गढ़वा में नकली और मिलावटी कारोबार पर कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल, सप्लाई चेन तक कब पहुंचेगी जांच?

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गढ़वा में नकली और मिलावटी कारोबार पर हो रही कार्रवाइयों के बीच बड़ा सवाल. माल कहां से आता है, स्रोत क्या है, जांच कब इन पहलुओं तक पहुंचेगी. जानें पूरी रिपोर्ट.

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गढ़वा. गढ़वा में नकली, मिलावटी और अवैध कारोबार के खिलाफ पिछले एक साल में हुई कार्रवाइयों को घटनाक्रम के रूप में देखें, तो सामने आने वाले मामलों में एक समान पहलू नजर आता है. कई मामलों में बाहर से माल आने, जिले में उसे रखने और फिर बाजार तक पहुंचाने की आशंका की जांच हुई है. हालांकि, इन सभी मामलों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच एजेंसियों की ओर से नहीं की गयी है.

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यूपी और बिहार से मिठाई की खेप

अगस्त 2025 में तत्कालीन एसडीएम संजय कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में करीब 300 किलो सड़ी-गली और केमिकल युक्त मिठाइयां जब्त कर नष्ट करायी गयी थीं. उस समय यूपी और बिहार से मिठाई की खेप गढ़वा पहुंचने की बात सामने आयी थी.

1.15 लाख रुपये जुर्माना और दो कारखाने सील

करीब एक साल बाद भी खाद्य पदार्थों से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले सामने आये. 25 अगस्त से 12 सितंबर 2026 के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में 410 किलो खराब, संदिग्ध या गैर-अनुमोदित रंग वाली मिठाइयां नष्ट करायी गयीं. इस दौरान 1.15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और श्री बंशीधर नगर के दो मिठाई कारखानों को सील किया गया. कार्रवाई गढ़वा शहर के अलावा श्री बंशीधर नगर, रमकंडा, भंडरिया और विशुनपुरा तक पहुंची.

19 दिनों में 410 किलो संदिग्ध मिठाई नष्ट

25 अगस्त को गढ़वा शहर में छह से अधिक प्रतिष्ठानों की जांच के साथ अभियान शुरू हुआ. कहीं फ्रीजर में खराब मिठाई मिली, तो कहीं जलेबी में तय सीमा से अधिक कृत्रिम रंग के इस्तेमाल का मामला सामने आया. 27 अगस्त को श्री बंशीधर नगर में दो मिठाई कारखानों पर कार्रवाई की गयी. एक कारखाने से 120 किलो संदिग्ध रसगुल्ला और 10 किलो रंगयुक्त परवल मिठाई नष्ट करायी गयी, जबकि दूसरे कारखाने में 100 किलो संदिग्ध रसगुल्ला मिला. दोनों कारखानों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और उन्हें सील किया गया. इसके बाद रमकंडा में 22 किलो रंगयुक्त मिठाई, भंडरिया में करीब 50 किलो संदिग्ध मिठाई और विशुनपुरा में 100 किलो खराब रसगुल्ला नष्ट कराया गया. इससे स्पष्ट है कि खाद्य पदार्थों से जुड़ी शिकायतें केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहीं.

मिठाई से आगे सिगरेट तक पहुंचा मामला

23 सितंबर को भंडरिया में हुई कार्रवाई ने मामले को खाद्य कारोबार से आगे बढ़ा दिया. कंपनी की शिकायत पर एक गोदाम की जांच के दौरान 11,800 सिगरेट और पैकिंग सामग्री जब्त की गयी. प्राथमिकी के अनुसार, कंपनी के ब्रांड और पैकेजिंग से मिलते-जुलते नाम के कथित इस्तेमाल की जांच की जा रही है. गोदाम से जुड़ा व्यापारी छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज का बताया गया है, जबकि गोदाम भंडरिया थाना क्षेत्र में था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिगरेट कहां से आयी, पैकिंग कहां हुई और इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी. जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.

सीमा केवल भौगोलिक तथ्य नहीं

गढ़वा की भौगोलिक स्थिति इसे इस तरह के मामलों में अलग चुनौती देती है. जिले की सीमाएं बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़ी हैं. ऐसे में बाहर से आने वाले संदिग्ध सामान की निगरानी केवल एक विभाग के स्तर पर करना चुनौतीपूर्ण है. पिछले साल मिठाई की खेप के मामले में बाहर से माल आने की बात सामने आयी थी. इस साल विभिन्न प्रखंडों में खाद्य पदार्थों से जुड़ी गड़बड़ियां मिलीं. इसके बाद भंडरिया में छत्तीसगढ़ से जुड़े व्यापारी के गोदाम से कथित नकली सिगरेट की बरामदगी हुई. इन मामलों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह जरूर है कि संदिग्ध सामान की सप्लाई चेन का स्रोत कहां है.

कार्रवाई के अगले चरण में सप्लाई चेन की जांच अहम

मिठाई नष्ट करना, प्रतिष्ठान सील करना या संदिग्ध सिगरेट जब्त करना तत्काल कार्रवाई का हिस्सा है. इसके बाद जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि माल कहां से आया, किसने भेजा, किस माध्यम से जिले में पहुंचा, किस गोदाम में रखा गया और किन दुकानों तक उसकी आपूर्ति हुई. थोक विक्रेताओं, वितरकों, गोदामों और परिवहन मार्गों से जुड़े रिकॉर्ड को अलग-अलग विभागों की जानकारी से मिलाने पर संदिग्ध सामान की आपूर्ति श्रृंखला को समझने में मदद मिल सकती है.

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वितरण नेटवर्क की जांच जरूरी

नशे से जुड़े मामलों में भी यही चुनौती सामने आती है. प्रतिबंधित सिरप या अन्य मादक पदार्थ मिलने पर केवल बिक्री स्थल तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय उसके स्रोत और वितरण नेटवर्क की जांच करना जरूरी है. इसी तरह अवैध शराब के मामलों में जब्ती और विनष्टीकरण के साथ आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचना भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है.

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नशामुक्त गढ़वा के लक्ष्य

उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने नशे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान, दवा दुकानों की नियमित जांच और पुलिस-प्रशासन के समन्वय से कार्रवाई पर जोर दिया है. मादक पदार्थों की तस्करी, उत्पादन, परिवहन और भंडारण पर निगरानी के लिए अनुमंडल स्तर के अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग का निर्देश भी दिया गया है.

चुनौती केवल नशे से जुड़े कारोबार तक सीमित नहीं

हालांकि, पिछले एक साल में सामने आये मामलों को देखें तो गढ़वा के सामने चुनौती केवल नशे से जुड़े कारोबार तक सीमित नहीं है. खाद्य मिलावट, संदिग्ध ब्रांडेड उत्पाद और अवैध शराब व नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई हुई है. इन घटनाओं से एक व्यापक प्रशासनिक चुनौती सामने आती है- सीमा से जिले के बाजार तक आने वाले संदिग्ध सामान की निगरानी.

फैक्ट फाइल

अगस्त 2025: करीब 300 किलो संदिग्ध/केमिकलयुक्त मिठाई जब्त कर नष्ट करायी गयी. बाहर से आने वाली मिठाई की खेप का मामला सामने आया.

25 अगस्त–12 सितंबर 2026: 410 किलो खराब, संदिग्ध या गैर-अनुमोदित रंग वाली मिठाई नष्ट करायी गयी. 1.15 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया और श्री बंशीधर नगर के दो कारखाने सील किये गये.

23 सितंबर 2026: भंडरिया में 11,800 कथित नकली सिगरेट और पैकिंग सामग्री जब्त की गयी. मामले में अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच चल रही है.

अब बड़ा सवाल

क्या संदिग्ध सामान के खिलाफ कार्रवाई जब्ती और विनष्टीकरण से आगे बढ़कर उसकी पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचेगी?

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