मस्तष्कि ज्वर से दो बच्चियों की मौत

Published at :10 Dec 2015 6:25 PM (IST)
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मस्तष्कि ज्वर से दो बच्चियों की मौत

मस्तिष्क ज्वर से दो बच्चियों की मौत दोनों ही आदिम जनजाति की हैं.दो दिन पूर्व कैलान गांव के बंगलवाडीह टोला के सरिता कुमारी व सुषमा कुमारी की हुई है मौत10जीडब्ल्यूपीएच4-जानकारी देते मृतक के परिजन भवनाथपुर(गढ़वा). कैलान पंचायत के आदिम जनजाति बहुल बंगलवाडीह टोला में दो दिन पूर्व मस्तिष्क ज्वर से एक ही परिवार के दो […]

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मस्तिष्क ज्वर से दो बच्चियों की मौत दोनों ही आदिम जनजाति की हैं.दो दिन पूर्व कैलान गांव के बंगलवाडीह टोला के सरिता कुमारी व सुषमा कुमारी की हुई है मौत10जीडब्ल्यूपीएच4-जानकारी देते मृतक के परिजन भवनाथपुर(गढ़वा). कैलान पंचायत के आदिम जनजाति बहुल बंगलवाडीह टोला में दो दिन पूर्व मस्तिष्क ज्वर से एक ही परिवार के दो लड़कियों की मौत हो गयी. इनमें सुरेंद्र कोरवा की 17 वर्षीय पुत्री सरिता कुमारी तथा शंकर कोरवा की 12 वर्षीय पुत्री सुषमा कुमारी शामिल है. जबकि उसी घर के कबूतरी कुंवर, रीता देवी, सरिता देवी बुखार से पीड़ित हैं. स्वास्थ्य विभाग को सूचना होने के बावजूद अभी तक वहां चिकित्सकों का टीम नहीं पहुंच सका है. पीड़ित मरीज बुधवार को भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गये थे, जहां डॉ आशुतोष कुमार सिंह द्वारा सरिता देवी का इलाज नहीं किया गया. कहा गया कि घर जाओ, वहीं इलाज होगा. जबकि डॉ आशुतोष ने कहा कि कुछ मरीज आये थे,सबका इलाज किये हैं. जबकि सरिता कुमारी व सुषमा कुमारी की मौत गरीबी के कारण समुचित इलाज नहीं होने के कारण हुई है. बताया गया कि दोनों लड़कियों को एक सप्ताह से बुखार था. इलाज कराने के लिए इन परिवारों को बकरी बेचना पड़ा, लेकिन दोनों नहीं बच सकी. लकड़ी बेच कर करते हैं गुजाराआदिम जनजाति बहुल इस इलाके लोग जंगली से लकड़ी व दातून बेच कर अपना जीविकोपार्जन चलाते हैं. सरकार द्वारा मिलनेवाली सुविधाएं इन्हें नहीं मिलती है. गरीबी व अभाव के कारण वे न तो बच्चों को बेहतर शिक्षा करा पाते हैं और न ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा पाते हैं. इस गांव के शंकर, सुरेंद्र, मालती आदि ने बताया कि जिस दिन उनकी लकड़ी नहीं बिकती, उस दिन उनके घर में चूल्हा नहीं जलता. ऐसे में इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं.

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