पांच सालों में बदलेगी देश की तसवीर

Published at :30 Jan 2018 8:11 AM (IST)
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पांच सालों में बदलेगी देश की तसवीर

गुमला : विजन-2022 को लेकर जिला प्रशासन गुमला के तत्वावधान में सोमवार को शहर के नगर भवन में दो दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला शुरू हुई. कार्यशाला में जहां गुमला जैसे पिछड़े जिले को देश के अग्रणी जिलों में शामिल करने के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य सहित कई विषयों पर कार्य करने पर चर्चा की गयी, […]

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गुमला : विजन-2022 को लेकर जिला प्रशासन गुमला के तत्वावधान में सोमवार को शहर के नगर भवन में दो दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला शुरू हुई. कार्यशाला में जहां गुमला जैसे पिछड़े जिले को देश के अग्रणी जिलों में शामिल करने के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य सहित कई विषयों पर कार्य करने पर चर्चा की गयी, वहीं जिले के विकास के लिए सभी प्रशासनिक विभागों को मिल कर काम करने और जन सहभागिता पर बल दिया गया. मुख्य अतिथि एनएचआइडीसीएल के एमडी एनएन सिन्हा ने कार्यशाला का उदघाटन किया.

उन्होंने कहा कि आने वाले पांच सालों में देश के प्रत्येक राज्य के सभी जिलों व गांवों की तकदीर बदलेगी. केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने विजन-2022 के तहत भारत को विकसित देश में शामिल करने के लिए रणनीति बनायी है.

इसके तहत देश के सभी राज्यों के सभी जिलों को अपने-अपने जिले और जिलेवासियों के विकास के लिए सभी प्रकार की योजनाएं बनानी है और उसे 2022 तक हर हाल में पूरा करना है. एमडी ने कहा कि अभी हमारे पास अवसर है. इस अवसर का लाभ उठाना है. राशि की कोई कमी नहीं है.

विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार से फंड उपलब्ध कराया जायेगा. एमडी ने नक्सलवाद की चर्चा करते हुए कहा कि विकास में नक्सलवाद बाधक है. नक्सलवाद के कारण ही कई क्षेत्रों का विकास ठप पड़ा हुआ है. लेकिन विजन-2022 के तहत योजनाएं बना कर मिशन मोड के रूप में काम करना है. एमडी ने बताया कि 188 देशों में भारत 131वें पायदान पर है. भारत के यदि गुमला जिले की बात करें, तो यह जिला पिछड़ा जिला है. इस पिछड़े जिले को देश के अग्रणी जिलों में शामिल करना है.

मिल कर काम करें, विजन-2022 का सपना साकार होगा : डीसी

उपायुक्त श्रवण साय ने कहा कि जिले के विकास में सभी की सहभागिता जरूरी है. चाहे वह प्रशासनिक विभाग की सहभागिता हो अथवा जनसहभागिता. जिले के उत्तरोतर विकास के लिए यदि मिल कर काम करेंगे, तो विजन-2022 का सपना साकार होगा और हमारा जिला भी अन्य जिलों की तरह अग्रणी जिला में शामिल होगा. गुमला जिले में अशिक्षा व नक्सलवाद सहित कई प्रकार की सामाजिक कुरीतियां व अंधविश्वास है. इन सभी को दूर करना है, ताकि आने वाले पांच सालों में हमारा जिला एक विकसित जिला बन सके.

कार्यशाला में उपस्थित पदाधिकारी व प्रतिनिधि

कार्यशाला में एसपी अंशुमान कुमार, डीडीसी नागेंद्र कुमार सिन्हा, डीएफओ अजीत कुमार सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, उपाध्यक्ष कृष्णदेव सिंह, एलआरडीसी अंजना दास, डीआरडीए निदेशक मुस्तकीम अंसारी, नैप निदेशक नयनतारा केरकेट्टा, आइटीडीए के निदेशक कृष्ण किशोर, डीपीओ अरुण कुमार सिंह, जिला उद्यान्न पदाधिकारी अरुण कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी कुमोद कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी डॉ रमेशचंद्र सिन्हा, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी राकेश कुमार कनौजिया, जिला मत्स्य पदाधिकारी सीमा कुमारी कुजूर, सीएस डॉ एसएन झा व जिप सदस्य सुबोध कुमार लाल सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल थे.

नीति आयोग ने ली है पिछड़े जिलों के विकास की जिम्मेवारी : सचिव

खेलकूद, संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग झारखंड सरकार के सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला गुमला जिले के विकास का एक नया अध्याय लिखेगी. नक्सलवाद की समस्या के कारण जिले का समुचित विकास नहीं हो पा रहा था. कई उपयोगी योजनाएं नक्सलवाद के कारण ठप पड़ गयी थी, लेकिन विजन 2022 गुमला जिला की तकदीर बदलने वाली है.

जरूरत है, तो बस सभी को मिल कर काम करने की. देश के पिछड़े जिलों की स्थिति को देखते हुए नीति आयोग ने पिछड़े जिलों को विकसित जिला के रूप में स्थापित करने की जिम्मेवारी ली है. सचिव ने कहा कि जिले में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है. पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जायेगा.

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