कुपोषण से मुक्ति सबकी जिम्मेवारी

Updated at :02 Sep 2017 12:52 PM
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कुपोषण से मुक्ति सबकी जिम्मेवारी

गिरिडीह : कुपोषित बच्चों को ममता की छांव दें और शिशु मृत्यु दर को कम करें. इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाएं और पोषण सखी सार्थक पहल करें. बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण कुपोषण है. समय से पहले बच्चों का जन्म लेना, जन्म के समय उसका वजन कम होना, खून की कमी, गर्भ धारण के […]

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गिरिडीह : कुपोषित बच्चों को ममता की छांव दें और शिशु मृत्यु दर को कम करें. इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाएं और पोषण सखी सार्थक पहल करें.

बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण कुपोषण है. समय से पहले बच्चों का जन्म लेना, जन्म के समय उसका वजन कम होना, खून की कमी, गर्भ धारण के बाद गर्भवती महिला को उचित पोषाहार नहीं मिलना कुपोषण का बड़ा कारण है. उक्त बातें गिरिडीह विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी ने कही. वह शुक्रवार को गिरिडीह नगर भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय पोषण सप्ताह कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.कहा कि निजी विद्यालयों की तरह आंगनबाड़ी केंद्रों को भी प्ले स्कूल के रूप में विकसित करें.बच्चों के खेलने के लिए उपकरण दें.

इसके लिए विधान सभा में बात रखी जाएगी. सेविकाएं जितनी मेहनत कर रही हैं,उसके हिसाब से उनका मानदेय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. जिला परिषद अध्यक्ष राकेश महतो ने कहा कि बच्चे कुपोषण का शिकार होकर काल के गाल में न समायें इसपर विशेष ध्यान दें. नप अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा कि गिरिडीह को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए सबको आगे आना होगा.

गिरिडीह के 43 प्रतिशत बच्चे कुपोषित : डीडीसी किरण कुमारी पासी ने कहा कि गिरिडीह जिले के 43 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं. आधी से ज्यादा महिलाएं एनिमिक(रक्त की कमी) हैं. कुपोषण चक्र से बच्चों को बाहर करने के लिए दुलार कार्यक्रम चल रहा है. सामाजिक व्यवस्था के कारण महिलाओं में कुपोषण होता है, जिससे बच्चे भी कुपोषित हो रहे हैं.गर्भधारण के समय पौष्टिक व पर्याप्त भोजन की आवश्यकता होती है. बाल विवाह पर भी रोक लगाने की दिशा में पहल करें, ताकि जन्म लेने वाले बच्चे कुपोषित नहीं हो.

दुलार कार्यक्रम में मिले 262 बच्चे अति गंभीर कुपोषित : पम्मी

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी पम्मी सिन्हा ने कहा कि गिरिडीह दो जुलाई 2017 को गिरिडीह में शुरू किए दुलार कार्यक्रम में 262 बच्चे अति गंभीर कुपोषित पाये गये हैं. ऐसे बच्चों की पहचान के लिए जिले भर में 7000 एनयूएसइ टेप आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे गये हैं. सभी केंद्रों पर वजन मशीन दी गयी है. कम उम्र में शादी होने और बच्चे के जन्म लेने से उनमें कुपोषण हो जाता है. कहा कई लोग बच्चों का टीकाकरण भी नहीं करवाते हैं, जिससे बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और उनकी मृत्यु तक हो जाती है .

बताया कि नगर भवन से शुरू हुआ यह पोषण सप्ताह जिले भर में एक से सात सितंबर तक चलाया जाएगा. इसके लिए तीन पोषण जागरूकता रथ भी निकाला गया है. यह जागरूकता रथ गांव-गांव में जाकर महिलाओं को जागरूक कर उन्हें उचित पोषाहार का सेवन करने की जानकारी नुक्कड़ नाटक के माध्यम से देगा.

जागरूकता रथ रवाना, लोगों को देगा जानकारी

समारोह के बाद जागो फाडंडेशन के संयुक्त प्रयास से तीन पोषण जागरूकता रथ का हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. समारोह को सांसद प्रतिनिधि जयमंगल राय, यदुनंदन पाठक, राजकुमार राज ने भी संबोधित किया. संचालन सीडीपीओ अल्का रानी किया. मौके पर गांडेय प्रमुख मनीषा पांडेय, गिरिडीह प्रमुख पूनम देवी, जिप सदस्य किरण वर्मा, प्रशिक्षु आइएएस मेघा भारद्वाज, डॉ सिद्धार्थ सन्याल, पीरटांड उपप्रमुख सिकंदर हेंब्रम, सीडीपीओ बिमला कुमारी, महिला पर्यवेक्षिका रत्ना मित्रा, किरण राज, सुचिता वीणा सोरेन, इंदूबाला, कंचन बाला, निरूपा कुमारी, किरण कुमारी किरण, रश्मि सिन्हा, अमिता राज, किरण, कुमारी ममता, जागो फाउंडेशन के बैद्यनाथ, सरोजित कुमार समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

बच्चों की मुंहजूठी व गर्भवती की गोद भराई

जिलेभर से पहुंची आगंनबाड़ी सेविकाओं, पोषण सखियों, महिला पर्यवेक्षिकाओं और सीडीपीओ की मौजूदगी में इस समारोह में छह माह पूरे कर चुके 10 बच्चों की मुंहजूठी कराया गया. 10 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गयी. उन्हें पाैष्टिक आहार और उपहार दिये गये.वहीं शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र की बच्चियों ने नृत्य प्रस्तुत किया,जबकि कला संगम के कलाकारों ने जहां नुक्क्ड़ नाटक प्रस्तुत किया. वहीं नेत्रहीन विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया.

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