सरेंडर से झारखंड व बंगाल में नक्सल आंदोलन हुआ प्रभावित

गालूडीह : पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव के मारे जाने के बाद वर्ष 2012 से सरेंडर का दौर चल रहा है. माओवादियों के सरेंडर से झारखंड व बंगाल में नक्सल आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा है. पश्चिम बंगाल के नक्सल प्रभावित तीन जिले पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा और पुरुलिया तथा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम से नक्सलवाद […]
गालूडीह : पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव के मारे जाने के बाद वर्ष 2012 से सरेंडर का दौर चल रहा है. माओवादियों के सरेंडर से झारखंड व बंगाल में नक्सल आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा है. पश्चिम बंगाल के नक्सल प्रभावित तीन जिले पश्चिमी मेदिनीपुर, बांकुड़ा और पुरुलिया तथा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम से नक्सलवाद खात्मे की ओर है.
हालांकि वर्ष 2009 में जब लालगढ़ आंदोलन चरम पर था, तब एक इंटरव्यू में पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव ने कहा था माओवाद विचार है. विचार कभी मरता नहीं. हां समय और परिस्थिति के अनुरूप संगठन समय-समय पर कमजोर जरूर होता है.
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