छात्रा का पैर टूटा, तीन दिन बाद बिना इलाज कराये घर भेजा
Updated at : 14 Jul 2017 9:28 AM (IST)
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तीन दिन तक दर्द से कराहती रही संगीता किसी तरह 10 किमी चलकर पहुंची घर कस्तूरबा विद्यालय खरौंधी में दसवीं कक्षा की छात्रा है संगीता खरौंधी : खरौंधी प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की दसवीं कक्षा की छात्रा संगीता कुमारी का पैर टूट जाने के बाद भी इलाज नहीं कराया गया. संगीता दर्द […]
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तीन दिन तक दर्द से कराहती रही संगीता
किसी तरह 10 किमी चलकर पहुंची घर
कस्तूरबा विद्यालय खरौंधी में दसवीं कक्षा की छात्रा है संगीता
खरौंधी : खरौंधी प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की दसवीं कक्षा की छात्रा संगीता कुमारी का पैर टूट जाने के बाद भी इलाज नहीं कराया गया. संगीता दर्द से कराहती रही, फिर भी न ही उसे इलाज के लिए कहीं भी भेजा गया और न ही छुट्टी दी गई. संगीता के मुताबिक यह घटना विगत 10 जुलाई की है. संगीता छात्रावास के बाहर कपड़ा लेने के लिए कमरा के बाहर निकली थी, इसी क्रम में टाइल्स पर संगीता का पैर फिसल जाने से उसके पैर की हड्डी टूट गयी. पैर टूट जाने के कारण पैर फूल गया.
संगीता ने कहा कि इसके बाद संगीता तीन दिनों तक दर्द से रोती-बिलखती रही, परन्तु उसका इलाज नहीं कराया गया और न ही उसके घरवालों को खबर की गयी या उसे छुट्टी दी गई. इसके बाद 12 जुलाई को घरवालों को सूचित किये बिना ही छुट्टी दे दी गयी. संगीत ने बताया कि छुट्टी मिलने पर वह घर आने में असमर्थ होने के कारण विद्यालय के बाहर बैठ कर रोने लगी. उसे रोता देख विद्यालय के सुरक्षाकर्मी ने मुख्य पथ तक बाइक से उसे छोड़ दिया. इसके बाद वह किसी तरह से 10 किलोमीटर दूर अपने घर मेलवान गांव पहुंची.
संगीता ने बताया कि पैर टूटने के बाद मैडम (प्रभारी वार्डेन) से जब वह इलाज के लिए कही तो उन्होंने कहा कि पैर की सेकाई कर लो, ठीक हो जायेगा. दो दिनों तक पैर में हल्दी-चूना लगा रखा, लेकिन फिर भी दर्द नहीं गया. उसने बताया कि लक्ष्मी मैडम गढ़वा 10 जुलाई की सुबह में ही चली गयी थी, जबकि सबीना मैम 11 जुलाई को घर चली गयी थी.
संगीता ने कहा कि वे लोग जब-जब विद्यालय की कमियों की शिकायत पदाधिकारी से करते हैं, तो पदाधिकारी के जाने के बाद वार्डेन मैडम अपने आफिस में बुलाकर उनलोगों को डंटती हैं. विद्यालय से नाम काटकर भगा देने की धमकी देती है. इधर संगीता कुमारी की मां सुनीता देवी ने बताया कि मजबूरी में पढ़ाई के लिए कस्तूरबा में भेजे हैं. वे लोग किसी प्रकार मेहनत मजदूरी करके खाने-पीने की व्यवस्था करते हैं, फिर इसका इलाज कैसे करायेंगे, यह परेशानी है. उन्होंने कहा कि कूपा और मेलवान गांव की लगभग 15 लड़कियां पढ़ती हैं. इस घटना से सभी के माता-पिता में आक्रोश देखा जा रहा है.
इस प्रकार की कोई घटना नहीं है : वार्डन : वार्डन लक्ष्मी देवी ने कहा कि 11 जुलाई की सुबह ट्रेनिंग में गढ़वा आयी हूं. इस प्रकार की कोई घटना नहीं हुई है. उन्होंने एक प्रश्न के उतर में कहा कि वे किसी छात्रा को डराती-धमकाती नहीं हैं. छात्रा का सभी आरोप गलत है.
उचित इलाज की व्यवस्था होगी : बीइइओ : प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कौशल किशोर चौबे ने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. वे उक्त छात्रा से मिलने उसके घर जायेंगे. साथ ही उसके उचित इलाज की व्यवस्था की जायेगी.
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