फ्लैश बैक : झरिया और निरसा विधानसभा क्षेत्र, जब दिग्गजों पर भारी पड़ी सहानुभूति आबो देवी और अपर्णा सेनगुप्ता जीतीं
Updated at : 09 Nov 2019 4:28 AM (IST)
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नारायण चंद्र मंडल धनबाद : कोयलांचल के चर्चित मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह झरिया से लगातार विधायक बने. उनके रिश्ते पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से रहे. कोलियरी क्षेत्रों में उनके संगठन जनता मजदूर संघ की तूती बोलती थी. वह 1977, 1980, 1985 और 1990 में लगातार चार बार विधायक चुने गये. इसी दौरान झरिया में जनता दल […]
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नारायण चंद्र मंडल
धनबाद : कोयलांचल के चर्चित मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह झरिया से लगातार विधायक बने. उनके रिश्ते पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से रहे. कोलियरी क्षेत्रों में उनके संगठन जनता मजदूर संघ की तूती बोलती थी. वह 1977, 1980, 1985 और 1990 में लगातार चार बार विधायक चुने गये. इसी दौरान झरिया में जनता दल के उभरते नेता राजू यादव की मुगलसराय स्टेशन के पास हत्या कर दी गयी. वह जनता दल की दिल्ली रैली में भाग लेने जा रहे थे. इसी दौरान सूर्यदेव सिंह का भी निधन हो गया. 1992 में उपचुनाव हुआ. सूर्यदेव सिंह के अनुज बच्चा सिंह जनता पार्टी से लड़े.
इधर, स्व राजू यादव की पत्नी आबो देवी भी जनता दल से प्रत्याशी बनीं. सिंह मेंशन को अति साधारण घर की महिला का टक्कर देना कोई साधारण बात नहीं थी. लेकिन सिंह मेंशन की लोकप्रियता पर राजू यादव की हत्या के बाद ऊपजी सहानुभूति भारी पड़ी. आबो देवी चुनाव जीत गयीं. उन्हें 49,477 और बच्चा सिंह को 31553 मत मिले. जब जनता दल टूट कर राजद बना, तो आबो लालू प्रसाद के राजद के साथ रहीं. 1995 में भी वह बच्चा सिंह से जीती. उसके बाद वह बिहार सरकार में मंत्री भी बनीं.
ठीक इसी प्रकार का मामला निरसा में रहा. मासस के गुरुदास चटर्जी 1990, 1995 और 2000 में विधायक चुने गये थे. उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में पुत्र अरुप चटर्जी भी चुनाव जीते.पांच अक्तूबर 2005 को गुरुदास चटर्जी को लगातार टक्कर दे रहे फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता सुशांतो सेनगुप्ता की हत्या जीटी रोड के पास हो गयी. कुछ दिनों के बाद विधानसभा का चुनाव हुआ.
सुशांतो की पत्नी अपर्णा सेनगुप्ता को फॉरवर्ड ब्लॉक ने टिकट दिया, लेकिन कभी दरवाजा नहीं लांघनेवाली सामान्य महिला के लिए गुरुदास के बेटे से टकराना आसान बात नहीं था, लेकिन सहानुभूति लहर की वजह से अपर्णा सेनगुप्ता ने बाजी मारी. उन्हें 50533 मत मिले, जबकि अरुप को 48196 मत मिले. फिर झारखंड सरकार में अपर्णा सेनगुप्ता मंत्री भी बनी. हालांकि 2009 में चुनाव में अरूप ने फिर जीत दर्ज कर ली.
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