चपरासी देख रहा मुख्यमंत्री सचिवालय

Updated at : 04 Jul 2017 5:47 AM (IST)
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चपरासी देख रहा मुख्यमंत्री सचिवालय

विडंबना. सीएम तक फरयादियों की शिकायत पहुंचाने वाला कोई नहीं उपराजधानी स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैंप कार्यालय में कर्मचारियों का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे में यहां की फरयादियों से शिकायत मुख्यमंत्री तक कौन पहुंचायेगा. यह चिंता का विषय है. पदाधिकारियों के नहीं होने से कुर्सी-टेबल पर धूल फांक रही है. दुमका : उपराजधानी दुमका […]

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विडंबना. सीएम तक फरयादियों की शिकायत पहुंचाने वाला कोई नहीं

उपराजधानी स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैंप कार्यालय में कर्मचारियों का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे में यहां की फरयादियों से शिकायत मुख्यमंत्री तक कौन पहुंचायेगा. यह चिंता का विषय है. पदाधिकारियों के नहीं होने से कुर्सी-टेबल पर धूल फांक रही है.
दुमका : उपराजधानी दुमका में तकरीबन साढ़े ग्यारह साल पहले 26 जनवरी 2006 को स्थापित किये गये मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैंप कार्यालय को आठ साल से एक आदेशपाल ही चला रहा है. शुरुआती दिनों में एक पदाधिकारी की प्रतिनियुक्त इस कैंप कार्यालय में हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया. बाद में मनोज कुमार दास नाम के एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को यहां भेज दिया गया.
ऐसे में न तो यहां आम जनता की फरियाद सुनने वाला कोई रह गया है और न ही उन फारियादों-शिकायतों को प्राप्त कर सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने वाला कोई अधिकारी. अब तो मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैंप कार्यालय का टेलीफोन तक डेड हो चुका है. फर्नीचर तक टूट-फूट चुके हैं. रोशनी के समुचित साधन नहीं है. सफाई भी सही ढंग से नहीं हो पाती है.
प्रधान सचिव व आप्त सचिव का भी है दफ्तर
इस मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैंप कार्यालय में मुख्यमंत्री के अलावा उनके प्रधान सचिव व आप्त सचिव का भी दफ्तर है. तीनों के दफ्तर में टेबल-कुर्सी अस्त-व्यस्त हैं. कुर्सियों में धूल की परत जमने लगी है. घड़ी तक भी बंद ही पड़ी हुई है.
तीन दर्जन हुए दौरे, सीएम पहुंचे तीन बार : जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री रघुवर दास का दुमका में अबतक लगभग तीन दर्जन दौरा हुआ है, लेकिन वे यहां तीन बार ही पहुंचे हैं. एक बार वे यहां तब पहुंचे थे, जब सूचना भवन में कैबिनेट की मीटिंग हुई थी. तब सीएम कुछ लोगों से मिलने यहां पहुंचे थे.
2009 से ही यहां हूं. मेरे अलावा एक नाइट गार्ड यहां तैनात है. लोग अपना आवेदन लेकर सीएम तक भेजने के लिए यहां पहुंचते हैं, पर यहां सक्षम पदाधिकारी नही हैं. लिहाजा आनेवाले लोगों को उपायुक्त कार्यालय जाने को कह देता हूं.
मनोज कुमार दास, आदेशपाल, सीएम कैंप कार्यालय.
मुख्यमंत्री सचिवालय सह कैम्प कार्यालय के लिए यह भवन है. साल-दो साल में रंग-रोगन व मैनटेनेंस में खर्च किया जाता है. बावजूद अगर जनता को लाभ नहीं मिल रहा, तो इसे बंद ही कर दिया जाना बेहतर होगा.
प्रियनाथ पाठक, मयूराक्षी विस्थापित.
यह मुख्यमंत्री सचिवालय कैम्प कार्यालय तो महज दिखावे का रह गया है. कुछ भी फायदा इससे जनता को नहीं मिल रहा. उपर से सरकार को इसे चलाने में आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है. या तो इसे चालू किया जाना चाहिए या पूरी तरह बंद.
जितेंद्र दास, स्थानीय युवक
मुझे लगता है कि किसी भी मुख्यमंत्री ने इसपर गंभीरता नहीं दिखायी. दौरा होता है, तब भी सीएम यहां नहीं पहुंचते. यहां कम से कम मुख्यमंत्री तक सीधे संवाद की व्यवस्था होनी चाहिए थी, ताकि लोग उन्हें अपने दुख-तकलीफ बता पातें.
लालमोहन ठाकुर, स्थानीय निवासी
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