देवघर में जेएसएफसी के गोदाम से 22 हजार क्विंटल अनाज कम, निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
देवघर बाजार समिति स्थित जीएसएफसी गोदाम | Prabhat Khabar Network
देवघर के जेएसएफसी गोदाम में 22 हजार क्विंटल से अधिक अनाज गायब मिला. ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन में बड़ी विसंगति से सरकारी खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
ऑनलाइन रिकॉर्ड में अनाज उपलब्ध, भौतिक सत्यापन में भारी कमी; परिवहन, चालान और भुगतान की जांच से खुल सकती है गड़बड़ी की परतें
देवघर : बाजार समिति स्थित झारखंड राज्य खाद्य निगम (जेएसएफसी) के गोदाम में 22,007.37 क्विंटल चावल और गेहूं की कमी सामने आने के बाद खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. ऑनलाइन रिकॉर्ड में अनाज उपलब्ध था, लेकिन भौतिक सत्यापन में भारी कमी मिली. ऐसे में स्टॉक की निगरानी, गोदाम से निकासी और जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों तक आपूर्ति की प्रक्रिया जांच के दायरे में है.
जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने 26 अक्टूबर 2026 को कुंडा थाना प्रभारी को आवेदन देकर तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक-सह-जनसेवक कोमल कुमार पाठक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है. आवेदन के अनुसार, ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के मिलान में 19,164.25 क्विंटल चावल और 2,843.12 क्विंटल गेहूं कम मिला. अब सवाल यह है कि स्टॉक में इतनी बड़ी कमी नियमित निगरानी के दौरान पकड़ में क्यों नहीं आयी.
अनाज नहीं था, तो परिवहन और भुगतान कैसे हुआ?
डीएसडी व्यवस्था के तहत एफसीआइ गोदाम से जेएसएफसी गोदाम और वहां से पीडीएस दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल होता है. ऐसे में संबंधित अवधि के वाहनवार चालान, लोडिंग रिकॉर्ड, निकासी पंजी, डिलीवरी रसीद और भुगतान विवरण का मिलान अहम है.
यदि रिकॉर्ड में अनाज का उठाव और दुकानों तक आपूर्ति दर्ज है, तो यह जांचना जरूरी होगा कि वास्तव में कितना खाद्यान्न कहां पहुंचा. परिवहन एजेंसी या वाहन संचालकों को भुगतान किया गया है, तो उसकी मंजूरी किन दस्तावेजों के आधार पर दी गयी, यह भी जांच का विषय है.
जीपीएस और चालान से मिल सकता है सुराग
जांच आवेदन में अगस्त और सितंबर 2026 के ट्रक चालान जमा होने, जबकि अक्टूबर के पांच ट्रक चालान लंबित रहने का उल्लेख है. ऐसे में जीपीएस लोकेशन, वाहनवार उठाव, गोदाम से निकासी की प्रविष्टियों और दुकानदारों की प्राप्ति रसीदों का मिलान जांच की अहम कड़ी हो सकता है.
इन दस्तावेजों के मिलान से रिकॉर्ड में दर्ज खाद्यान्न की वास्तविक आवाजाही और परिवहन के नाम पर हुए भुगतान के आधार की पड़ताल की जा सकती है.
राशन नहीं मिलने की शिकायतों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
आवेदन के अनुसार, पीडीएस दुकानदारों की ओर से राशन नहीं मिलने को लेकर कई महीनों से जिला आपूर्ति पदाधिकारी और उपायुक्त को आवेदन दिये जाने की बात सामने आयी है. इसके बावजूद स्टॉक, आवंटन और वितरण का समय पर मिलान क्यों नहीं हुआ, यह सवाल उठ रहा है.
जांच दल को स्टॉक, बिक्री और आवक पंजी उपलब्ध नहीं कराये जाने का उल्लेख भी आवेदन में है. इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नियमित निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया कैसे चली.
जवाबदेही तय करने के लिए पूरी व्यवस्था की जांच जरूरी
तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक की भूमिका की जांच के साथ स्टॉक की निगरानी, परिवहन दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान की मंजूरी देने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए. किसने स्टॉक का सत्यापन किया, किस आधार पर आपूर्ति के रिकॉर्ड को सही माना गया और शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई—इन सवालों के जवाब जांच से सामने आने चाहिए.
22 हजार क्विंटल से अधिक खाद्यान्न की कमी का मामला केवल प्राथमिकी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से भी इसकी जांच जरूरी है.
मंत्री ने कहा, राज्यस्तर पर गठित होगी जांच टीम
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा, “गरीब जनता का अनाज सरकारी गोदाम से गायब होने का मामला काफी संगीन है. जिले में बैठे अधिकारी भी इसकी समुचित निगरानी नहीं कर पाये, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. विभागीय सचिव के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी ली जायेगी. इसके बाद राज्यस्तर से जांच टीम गठित की जायेगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.”
आपके शहर में
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए