टूट गये झूले, झाड़ियों में तब्दील हो गये पेड़-पौधे

Published at :19 Nov 2016 8:21 AM (IST)
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टूट गये झूले, झाड़ियों में तब्दील हो गये पेड़-पौधे

बदहाली. तीन साल में ही बरबाद हो गया शहीद निर्मल महतो पार्क 33 एकड़ में फैला है ऐतिहासिक निर्मल महतो पार्क 2008 में हुआ था पार्क का शिलान्यास 2013 में तैयार कर जनता को सौंपा गया था सुंदर पार्क करीब चार करोड़ रुपये की आयी थी लागत नये साल में कहां जायेंगे पर्यटक हजारीबाग : […]

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बदहाली. तीन साल में ही बरबाद हो गया शहीद निर्मल महतो पार्क
33 एकड़ में फैला है ऐतिहासिक निर्मल महतो पार्क
2008 में हुआ था पार्क का शिलान्यास
2013 में तैयार कर जनता को सौंपा गया था सुंदर पार्क
करीब चार करोड़ रुपये की आयी थी लागत
नये साल में कहां जायेंगे पर्यटक
हजारीबाग : हजारीबाग स्थित शहीद निर्मल महतो पार्क का अस्तित्व खतरे में है. यहां प्रतिदिन हजारों पर्यटक शुकून के पल बिताने आते हैं, लेकिन यहां के पेड़-पौधे, हरियाली, फूलों की क्यारियां एवं रंग बिरंगे फव्वारे समेत बच्चों के मनोरंजन के बनाये गयी तरह-तरह की आकृतियां व झूले नष्ट होने के कगार पर है.
पार्क के अंदर में शहीद अलबर्ट एक्का, बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, तिलका मांझी समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं लगी हैं. इसे देख पयर्टक झारखंड के गौरव एवं शान और शहीदों के संघर्ष को याद करते हैं. इस ऐतिहासिक पार्क का शिलान्यास 19 नवंबर-2008 को तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सुधीर महतो, सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, विधायक मनोज यादव, सौरभ नारायण सिंह व लोकनाथ महतो ने किया था. छह मार्च 2013 को पार्क तैयार हुआ और जनता को लिए खोल दिया गया. यह पार्क 33 एकड़ भूमि में फैला है. वन विभाग के सहयोग से पार्क को बनाने में करीब चार करोड़ रुपये की लागत आयी थी.
तीन साल में ही पार्क की रौनक खत्म: शहीद निर्मल महतो पार्क में पर्यटकों को लुभाने के लिए पीकॉक टेल फाउंटेन, छतरीबाग, रॉकरी, शौचालय, भुलभुलैया, गुलाब वाटिका, नक्षत्र वन, म्युजिकल फाउंटेन, दर्शक दीर्घा, अंडा तालाब आदि बनाये गये थे. वहीं झारखंड के वीर सपूतों की प्रतिमा समेत गुलैची बाग,जुरासिक पार्क,एमफी थियेटर, ग्रीन हाउस, औषधि वन, स्ट्रीम बेड आदि लगाये गये. लेकिन अब तीन साल के बाद इन सारी चीजों की रौनक खत्म हो गयी. यहां की रौनक खत्म होती जा रही है. इससे लोगों को काफी निराशा हुई है.
पाम गार्डेंन झाड़ियों में तब्दील: गार्डेन में करीब एक एकड़ भूमि में कई पाम वृक्ष लगाये गये हैं. शुरुआत में यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था, लेकिन देखभाल के अभाव में पाम गार्डेन झाड़ियों में तब्दील होता जा रहा है. चारों तरफ कंटीली झाड़ियां उग आयी हैं.
दुर्घटना को आमंत्रित करते रॉकरी: पार्क में एक खूबसूरत रॉकरी का निर्माण किया गया. इसकी चोटी से झरना गिरने का दृश्य है.यह पर्यटकों को काफी लुभाता था, लेकिन यह भी पूरी तरह ध्वस्त हो गया है. रॉक टूट- टूट कर नीचे गिर रहे हैं. पार्क प्रबंधक ने गंभीरता दिखाते हुए रॉकरी को बंद कर दिया. दोनों प्रवेशद्वार में झाड़ियां व लोहे की जाली लगा दी गयी.
चिल्ड्रेन पार्क में टूटा है झूला: पार्क के अंदर बच्चों के खेलने एवं मनोरंजन के लिये विशेष सुविधाओं वाला चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया है. इसमें तरह तरह के झूले लगे हैं. घोड़े का झूला में घोड़ा टूट कर खत्म हो गया है. सिर्फ लोहा ही बचा है. दूसरे झूले का बीम टूटा हुआ है. प्लास्टिक की स्लाइड टूट गयी है.
गुलाब वाटिका में खुशबू ही नहीं: पार्क में गुलाब वाटिका है.जिसमें दर्जनों प्रकार के गुलाब के फूल लगे हुए हैं. इस वाटिका में गुलाब कम दिखते हैं, गाजर घास के दिन फिरे हैं. जब वाटिका में सभी गुलाब खिलते हैं तो अधिक पर्यटक इसके करीब ही कुछ देर रहने का मन बनाते हैं. लेकिन यहां गुलाबों की कंटीली डार बची है.
नक्षत्र वन भी किसी काम का नहीं: शहीद निर्मल महतो पार्क में सभी वर्ग के लोगों की रुचि के अनुसार पार्क बनाये गये हैं. नक्षत्र वन उनमें से एक है. इस पार्क को बनाने का उद्देश्य लोगों को ग्रह नक्षत्रों की जानकारी देना था. कौन से ग्रह के लिये कौन सा पौधा फलदायक है, इससे जाना जा सकता था. लेकिन इस नक्षत्र को समझने एवं समझानेवाली पौधों की सूची नहीं है. इसके रहने से लोगों के अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त लगने पौधे का चयन करने में सुविधा होगी.
गुलैची, जुरासिक पार्क, ग्रीन हाउस औषधि वन भी खतरे में: निर्मल महतो पार्क में गुलैची पार्क करीब तीन एकड़ा में फैला है. आज यह पार्क घास के पार्क में बदल गया है. पांच से छह फीट लंबी घास लहरा रही है.जुरासिक पार्क में पेयजल की सुविधा नहीं है. डायनासोर रंग-रोगन के अभाव में भद्दा लग रहा है. उसका वास्तविक सौंदर्य खत्म हो गया है. ग्रीन हाउस में पौधों की नर्सरी तैयार करने की व्यवस्था की गयी थी, लेकिन उद्देश्य पूरा होना अब कोसो दूर हो गया है.
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