स्कूलों में 70 % बच्चे हो रहे दंड के शिकार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jun 2018 4:48 AM
विज्ञापन
जमशेदपुर : एक सर्वेक्षण के आधार पर दावा किया गया है कि 70 फीसदी बच्चे किसी न किसी स्तर पर दंड के शिकार हो रहे हैं. यह चौंकाने वाले हैं. इसकी रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है. उक्त बातें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से झारखंड राज्य बाल अधिकार […]
विज्ञापन
जमशेदपुर : एक सर्वेक्षण के आधार पर दावा किया गया है कि 70 फीसदी बच्चे किसी न किसी स्तर पर दंड के शिकार हो रहे हैं. यह चौंकाने वाले हैं. इसकी रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है. उक्त बातें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही.
मंगलवार को बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआइ सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यालयों में शारीरिक दंड को समाप्त करने पर बल दिया गया. इसमें राज्य भर के सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी अथवा उनके प्रतिनिधि, कस्तूरबा विद्यालय के प्रतिनिधि, ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य तथा कुल 88 सरकारी व निजी स्कूलों के प्राचार्य व वरिष्ठ शिक्षकों ने हिस्सा लिया.
कार्यक्रम में झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन आरती कुजूर, सचिव संजय मिश्रा, सीआइपी के मनोचिकित्सक डॉ निशांत गोयल, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अरविंद विजय बिलुंग, एनआइपी की निदेशक रंजना मिश्रा, पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रदीप चौबे, पूर्वी सिंहभूम के डीइओ आरकेपी सिंह मौजूद थे. दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला की शुरुआत हुई. आयोजन का समन्वय पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह ने किया.
दो से दस वर्ष के बीच दंड बच्चों के मानसिक विकास में बाधक : डॉ गोयल
कार्यशाला को मनोविशेषज्ञ डॉ निशांत गोयल ने संबोधित किया. उन्होंने शोध निष्कर्ष का हवाला देते हुए कहा कि दो से दस वर्ष के बीच बच्चों को दिया जाने वाले दंड मानसिक विकास को प्रभावित करता है. प्रतिभागियों के लिए रखा गया खुला सत्र. कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए खुला सत्र आयोजित किया गया.
इसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे. विशेषज्ञों से सवाल जवाब किया. इस दौरान एक प्रतिभागी ने कहा कि कुछ बच्चे उन्हें माेटू कहकर बुलाते हैं. एनसीपीसीआर के विशेषज्ञों ने कहा कि वह बाल मानसिकता को सकारात्मक रूप से लें. एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों में बच्चों को थोड़ा भी दंडित किया गया, तो गांव के लोग एकत्र होकर मुंह काला कर देते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










