री-टेंडर के पेंच में फंसा बरमसिया टू पंचायत भवन, निर्माण स्थल पर उग आयीं झाड़ियां

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निर्माणाधीन पंचायत भवन

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बरमसिया टू पंचायत भवन का निर्माण 17 लाख की लागत से शुरू हुआ था, लेकिन वर्षों बाद भी अधूरा है. री-टेंडर की प्रक्रिया में फंसने से ग्रामीण सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.

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गिरिडीह. ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही सरकारी सुविधाएं और विकास योजनाओं का लाभ देने के उद्देश्य से पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया था. लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं की पेचीदगी के कारण गांडेय प्रखंड की बरमसिया टू पंचायत में यह उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका है.

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यहां करीब 17 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित मूल पंचायत भवन का निर्माण वर्षों बाद भी अधूरा है. री-टेंडर की प्रक्रिया में मामला फंसने के कारण भवन आज तक पूरा नहीं हो पाया है. स्थिति यह है कि निर्माण स्थल पर झाड़ियां उग आयी हैं, जबकि पंचायत सचिवालय का संचालन राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि से बने सामुदायिक भवन में किया जा रहा है.

2010-11 में शुरू हुआ था पंचायत भवन का निर्माण

जानकारी के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले बरमसिया टू पंचायत का पुराना पंचायत भवन चौंरा में था. वर्ष 2010-11 में बरमसिया गांव में पंचायत के नाम पर करीब 17 लाख रुपये की लागत से नये पंचायत भवन का निर्माण शुरू किया गया. लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही मामला री-टेंडर की प्रक्रिया में उलझ गया. इसके बाद से भवन का काम अधूरा पड़ा है. वर्षों से निर्माण कार्य बंद रहने के कारण भवन परिसर में झाड़ियां उग आयी हैं.

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राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि से बने भवन में चल रहा सचिवालय

मूल पंचायत भवन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण पंचायत सचिवालय का संचालन दूसरे भवन में किया जा रहा है. मुखिया मीना देवी के अनुसार, वर्ष 2013-14 में पंचायत को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था. इसी भवन में पंचायत सचिवालय संचालित है. पंचायत के सभी सरकारी कार्यों का संचालन यहीं से किया जाता है.

मूल पंचायत भवन को पूरा कराने की होगी पहल

गांडेय प्रखंड प्रमुख राजकुमार पाठक ने कहा कि बरमसिया टू पंचायत के मूल सचिवालय का निर्माण री-टेंडर की प्रक्रिया में फंसे होने की जानकारी मिली है. इस मामले को जिला परिषद और दिशा की बैठक में उठाया जायेगा. उन्होंने कहा कि मुखिया की पहल पर राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि से बने सामुदायिक भवन में पंचायत सचिवालय का संचालन किया जाना सराहनीय है. हालांकि, मूल पंचायत सचिवालय की मरम्मत कर उसे दोबारा क्रियाशील बनाने की दिशा में पहल की जायेगी, ताकि पंचायत के लोगों को इसका लाभ मिल सके.

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