरह के लांछन लगाते हैं.
रसोइया खाना पकाती है, लेकिन इन्हें खाना को चखने का अधिकार नहीं है. श्री शरण ने आरोप लगाते हुए कहा कि खाना को शिक्षक चखते हैं और कुछ होने पर रसोइया पर इल्जाम लगता है कि खाना खाने से बच्चा बीमार हो गया है. कहा कि जब शिक्षक खाना को चखते हैं तो शिक्षक बीमार नहीं पड़ते हैं. कहा कि हमेशा रसोइयों पर दबाव बनाकर कार्य कराया जाता है. इस अवसर पर बबीता देवी, सुनीता देवी, सरिता देवी, रीता देवी, प्रमिला मरांडी, रानी देवी, मंजू किस्कू, पूनम टुडू, लीला राय, विष्णु देवी, शहनाज खातून, आशमा प्रवीण सहित अनेकों मौजूद थे.
पीएचडी में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो
क्या है मांग
जल सहिया को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का चतुर्थवर्गीय कर्मचारी घोषित किया जाय एवं 18 हजार रुपये वेतन दिया जाय. जल सहिया का दुर्घटना बीमा कराया जाय, मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये एवं घायल होने पर एक लाख रुपये दिया जाय, पीएचडी में व्याप्त भ्रष्टाचार दूर किया जाय, शौचालय निर्माण के गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए ठेकेदारी प्रथा को दूर करने सहित अन्य मांग शामिल है.
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