गढ़वा : भवनाथपुर में स्वर्वेद संदेश यात्रा का भव्य स्वागत, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मंचासिन महाराज | Prabhat Khabar Network
भवनाथपुर में स्वर्वेद संदेश यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। संत विज्ञान देव जी महाराज ने विहंगम योग और अध्यात्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
भवनाथपुर (गढ़वा). भवनाथपुर में बुधवार को कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली जा रही 'स्वर्वेद संदेश यात्रा' का भव्य स्वागत किया गया. बोकारो स्टील माइंस महाविद्यालय परिसर, टाउनशिप भवनाथपुर में आयोजित विशाल आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.
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भक्तों और अनुयायियों में खासा उत्साह
विहंगम योग संत-समाज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के पहुंचने पर भक्तों और अनुयायियों में खासा उत्साह देखने को मिला. महाराज जी के स्वागत में शिवपूजन पेट्रोल पंप से शोभायात्रा निकाली गयी. ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु 'अ' अंकित सफेद ध्वज लेकर जयघोष करते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे.
ध्वजारोहण और राष्ट्रगान
मुख्य कार्यक्रम स्थल पर संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने 'अ' अंकित ध्वज फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके बाद सामूहिक राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया गया. आध्यात्मिक कार्यक्रम में देशभक्ति का भी रंग देखने को मिला. राष्ट्रगान और आध्यात्मिक संदेश के संगम ने लोगों में देशप्रेम और राष्ट्रगौरव की भावना पैदा की.
विहंगम योग और ध्यान
कार्यक्रम में संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने 'स्वर्वेद कथामृत' के माध्यम से लोगों को अध्यात्म और साधना का संदेश दिया. उन्होंने विहंगम योग की साधना और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ध्यान और साधना से मन को शांत और एकाग्र करने में मदद मिलती है. उन्होंने विहंगम योग ध्यान से जुड़े शोध का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस साधना से मस्तिष्क की नकारात्मक गतिविधियों में कमी और सकारात्मक मानसिक अवस्था में वृद्धि होती है.
अध्यात्म का महत्व
संत प्रवर ने मानव जीवन और मन को समझाने के लिए रथ का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि मानव शरीर रथ के समान है, जबकि इंद्रियां घोड़े, मन लगाम, बुद्धि सारथी और आत्मा रथी है. उन्होंने कहा कि यदि मन पर नियंत्रण नहीं रहा, तो इंद्रियां मनुष्य को गलत दिशा में ले जा सकती हैं. आज मनुष्य के दुखों का एक बड़ा कारण उसका अनियंत्रित मन है. अध्यात्म मन को नियंत्रित करने और जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है.
जीवन संघर्षों में उलझा
महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भी कई तरह के जीवन संघर्षों में उलझा हुआ है. जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान देकर उसका भ्रम दूर किया था, उसी तरह आज मनुष्य को भी अध्यात्म की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अध्यात्म किसी तरह का बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि मानव जीवन की आवश्यकता है. सेवा, सत्संग और साधना के माध्यम से व्यक्ति को अपने अंतःकरण को शुद्ध करने का प्रयास करना चाहिए.
भजनों और स्वर्वेद के दोहों से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों और स्वर्वेद के दोहों से पूरा परिसर गूंजता रहा. हजारों की संख्या में श्रद्धालु, प्रबुद्ध नागरिक और महिलाएं कार्यक्रम में शामिल हुईं. कार्यक्रम में बरडीहा प्रखंड के बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह, विहंगम योग संत समाज झारखंड के प्रदेश महामंत्री ललित सिंह, प्रदेश अन्नमंत्री उपेंद्रनाथ मिश्रा, जिला संयोजक सुरेंद्र विश्वकर्मा, प्रो. वीरेंद्र विश्वकर्मा, विवेक प्रसाद गुप्ता समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम को कार्यकर्ताओं ने निभायी महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला संयोजक सुरेंद्र विश्वकर्मा, सह संयोजक जवाहर दुबे, जिला युवा प्रभारी प्रदीप तिवारी, प्रखंड प्रभारी इंद्रजीत गुप्ता, सिंदुरिया आश्रम व्यवस्थापक महेंद्र गुप्ता, अमित यादव, राजमोहन यादव, उज्ज्वल श्रीवास्तव, दयानंद प्रजापति, दयाशंकर विश्वकर्मा, विजय साह और रणजीत विश्वकर्मा समेत गढ़वा जिला संत समाज के कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
वाराणसी में होने वाले आयोजन का दिया निमंत्रण
कार्यक्रम के अंत में संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने लोगों को आगामी 14 और 15 दिसंबर को वाराणसी के उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम में आयोजित होने वाले 103वें वार्षिकोत्सव और 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ में सपरिवार शामिल होने का निमंत्रण दिया.


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