जमशेदपुर : एक फीसदी लोगों के पास है देश की 60 फीसदी संपत्ति : वरुण गांधी

Updated at : 12 Aug 2018 8:38 AM (IST)
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जमशेदपुर : एक फीसदी लोगों के पास है देश की 60 फीसदी संपत्ति : वरुण गांधी

जमशेदपुर : सुल्तानपुर के भाजपा सांसद सह फायर ब्रांड नेता वरुण गांधी ने कहा कि देश में असमानता की खाई लगातार चौड़ी हो रही है. हालत यह है कि अंग्रेजी हुकूमत के वक्त देश के एक फीसदी लोगों के पास देश की 22 फीसदी संपत्ति थी. लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि देश की 60 […]

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जमशेदपुर : सुल्तानपुर के भाजपा सांसद सह फायर ब्रांड नेता वरुण गांधी ने कहा कि देश में असमानता की खाई लगातार चौड़ी हो रही है. हालत यह है कि अंग्रेजी हुकूमत के वक्त देश के एक फीसदी लोगों के पास देश की 22 फीसदी संपत्ति थी. लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि देश की 60 फीसदी संपत्ति पर एक फीसदी लोगों का कब्जा है. इतना ही नहीं देश की कुल आबादी के 10 फीसदी लोग देश की 90 फीसदी संपत्ति के मालिक हैं.
अमीर अौर गरीबों के बीच की खाई जिस प्रकार चौड़ी हो रही है, वह युवाअों के लिए गंभीर चुनौती है. आर्थिक असमानता अन्याय पैदा रहती है. असमानता का आलम देखिए, जिस देश में सिर्फ दो साल में 22,000 किसानों ने आर्थिक तंगी व सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने की वजह से आत्महत्या कर ली हो, उसी देश में कई ऐसे अपार्टमेंट भी हैं, जहां 200 फ्लैट के लिए 200 स्वीमिंग पुल हैं. यह झकझोरने वाली तस्वीर है. इस तस्वीर को बदलने की आवश्यकता है.
राहुल गांधी शनिवार को जमशेदपुर के नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट अॉफ बिजनेस मैनेजमेंट में आयोजित इंडक्शन मीट के दौरान बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे.
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक असमानता खत्म करने के लिए देश के युवा सामने आये. वे मूवमेंट चलायें. मूवमेंट सिर्फ सड़कों पर उतर कर ही नहीं होता है. सोशल मीडिया का जमाना है. सैकड़ों ऐसे उदाहरण हैं, जो यह सीख देती है कि अगर एक इंसान भी चाह ले, तो वह बड़ा बदलाव ला सकता है. इससे पूर्व संस्थान के सचिव मदन मोहन सिंह ने संबोधित किया.
देश की 73 फीसदी शिक्षा शहरों में केंद्रित : वरुण गांधी ने देश की शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था पर जम कल हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश में कुल 18.5 लाख स्कूल हैं. जिसमें सिर्फ एक फीसदी स्कूल ही सीबीएसइ व आइसीएसइ बोर्ड के हैं.
बाकी सभी स्टेट बोर्ड के हैं. ताजा आंकड़े के अनुसार आइआइटी व आइआइएम जैसी संस्थानों में जिन विद्यार्थियों का एडमिशन हुआ है, उनमें 72 फीसदी विद्यार्थी सीबीएसइ व आइसीएसइ बोर्ड के ही हैं. श्री गांधी आर्थिक असामानता पर हमला करते हुए यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि देश में हर स्टूडेंट आइएएस बनना चाहता है. लेकिन एक सर्वे के अनुसार देश के कुल 79 फीसदी आइएएस व आइपीएस अधिकारी टॉप 25 शहरों के हैं.
इतना ही नहीं कुल 66 फीसदी आइएएस-आइपीएस ने प्राइवेट स्कूल से जबकि 21 फीसदी ने तो कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई की. यह असमानता गंभीर चिंता का विषय है. रोहित वेमुला व आर्य प्रकाश की मौत इसी आर्थिक असमानता का एक प्रमुख कारण है.
सरकारी स्कूलों का इस्तेमाल बारात ठहराने के लिए : वरुण गांधी ने कहा कि नौ साल पहले अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया. बेहतर कानून था. इसके अनुपालन के लिए कुल तीन लाख करोड़ खर्च हुआ. लेकिन इस कानून के लागू होने के बाद भी शिक्षा के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ. कारण है कि शिक्षा के मद में जितनी फंड आवंटित की गयी थी, उसका 89 फीसदी इस्तेमाल भवन निर्माण में हो गया. हर गांव में स्कूल बना दिये गये, जहां कभी शादी में बारातियों को ठहराया जाता है, तो कभी चुनाव कार्य होते. अगर वहां कुछ नहीं होता, तो सिर्फ पढ़ाई.
पढ़ाई आखिर हो भी कैसे. पढ़ाने के लिए तो शिक्षक हैं ही नहीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीट आरक्षित रखना है, लेकिन एनसीपीसीआर के आंकड़े के अनुसार अब तक सिर्फ 30 फीसदी ही आरक्षित सीटें भरी जा सकी है.
ग्रेजुएट आठवीं तक के बच्चों को व पीजी स्टूडेंट 12 वीं तक के बच्चों को एक साल तक करें शिक्षा दान
देश में कुल 17.5 लाख शिक्षकों की कमी है. इस कमी को एक दिन में पूरा नहीं किया जा सकता है. लेकिन शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए वरुण गांधी ने सुझाव दिया कि देश में इस प्रकार का नियम बने कि जो भी स्टूडेंट ग्रेजुएट हैं वे एक साल तक पहली से आठवीं क्लास तक के जबकि पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को एक साल तक अनिवार्य रूप से पढ़ायें. इससे शिक्षकों की कमी भी दूर हो जायेगी अौर सरकार का राजस्व भी खर्च नहीं होगा.
छह हजार करोड़ का शिक्षा लोन हुआ एनपीए
वरुण गांधी ने कहा कि हर साल करीब 12 लाख विद्यार्थी आइआइटी की परीक्षा में शामिल होते हैं. लेकिन पास होते हैं सिर्फ 10,000. आइआइटी के अलावा अन्य तकनीकी संस्थानों में भी अगर एडमिशन के आंकड़े को देखा जाये तो करीब 1 लाख तक को एडमिशन मिल पाता है. लेकिन अन्य 11 लाख विद्यार्थियों ने लोन लेकर जो कोचिंग या फिर तैयारी की थी, वे चुका नहीं पाते हैं. नतीजा यह है कि करीब 70 हजार करोड़ का शिक्षा लोन है, जिसमें छह हजार करोड़ शिक्षा लोन एनपीए हो चुका है.
बलात्कारी अबोध हो या बालिग, मिले फांसी : वरुण गांधी ने कहा कि बलात्कारियों के साथ किसी प्रकार का कोई रहम नहीं होनी चाहिए. वह चाहे बालिग हो या नाबालिग. इस तरह के कृत्य को करने वाले को फांसी की सजा मिलनी चाहिए.
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