सर, कैसे रहेंगे,न अनाज है न रसोई गैस

Updated at : 09 Aug 2020 2:02 AM (IST)
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सर, कैसे रहेंगे,न अनाज है न रसोई गैस

न खाने को अनाज, दाल, तेल है. न रसोई गैस है. न ही बच्चों को दूध मिल रहा है. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए शरीर का इम्युनिटी पावर बढ़ाना है, परंतु यहां पौष्टिक आहार तो दूर, खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गयी है. यह हाल गुमला शहर के इस्लामपुर मुहल्ला का है. इस मुहल्ला से 10 दिन पहले एक सहिया कोरोना संक्रमित मिली है. इसके बाद प्रशासन ने इस्लामपुर को कंटेनमेंट जोन में शामिल करते हुए सील कर दिया.

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गुमला : न खाने को अनाज, दाल, तेल है. न रसोई गैस है. न ही बच्चों को दूध मिल रहा है. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए शरीर का इम्युनिटी पावर बढ़ाना है, परंतु यहां पौष्टिक आहार तो दूर, खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गयी है. यह हाल गुमला शहर के इस्लामपुर मुहल्ला का है. इस मुहल्ला से 10 दिन पहले एक सहिया कोरोना संक्रमित मिली है. इसके बाद प्रशासन ने इस्लामपुर को कंटेनमेंट जोन में शामिल करते हुए सील कर दिया.

साथ ही मुहल्ले के कई लोगों का कोरोना सैंपल लेकर जांच की गयी, परंतु सभी का सैंपल निगेटिव आया है. इसके बाद भी इस्लामपुर की आधी बस्ती को प्रशासन ने बांस-बल्ली से घेर कर सील कर दिया है. जिससे 16 परिवार के लोग सील हुए स्थान से नहीं निकल पा रहे हैं. न ही प्रशासन इन परिवारों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कर रहा है, जिससे इन लोगों के समक्ष खाने पीने के लाले पड़ गये हैं.

जबकि इस मुहल्ले में रहने वाला सभी परिवार गरीबी में जी रहा है. हर रोज कमाते हैं, तो घर का चूल्हा जलता है, परंतु मुहल्ला सील होने के बाद से आठ दिनों से 16 परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. शनिवार को प्रभात खबर ने मुहल्ले के लोगों की शिकायत पर उनसे बात की. लोगों की समस्याओं से अवगत हुए. साथ ही मुहल्ला सील होने के बाद परिवार के लोग कैसे जी रहे हैं, इसकी पड़ताल की. लोगों ने जो जानकारी दी, उससे पता लगा कि मुहल्ले की स्थिति भयावह हो रही है. अगर प्रशासन ने यहां मदद नहीं पहुंचाया, तो समस्या उत्पन्न हो सकती है.

मुहल्ले के लोगों ने सुनाया दुखड़ा

मुहल्ले की सरवरी खातून, रोकया आरा, हसीब, अनिशा खातून, एहतेशाम आलम, हफीज, आजाद खान, शहजाद खान, इम्तियाज खान, मो अमजद, मो कादिर, रिजवान आलम, शमशेर खान ने प्रशासन से गुहार लगायी है कि इस्लामपुर को कंटेनमेंट जोन से मुक्त करते हुए यहां की गयी बैरिकेडिंग हटा दें. जिससे मुहल्ले के लोग अपना रोजगार कर जीविका चला सकें या फिर प्रशासन मुहल्ले के लोगों के लिए खाने-पीने की सामग्री उपलब्ध करा दे.

रसोई गैस की भी व्यवस्था करने की मांग की है. लोगों ने कहा है कि हम संकट में जी रहे हैं. प्रशासन ही इस संकट से हमें निकाल सकता है. लोगों ने कहा है कि हमारे मुहल्ला में सभी लोगों की कोरोना जांच हुई है. सभी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी है. सिर्फ एक सहिया कोरोना संक्रमित है, जो कि आइसोलेशन वार्ड में है. वह भी स्वस्थ है. अगर दोबारा उसकी जांच हो, तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव आयेगी.

पिता ने कहा : कैसे करें बेटी की शादी?

इस्लामपुर मुहल्ला कंटेनमेंट जोन में है. मुहल्ला को सील कर दिया गया है. कंटेनमेंट जोन से न तो कोई निकल सकता है और न ही बाहर का कोई व्यक्ति कंटेनमेंट जोन में प्रवेश कर सकता है. कोरोना संक्रमण में जिस प्रकार की बंदिश लगी है, इस बंदिश में एक पिता अपनी बेटी की शादी को लेकर चितिंत हैं. मुहल्ले के शमशेर खान की बेटी की शादी 12 अगस्त को है. बड़ी मुश्किल से शादी की तिथि तय हुई है. लॉकडाउन के कारण कई बार शादी की तिथि टली.

इधर, अनलॉक शुरू हुआ, तो शादी की तिथि तय हो गयी. बेटी की शादी की पूरी तैयारी पिता ने कर ली है, परंतु इसी दौरान एक कोरोना संक्रमित मरीज मिलने से मुहल्ले को सील कर दिया गया, जिससे शमशेर खान की चिंता बढ़ गयी. पिता ने कहा है कि कंटेनमेंट जोन में वह अपनी बेटी की शादी कैसे करें? उन्होंने अपने समाज के लोगों से मदद की मांग की है. साथ ही प्रशासन से गुहार लगायी है कि शादी के दिन कंटेनमेंट जोन हटा दिया जाये, जिससे सरकारी नियम कानून के अनुसार एक पिता अपनी बेटी की शादी कर सके.

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