करीब 4 दशक पहले रंका पहुंचे थे नाना पाटेकर, आज भी राजमहल में जुड़ी हैं उनकी यादें

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नाना पाटेकर से जुड़ी रंका राजमहल की अनमोल यादें. करीब 4 दशक पहले 'आज का रॉबिनहुड' की शूटिंग के लिए यहां आए थे, जिसने स्थानीय लोगों को एक फिल्मी अनुभव दिया.

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नंद कुमार की रिपोर्ट

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Nana Patekar Death: नाना पाटेकर का नाम आते ही उनकी दमदार आवाज, संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह उतर जाने वाला अभिनय जेहन में उभरता है. 8 अक्टूबर को उनके निधन की खबर से देशभर में उनके प्रशंसक शोक में हैं. लेकिन गढ़वा के रंका के लिए नाना पाटेकर की याद कुछ अलग है. यहां उनकी स्मृति किसी फिल्मी किस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि रंका राजमहल की उन दीवारों से भी जुड़ी है, जहां करीब चार दशक पहले वह खुद पहुंचे थे.

1988 में रंका राजमहल में हुई थी फिल्म की शूटिंग

वर्ष 1988 में रिलीज हुई निर्देशक तपन सिन्हा की फिल्म ‘आज का रॉबिनहुड’ की शूटिंग रंका राजमहल में हुई थी. फिल्म में नाना पाटेकर के अलावा उत्पल दत्त, रबी घोष, अनिल चटर्जी और सतीश शाह जैसे कलाकार भी थे. शूटिंग के दौरान रंका अचानक फिल्मी गतिविधियों का केंद्र बन गया था.

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एमएल विश्वास के साथ पहुंचे थे रंका

रंका राज से जुड़े दिलीप कुमार सिंह बताते हैं कि नाना पाटेकर मेदिनीनगर (तब डाल्टनगंज) निवासी एमएल विश्वास के साथ रंका पहुंचे थे. उस समय एमएल विश्वास शहर के चर्चित और संपन्न लोगों में माने जाते थे. उनका संपर्क फिल्मी दुनिया से भी था. महंगी गाड़ियों का शौक, घर की साज-सज्जा और रहन-सहन का अंदाज उस दौर में उन्हें अलग पहचान देता था. दिलीप कुमार सिंह के अनुसार, नाना पाटेकर करीब दो दिनों तक रंका में रहे थे. इस दौरान उन्होंने रंका राजमहल के अतिथि कक्ष में निवास किया था. नाना पाटेकर के रंका पहुंचने की खबर आसपास के इलाकों में तेजी से फैल गयी थी. उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग राजमहल के आसपास जुट गये थे.

पहली बार करीब से दिखा था फिल्मी सितारा

उस दौर में आज की तरह मोबाइल फोन और इंटरनेट नहीं था. बड़े पर्दे के कलाकारों को सामने से देखना स्थानीय लोगों के लिए अपने आप में बड़ी घटना होती थी. यही वजह थी कि नाना पाटेकर के रंका पहुंचने की खबर सुनते ही लोगों की भीड़ जुट गयी थी. स्थानीय लोगों को पहली बार किसी बड़े फिल्म कलाकार को इतने करीब से देखने का मौका मिला था. दिलीप कुमार सिंह कहते हैं कि उस समय की वह हलचल आज भी रंका के लोगों की स्मृतियों में बसी हुई है. राजमहल में फिल्म की शूटिंग और फिल्मी कलाकारों की मौजूदगी ने पूरे इलाके को एक अलग पहचान दी थी.

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राजमहल की दीवारों में आज भी दर्ज है वह दौर

आज रंका काफी बदल चुका है और राजमहल से जुड़ा वह फिल्मी दौर भी इतिहास का हिस्सा बन चुका है. लेकिन राजमहल की पुरानी इमारत और उसके अतिथि कक्ष से जुड़ी नाना पाटेकर की स्मृति आज भी स्थानीय लोगों के लिए खास है.‘आज का रॉबिनहुड’ को जब भी देखा जायेगा, रंका के लोगों के लिए वह केवल एक पुरानी फिल्म नहीं होगी. उसके साथ रंका राजमहल, शूटिंग का वह दौर और करीब दो दिनों तक यहां ठहरे नाना पाटेकर की याद भी जुड़ी रहेगी.

किसी जगह का इतिहास केवल किताबों में दर्ज नहीं होता. कभी-कभी सिनेमा भी उसे समय के पार पहुंचा देता है. ‘आज का रॉबिनहुड’ ने रंका राजमहल को बड़े पर्दे पर दर्ज किया और नाना पाटेकर की मौजूदगी ने इस कहानी को स्थानीय स्मृतियों में खास बना दिया. रंका राजमहल से जुड़ी नाना पाटेकर की यह स्मृति शायद लंबे समय तक जीवित रहेगी. राजमहल के ईंट-पत्थरों से जुड़ा वह दो दिनों का किस्सा स्थानीय लोगों की यादों में हमेशा बना रहेगा.

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