संघर्ष ने गढ़ी कामयाबी की इबारत

Updated at :04 Sep 2017 11:20 AM
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संघर्ष ने गढ़ी कामयाबी की इबारत

गुड न्यूज. एसएचजी के सहयोग से महिलाएं संवार रहीं जीवन स्वयं सहायता समूह महिला जागृति के साथ सामाजिक चिंताओं और विकास के सवालों से जूझ कर कैसे समाज की उन्नति का माध्यम बन रहे हैं बेंगाबाद के मोतीलेदा की तीन महिलाएं इसकी मिसाल हैं. इन महिलाओं की कामयाबी इस बात का उदाहरण हैं कि एसएचजी […]

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गुड न्यूज. एसएचजी के सहयोग से महिलाएं संवार रहीं जीवन
स्वयं सहायता समूह महिला जागृति के साथ सामाजिक चिंताओं और विकास के सवालों से जूझ कर कैसे समाज की उन्नति का माध्यम बन रहे हैं बेंगाबाद के मोतीलेदा की तीन महिलाएं इसकी मिसाल हैं. इन महिलाओं की कामयाबी इस बात का उदाहरण हैं कि एसएचजी सामाजिक परिवर्तन का वाहक हैं. गंदगी और पिछड़ेपन के बीच से संघर्ष की बदौलत यहां की तीन महिलाओं ने कामयाबी की यह इबारत गढ़ी हैं.
बच्चों के मल व जल जमाव के कारण गंदगी के ढेर से उठनेवाली बदबू के बीच कोई शराब के नशे में तो कोई जुआ में मस्त रहता था. बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत मोतीलेदा के इसी मंझलाटोल की महिलाओंं का समूह अब हिसाब-किताब, जोड़-घटाव करता दिखता है. इनके बीच एक उत्प्रेरक भी है जो सभी का हिसाब किताब जोड़़ती है. सबको साथ चलने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
एसएचजी ने बदल दी किस्मत
मंझलाटोल की अनीता देवी कल तक गरीबी के दलदल में रहकर किस्मत को कोसती थी, पर आज वह सभी की प्रेरक हैं. पति की मजदूरी से मासिक कुल चार-पांच हजार रु कमाने वाले इस परिवार के पास कच्ची मिट्टी के घर के अलावा कुछ नहीं था.
2014 में एसएचजी से जुड़ने के बाद उसके जीवन में बुनियादी बदलाव आ गये. अब तक 90 हजार रु का ऋण लेकर शटरिंग के लिए पटरा खरीदा. प्रतिदिन कार्य के लिए 450 रु स्वयं कमा रही हैं. अब वह गांवों में शटरिंग का काम करती है तथा दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रही है. 10 अगस्त 2014 को स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और साप्ताहिक 10 रु जमा करती गयी. लगातार बैठक में जाने से सोच बदली.
बैंक का सहयोग मिला और आज प्रति माह 20 हजार रु कमा रही है. आठवीं तक की पढ़ाई की थी. समूह में जुड़ने के बाद मैट्रिक भी कर ली. अब गावों में समूह बना रही है. लोगों को गरीबी से संघर्ष के लिए प्रेरित कर रही है. बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हुए डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के सपने बुन रही हैं. आइआरपी बन चुकी है.
पिंकी कर रही है डेकोरेशन का काम
मंझलाटोल की ही पिंकी देवी भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर अपना भविष्य गढ़ रही है. पति राजेश तांती काम की तलाश में हमेशा बाहर चला जाता था. जब तक वह पैसे नहीं भेजते थे तब तक तंगी झेलनी पड़ती थी.
सूदखोरों के चुंगल तक में फंसना पड़ा. समूह से जुड़ने के बाद समूह से आसान दर पर ऋण मिल जाता है. अब तक वह 10 हजार रु से कम 32 बार ऋण ले चुकी है. समय पर पैसे भी चुकाती जा रही हैं. अब तक लिये गये ऋण में से फिलहाल बस 40 हजार रु बकाया रह गया है. इस राशि से उन्होंने डेकोरेशन का काम शुरू किया है. इससे प्रतिमाह तीन-चार हजार रु की आय हो जाती है. अब संघर्ष थोड़ा आसान हो गया है. पांच बच्चों को लेकर परिवार में कुल आठ सदस्य हैं. अब पति की कमाई से परिवार की आय बढ़ जाती है.
श्रृंगार की दुकान से बढ़ी परिवार की आय
मोतीलेदा के ही मंझलाटोल टोला की रूपा देवी पति टिंकू पंडित के जीवन में इस एसएचजी ने बड़ा बदलाव ला दिया है. अब सागर स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर 40 हजार रु के ऋण से श्रृंगार का व्यवसाय करती है. पति शहर में मजदूरी करते हैं. इससे 250 रु प्रतिदिन मिल जाते हैं. मजदूरी अब बढी है, लेकिन परिवार के खर्चे के लिए यह काफी कम है.
वह सिलाई भी सीख चुकी हैं. परिवार में आय का स्रोत बढ़ाने के लिए छोटा ऋण लेकर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी. दुकान से प्रतिमाह वह करीब चार हजार रु की आय बढ़ा चुकी हैं. परिवार में कुल पांच सदस्य हैं उनके तीन बच्चे हैं. सभी बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं. स्वच्छता को लेकर सभी को जागरूक करती है. लोगों पर शौचालय जाने के लिए दबाव बनाती है. इससे बीमारी भी कम हुई है. अब काफी बदलाव आया है.
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