जल-जंगल व जमीन बचाने के लिए आंदोलन रहेगा जारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Jul 2017 11:56 AM (IST)
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आजसू जिला कमेटी के तत्वावधान में हूल दिवस मना गढ़वा : आजसू पार्टी जिला कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को हूल दिवस मनाया गया़ इस अवसर पर आजसू नेताओं ने अमर शहीद सिद्धू-कान्हू व चांद -भैरव की तसवीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की़ कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित पार्टी के केंद्रीय […]
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आजसू जिला कमेटी के तत्वावधान में हूल दिवस मना
गढ़वा : आजसू पार्टी जिला कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को हूल दिवस मनाया गया़ इस अवसर पर आजसू नेताओं ने अमर शहीद सिद्धू-कान्हू व चांद -भैरव की तसवीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की़ कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित पार्टी के केंद्रीय सचिव गुप्तेश्वर ठाकुर ने अपना उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि संथाल परगना में हूल आंदोलन के कारण अंग्रेजों को भारी क्षति उठानी पड़ी थी़ इस लड़ाई का नेतृत्व वीर योद्धा सिद्धू-कान्हू कर रहे थे़ उन्होंने कहा कि 30 जून 1855 को साहेबगंज जिले के भगनाडीह गांव से यह विद्रोह शुरू किया था़ इस आंदोलन में भगनाडीह के ग्राम प्रधान चुनका मुर्मू के चारो पूत्र सिद्धु-कान्हू व चांद- भैरव के साथ काफी लोगों ने अपना योगदान दिया़ इस लड़ाई को मुक्ति आंदोलन का दर्जा भी दिया गया़ क्योंकि इसमें समाज के हर शोषित वग के लोग सिद्धु-कान्हू के साथ कंधा से कंधा मिला कर अंग्रेजों को खदेड़ने का काम किया़
जिलाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि भगनाडीह के धरती पर अंग्रेजों के विरुद्ध पहला नारा करो या मरो तथा अंग्रेजो हमारी माटी छोड़ो दिया गया था़ यह भारत की स्वाधीनता की लड़ाई का नारा बना़ वहीं 1853-1856 तक संथाल हूल अर्थात संथाल विप्लव नामक आंदोलन चलाया़ जिला सचिव डॉ इश्तेयाक रजा ने कहा कि उस वक्त संथाली बोंगा का ही पूजा अर्चना करते थे़ बोंगा द्वारा जमींदारो, पुलिस एवं सूदखोरो के नाश हो जाने की भविष्यवाणी को डुगडुगी बजाकर गांव-गांव तक पहुंचाया गया़
इस दौरान लोगों ने साल की टहनी लेकर गांव-गांव की यात्रा की तथा 30जून 1855 को 400 गांव के लोग भगनाडीह पहुंचे और आंदोलन का सूत्रपात हुआ़ तब सभी ने मलगुजारी नहीं देने की घोषणा कर दी़ इसके बाद अंग्रेजो ने दोनों भाइयों सिद्धु-कान्हू को गिरफ्तार कर 26जुलाई 1855 को भगनाडीह गांव में ही फांसी दे दी़ आजसू नेता रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा कि अमर शहीद सिद्धु-कान्हू की शहादत को एक बार फिर से सामंतवादी सरकार के खिलाफ जल-जंगल और जमीन बचाने व दलित -आदिवासी पर हो रहे हमले के लिए हूल को जोहार कर आमंत्रण देने की जरूरत है़ कार्यक्रम में जयराम पासवान,विजय मेहता,रवींद्र जायसवाल, रामाशंकर ब्रेजियर, गोपाल प्रसाद सहित अन्य लोग उपस्थित थे़
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