देवघर: चर्चित डबल मर्डर मिस्ट्री (रोशनी व रश्मि रेप-हत्याकांड) में रांची एफएसएल द्वारा वापस किये प्रदर्श (अवशेष) को लेकर पांच दिनों तक जसीडीह थाने के एक एएसआइ भटकते रहे.एएसआइ प्रदर्श रखने की जगह के बारे में पूछते रहे, किंतु कोई बताने को तैयार नहीं था. सभी अपना पल्ला झाड़ रहे थे. बेचारे एएसआइ को अपनी ही नौकरी का भय सताने लगा.
तब एएसआइ रविवार को एसपी प्रभात कुमार से मिले. एसपी ने प्रदर्श जसीडीह थाना के मालखाना में रखने का आदेश जारी किया, तब बेचारे एएसआइ को मुक्ति मिली. बताते चलें कि यह मामला इतना हाइप्रोफाइल बन चुका है कि दो पुलिस अधिकारी निलंबित हो गये. वहीं इस मामले में संताल के तत्कालीन डीआइजी ददन जी शर्मा व देवघर के तत्कालीन एसपी रंजीत कुमार प्रसाद का तबादला तक हो गया. मामले की गूंज केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली तक पहुंच गयी है.
पांच दिन पूर्व एएसआइ को भेज कर मंगाया गया प्रदर्श
जसीडीह थाने के एएसआइ संजय उरांव को पांच दिन पूर्व एफएसएल रांची भेज कर प्रदर्श मंगाया गया. प्रदर्श लेकर 25 जून को ही एएसआइ श्री उरांव लौटे हैं. तब से जसीडीह थाना प्रभारी सहित कांड के पूर्व आइओ इंस्पेक्टर विनोद कुमार वर्मा, आरके सिंह से भी प्रदर्श रखने के संबंध में पूछा. सबों का यही जवाब था कि कांड का चार्ज उनलोगों के पास नहीं है. यह कांड अब सीआइडी को ट्रांसफर हो गया है. इसके बाद एएसआइ देवघर सर्किट हाउस में कैंप कर रहे सीआइडी टीम के पास भी गये. बावजूद किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. सूत्रों के अनुसार सीआइडी से एएसआइ को जवाब मिला कि कुछ दिन रखिये थोड़े दिन में लेंगे.
प्रदर्श गायब होता तो जिम्मेवार कौन होता
डबल मर्डर मिस्ट्री में पुलिस से चूक आरंभ से हो रही है. बावजूद अब तक कोई नहीं समङो हैं. इसी मामले में दोनों मृतका का वस्त्र (एक्जीविट) भी गायब हुआ है. अगर प्रदर्श गायब होता तो कौन जिम्मेवार होते. सीआइडी ने कांड की अनुसंधान नये सिरे से आरंभ की है. फिर से सभी का बयान लिया जा रहा है. अगर डीएनए व स्वाब जांच सीआइडी को कराना पड़ता तो प्रदर्श फिर कहां से आता.
लकड़ी के डब्बे व लिफाफे में है बंद
जानकारी हो कि एफएसएल रांची से जो एएसआइ ने लाया है, उसमें एक लकड़ी के डब्बे में बंद है. वहीं एक लिफाफा भी है. लकड़ी के डब्बे में एक से 20 तक ग्रुपिंग किया गया है. वहीं लिफाफे में ए, बी व सी में विभक्त कर रिपोर्टिग की गयी है.