तुलसीदास ने सबसे बड़े ग्रंथ की रचना की : अलखनाथ

Published at :11 Aug 2016 5:26 AM (IST)
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तुलसीदास ने सबसे बड़े ग्रंथ की रचना की : अलखनाथ

आरकेवीएस संस्थान में तुलसीदास जयंती समारोह का आयोजन गढ़वा : स्थानीय आरकेवीएस संस्थान में बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती का आयोजन किया गया़ समारोह की शुरुआत संस्थान के निदेशक अलखनाथ पांडेय एवं सांसद प्रतिनिधि संजय ठाकुर ने दीप जलाकर किया़ इस अवसर पर श्री पांडेय ने कहा कि तुलसीदास आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक एवं सामाजिक […]

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आरकेवीएस संस्थान में तुलसीदास जयंती समारोह का आयोजन
गढ़वा : स्थानीय आरकेवीएस संस्थान में बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती का आयोजन किया गया़ समारोह की शुरुआत संस्थान के निदेशक अलखनाथ पांडेय एवं सांसद प्रतिनिधि संजय ठाकुर ने दीप जलाकर किया़ इस अवसर पर श्री पांडेय ने कहा कि तुलसीदास आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक एवं सामाजिक दुख-दर्द को झेलने के बावजूद कभी भी अपने मन में नकारात्मक सोच नहीं रखे़
हमेशा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते रहे़ तुलसीदास ऐसे लेखक थे, जिन्होंने संसार के सबसे बड़े ग्रंथ रामायण की रचना की़ उस रामायण से पूरे भारतवर्ष में लोगों के बीच सकारात्मक सोच उत्पन्न किया़ मर्यादा पुरुषोतम राम की छवि को उन्होंने रामायण में काफी पारदर्शिता व स्वच्छता के साथ चरित्रित किया गया है़ इसका कोई मिसाल नहीं है़ श्री पांडेय ने कहा कि इंसान को किसी भी परिस्थिति में सही दिशा देने में तुलसीदास रचित रामायण सार्थक साबित हुआ है़
उन्होंने कहा कि तुलसीदास किसी बड़े कॉलेज में नहीं पढ़े और न ही उनके पास कोई बड़ी डिग्री थी, लेकिन उन्होंने रामायण की रचना कर यह सिद्ध कर दिया गया कि सकारात्मक सोच से इंसान कुछ भी कर सकता है़ उन्हें महामानव अथवा अवतारी पुरुष कहा जाये, तो कम नहीं होगा़
तुलसीदास द्वारा रचित रामायण मर्यादा पुरूषोतम राम के पदचिन्हों पर चलने के लिये प्रेरित करता है़ सांसद प्रतिनिधि संजय ठाकुर ने कहा कि तुलसीदास ने रामायण के माध्यम से समाज को जागृत करने एवं राम के आदर्शों पर चलने के लिये प्रेरित किया है़ तुलसीदास की जितनी भी प्रशंसा की जाये, वह कम होगी़ कॉलेज के प्राचार्य एसएलके दास ने कहा कि तुलसीदास ने आदर्शवाद के चरम उत्कर्ष का चित्रण रामायाण में की है़ यह अदभुत व अलौलिक रचना है़ कॉलेज की छात्रा मनीषा ने कहा कि तुलसीदास जन्म से ही विलक्षण व कुशाग्र प्रतिभा के धनी थे़ उन्होंने 12 महीने में जन्म लिया था़ उनके जन्म के बाद परिजनों में यह भय सताने लगा कि नौ महीने की जगह 12 महीने में जन्म लेनेवाला बालक अशुभ हो सकता है़ लेकिन तुलसीदास की ख्याति आज भी जन-जन में व्याप्त है़ कार्यक्रम कार्यक्रम को प्रो आनंद पाठक, प्रदीप कुमार, सतीश तिवारी ने भी संबोधित किया़ कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र तिवारी एवं धन्यवादज्ञापन एसएलके दास ने किया़
गढ़वा : स्थानीय सूरत पांडेय डिग्री कॉलेज में बुधवार केा तुसलीदास की जयंती मनायी गयी़ इस मौके पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें शामिल विद्यार्थियों को कॉलेज द्वारा पुरस्कृत किया गया़ तुलसीदास जयंती के अवसर पर तुलसी साहित्य की प्रसांगिकता विषय पर विचार गोष्ठी किया गया़
इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य प्रोर रवींद्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि विश्व में हमारा देश अध्यात्म का धरोहर रहा है़ वर्तमान जीवन में तुलसी साहित्य चरितार्थ हो रहा है़ उन्होंने कहा कि गोस्वामी ने अपने कृति से किसी धर्म विशेष की नहीं, बल्कि मानव धर्म की बात कही थी़ उन्होंने मानव समाज के उत्थान के लिये लोक मर्यादा की आवश्यकता को महसूस किया तथा रामचरितमानस में राम को मार्यादा पुरुषोतम के रूप में चित्रण किया़ प्रो किशोरी मोहन मिश्रा ने कहा कि उनके द्वारा रचित ग्रंथ में यह स्पष्ट है कि किस अवसर पर मानव को कैसा आचरण करना चाहिए.
सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समन्वयक प्रो कमलेश सिन्हा ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी़ वहीं प्रो उमेश सहाय ने कहा कि रामचरितमानस पढ़ने का नहीं बल्कि जीवन में उतारने का शास्त्र है़ कार्यक्रम का संचालन प्रो विवेकानंद उपाध्याय ने किया़ इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी में प्रीति बाला पांडेय को प्रथम, स्वीकृति कुमारी को द्वितीय तथा अजंली पाठक को तृतीय पुरस्कार दिया गया़ धन्यवाद ज्ञापन प्रो सत्यदेव पांडेय ने किया़ इस अवसर पर प्रो अर्जुन प्रसाद, प्रो दिवाकर चतुर्वेदी, प्रो विरेंद्र पांडेय, प्रो अखिलेश पाठक, डॉ सुधा पांडेय, प्रो किरण कुमारी, डॉ चंद कुमार, बिगावन तिवारी, सुधीर पाठक आदि उपस्थित थे़
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