आदिवासियों की पहचान है करमा : प्रशांता खलखो
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Sep 2016 5:23 AM (IST)
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चैनपुर प्रखंड के कटकाही चर्च परिसर में करमा महोत्सव उत्कृष्ट प्रदर्शन करनेवाली मंडलियां सम्मानित चैनपुर : करमा आदिवासी समाज की सभ्यता व संस्कृति की पहचान है. झारखंड में आदिवासियों के त्योहार में से करमा को प्रमुख त्योहार के रूप में माना जाता है. इस त्योहार को आदिवासी समाज बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. ये बातें […]
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चैनपुर प्रखंड के कटकाही चर्च परिसर में करमा महोत्सव उत्कृष्ट प्रदर्शन करनेवाली
मंडलियां सम्मानित
चैनपुर : करमा आदिवासी समाज की सभ्यता व संस्कृति की पहचान है. झारखंड में आदिवासियों के त्योहार में से करमा को प्रमुख त्योहार के रूप में माना जाता है.
इस त्योहार को आदिवासी समाज बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. ये बातें जिला परिषद की सदस्य प्रशांता खलखो ने कही. वे चैनपुर प्रखंड के कटकाही चर्च परिसर में आयोजित करमा महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं. विशिष्ट अतिथि प्रमुख ओलिभा कांता कुजूर ने कहा कि पारंपारिक आदिवासी नृत्य हमारी आदिवासी समाज की पहचान है. इसे बचाये रखने की आवश्यकता है.
उन्होंने सभी को करमा की बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान समय में आदिवासी समाज का अस्तित्व खतरे में है. हमें एकजुट होकर अपने अस्तित्व की रक्षा करने के लिए आगे आना होगा. फादर आनंद तिग्गा ने कहा कि करमा हमारी संस्कृति को झलकाता है, जिसे बचाये रखने की आवश्यकता है.
करमा महोत्सव में कटकाही क्षेत्र के 30 गांव की नृत्य मंडली शामिल हुई. उत्कृष्ट नृत्य मंडली को कमेटी को ओर से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुखिया गब्रियल कुजूर, फादर कोसमोस, फादर विनोद, फादर फिलमोन, लेवनार्ड खलखो शामिल थे. मंच का संचालन हेरमन कुजूर, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विवियाना लकड़ा ने किया.
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