बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड पर बड़ा फैसला, 122 करोड़ से डबल होगी लाइन..मालगाड़ियों की बढ़ेगी रफ्तार
रेल लाइन (सांकेतिक तस्वीर)
बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड का दोहरीकरण 122 करोड़ में मंजूर. खनिज ढुलाई में तेजी आएगी और हर साल 8.9 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढोया जा सकेगा. मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी.
जमशेदपुर: भारतीय रेल ने दक्षिण-पूर्व रेलवे के अंतर्गत आने वाले बड़बिल-बोलानीखदान के बीच 6 किलोमीटर लंबे रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना पर 122 करोड़ रुपये खर्च होंगे. रेल लाइन के डबल होने से क्षेत्र में खनिज कॉरिडोर को मजबूती मिलेगी और लौह अयस्क समेत अन्य खनिजों की ढुलाई करने वाली मालगाड़ियों के परिचालन में तेजी आयेगी.
हर साल 8.9 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी
रेल मंत्रालय के अनुसार, बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड के दोहरीकरण के बाद इस मार्ग पर हर साल 8.9 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) अतिरिक्त माल यातायात का परिचालन संभव हो सकेगा. वर्तमान में यह रेलखंड सिंगल लाइन है. दोहरीकरण के बाद मालगाड़ियों को क्रॉसिंग और पासिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इससे ट्रेनों के परिचालन चक्र में लगने वाला समय कम होगा और मालगाड़ियों की लेट-लतीफी पर भी अंकुश लगेगा.
रोजाना करीब 6 लोडेड रेक से होती है लौह अयस्क की ढुलाई
बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड भारतीय रेल के ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर का अहम हिस्सा है. फिलहाल इस मार्ग से रोजाना करीब 6 लोडेड रेक के जरिये सालाना लगभग 9 मिलियन टन लौह अयस्क की ढुलाई होती है. सेल की बोलानी खदानों के अलावा रुंगटा और खटाऊ नरभेराम जैसी निजी साइडिंग्स से उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क और पेलेट्स देश के प्रमुख इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों तक भेजे जाते हैं.
सेल की खदानों के प्रस्तावित विस्तार, इस्पात संयंत्रों की बढ़ती उत्पादन क्षमता और बंदरगाहों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस 6 किलोमीटर लंबे रेलखंड का दोहरीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा था. परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और खनिजों के परिवहन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी.
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