आंगनबाड़ी केंद्र व 297 स्कूलों में पानी नहीं

Updated at : 15 May 2019 1:38 AM (IST)
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आंगनबाड़ी केंद्र व 297 स्कूलों में पानी नहीं

पानी को तरसते हैं बच्चे, विभाग रहता है बेखबर गुमला : गुमला जिले के 823 आंगनबाड़ी केंद्र व 297 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पानी नहीं है. यहां चापानल खोदा ही नहीं गया है. जिस कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों को सालों भर पानी के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है. मध्याह्न भोजन भी बनाने के […]

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पानी को तरसते हैं बच्चे, विभाग रहता है बेखबर

गुमला : गुमला जिले के 823 आंगनबाड़ी केंद्र व 297 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पानी नहीं है. यहां चापानल खोदा ही नहीं गया है. जिस कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों को सालों भर पानी के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है.

मध्याह्न भोजन भी बनाने के लिए एक व दो किमी दूर गांव से पानी लाया जाता है. अगर बच्चों को प्यास लगती है, तो बच्चे घर पानी पीने जाते हैं. हालांकि अभी गुमला जिले के सभी सरकारी स्कूल बंद हैं. इस कारण बच्चों को परेशानी झेलनी नहीं पड़ रही है. लेकिन जब गर्मी छुट्टी के बाद स्कूल खुलेगा, तो बच्चों को पुन: पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी. जबकि सरकार का निर्देश है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पानी की समुचित व्यवस्था हो. लेकिन गुमला में संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने कामों में रूचि नहीं लेने के कारण जो सुविधा आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों को मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही है.

जानकारी के अनुसार, गुमला जिले में 1670 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 823 केंद्रों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है. जबकि 315 केंद्र में चापानल खराब पड़ा हुआ है, जिसकी मरम्मत नहीं हो रही है. कई बार खराब चापानलों की मरम्मत की मांग गयी है. इसके बाद भी विभाग द्वारा पहल नहीं की जा रही है. वहीं जिन स्कूलों में चापानल खराब है, उस स्कूल के एचएम ने शिक्षा विभाग के अलावा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को पत्र लिख कर खराब चापानलों की मरम्मत की मांग की है, लेकिन एचएम की मांग पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

ऐसे शिक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि हमलोग चापानल स्कूल परिसर में लगाने के लिए पेयजल विभाग को सूची देते हैं, लेकिन पेयजल विभाग का कारनामा अजीब रहता है. स्कूल की जगह गांव या स्कूल से दूर चापानल लगा दिया जाता है. इस कारण स्कूलों में पानी की किल्लत है. पठारी क्षेत्र के सभी स्कूलों में पानी की समस्या है, क्योंकि पठारी क्षेत्र ड्राई जोन है, जहां चापानल काम नहीं करता है. विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 58 स्कूल ड्राई जोन इलाके में है, जहां जमीन खोद कर पानी निकालना मुश्किल है.

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