बरबाद होने की कगार पर जिले में करोड़ों रुपये की दर्जनों योजनाएं

Published at :09 Jan 2017 12:41 AM (IST)
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बरबाद होने की कगार पर जिले में करोड़ों रुपये की दर्जनों योजनाएं

हाल. कहीं भवन बन गये खंडहर, तो कहीं आवंटन के अभाव में काम ठप राज्य में विकास कार्यों की गति की रफ्तार क्या है, इसका अंदाजा हजारीबाग की लंबित योजनाओं से लगाया जा सकता है. सरकार की ओर से अधूरी योजनाओं को पूरा नहीं किया गया है. जिले में कई योजनाएं ऐसी हैं, जिसे एक […]

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हाल. कहीं भवन बन गये खंडहर, तो कहीं आवंटन के अभाव में काम ठप
राज्य में विकास कार्यों की गति की रफ्तार क्या है, इसका अंदाजा हजारीबाग की लंबित योजनाओं से लगाया जा सकता है. सरकार की ओर से अधूरी योजनाओं को पूरा नहीं किया गया है. जिले में कई योजनाएं ऐसी हैं, जिसे एक दशक के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका. चुरचू में विद्युत उपकेंद्र की योजना 13 वर्ष से लंबित है.
इचाक में स्टेडियम का निर्माण कार्य सात वर्ष से अधूरा है. पदमा में दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण आठ वर्षों में भी पूरा नहीं हो पाया. कटकमसांडी में प्लस टू स्कूल का भवन भी निर्माणाधीन है. इतना ही नहीं प्रखंडों में कई योजनाएं ऐसी हैं, जिसमें राशि की बंदरबांट कर ली गयी. क्षेत्र में अधूरे पड़े कार्य सरकार के कामकाज की गंभीरता को दिखाता है.
पदमा में 3.65 करोड़ रुपये और चंपाडीह में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से 2008 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही और विधायक मनोज यादव ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास किया था. इसका निर्माण कार्य हजारीबाग ग्रामीण विशेष प्रमंडल विभाग द्वारा शुरू हुआ था. इसमें व्यापक गड़बड़ी बरती गयी. सहायक अभियंता और कनीय अभियंता ने बिना कार्य के मापी दर्ज कर लगभग 30 लाख रुपये से अधिक की निकासी कर ली. बाद में उक्त अभियंता पर केस दर्ज हुआ और जेल भेजा गया. यह योजना आज तक अधूरी है.
प्राक्कलित राशि : "10 करोड़
नेशनल हाइवे-33 के किनारे पदमा में जैप सात का स्थायी स्थापना का काम 2006 में शुरू हुआ. लगभग 10 करोड़ की लागत से योजना के लिए दर्जनों भवन का निर्माण शुरू हुआ. पुलिस विभाग की ओर से संवेदक को काम की जिम्मेवारी सौंपी गयी. एक साल बाद ही फंड के अभाव में काम बंद हो गया.
केरेडारी प्रखंड के कराली गांव में हरिजन छात्रावास आठ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया. 100 बेड के छात्रावास का निर्माण विशेष प्रमंडल विभाग की ओर से 32 लाख रुपये की लागत से बनवाया जा रहा था, लेकिन आज तक नहीं बन पाया. अब निर्माणाधीन छात्रावास खंडहर में तब्दील होने को है. लोग इसे अब खंडहर कह कर पुकारने लगे हैं. मजेदार बात यह है कि योजना की लगभग सारी राशि की निकासी कर ली गयी है. वहीं शेड निर्माण के लिए ठेकेदार ने पैसे की निकासी कर ली, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया.
शेड निर्माण प्राक्कलित राशि : "2 लाख
केरेडारी प्रखंड मुख्यालय में लोगों को बैठने के लिए शेड की जरूरत थी. शेड बनाने का कार्य वर्ष 2012-13 में शुरू हुआ था. निर्माण की प्राक्कलित राशि लगभग दो लाख रुपये थी. यहां शेड निर्माण का कार्य तो शुरू हुआ, लेकिन इसे अधूरा छोड़ दिया गया. निर्माण को लेकर लगभग एक लाख रुपये की निकासी भी हो चुकी है.
स्वास्थ्य केंद्र
प्राक्कलित राशि : "4 करोड़
केरेडारी के बड़काआम ग्राम में स्वास्थ्य केंद्र बनाने का कार्य पिछले कई वर्षों से चल रहा है, लेकिन इस काम को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. बताया जाता है कि निर्माण कार्य की राशि की निकासी भी कर ली गयी है. ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र बन जाने से लोगों को लाभ मिलता. उन्हें बेहतर सेवा के लिए दूर नहीं जाना पड़ता.
पदमा मुख्यालय में 14 लाख की लागत से 2012 में राजीव गांधी सुविधा केंद्र का काम शुरू हुआ. यह लगभग 80 प्रतिशत हो चुका था. यह योजना पांच साल से अधर में है. सरकार की ओर से इसे बनवाने की दिशा में अब तक गंभीरता नहीं बरती गयी है.
चुरचू में विद्युत उपकेंद्र के लिए हजारीबाग के पूर्व सांसद यशवंत सिन्हा ने 2003 में आधारशिला रखी थी, लेकिन 13 वर्ष बीतने के बाद भी चुरचू प्रखंड में विद्युत उपकेंद्र नहीं बन पाया. चुरचू व आंगो सहित आसपास के ग्रामीणों में आस जगी थी कि विद्युत उपकेंद्र बनने से उन्हें बिजली की सुविधा मिलेगी, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया. विद्युत उपकेंद्र के बनने से चुरचू,आंगो सहित दर्जनों सुदूरवर्ती गांवों को लाभ मिलेगा. इस संबंध में पूर्व भाजपा प्रखंड अध्यक्ष सह बीस सूत्री अध्यक्ष प्रवील यादव ने कहा कि शिलान्यास के बाद चुरचू अंचल की ओर से जमीन उपलब्ध नहीं करायी गयी. इस कारण चुरचू में विद्युत उपकेंद्र नहीं बन पाया.
प्रखंड मुख्यालय परिसर में सीओ आवास, संसद भवन, किसान भवन, सांस्कृतिक भवन, पुस्तकालय भवन व सीएचसी आवास दो वर्ष से बन कर तैयार है, लेकिन इन भवनों का कोई उपयोग नहीं हो रहा है. इस भवनों को बनाने में करीब ढ़ाई करोड़ रुपये का खर्च आया है. वहीं कटकमसांडी थाना भवन, प्लस टू स्कूल भवन, छात्रावास, किसान भवन, अंचल भवन, स्टेडियम, कंडसार प्लस टू स्कूल भवन अब तक अधूरे हैं. पंसस सतीश कुमार ने कहा है कि निर्माण कार्य में अनियमितता करनेवाले ठेकेदारों पर कार्रवाई हो. 24 फरवरी को प्रखंड मुख्यालय में आयोजित पंचायत समिति सदस्यों की बैठक में भवन से संबंधित मामले को उठाया जायेगा.
जारटांड़ विष्णुगढ़ के पास आठ इंदिरा आवास का निर्माण कार्य लगभग 20 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ. प्राक्कलित राशि का बंदबांट हो गया. निर्माण स्थल पर सिर्फ दीवार खड़ी है. इंदिरा आवास ग्रामीण दिनेश्वर भुइयां, छोटन भुइयां, विनोद भुइयां, हेमलाल भुइयां, स्व देला भुइयां, ननका भुइयां, स्व सेवा भुइयां व स्व शनिचर भुइयां के परिजनों को मिलना था.
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