उजड़ गया सागवान का हरा-भरा डकाय जंगल
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :18 Jun 2018 6:08 AM
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सारवां : डकाय दुबे बाबा मंदिर के बगल में सागवान के हरे-भरे जंगल पर माफिया की नजर पड़ गयी है. इस जंगल से धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं. वन विभाग ने करीब 10 साल पहले 15 एकड़ भूमि में सागवान के पौधे लगाये गये थे. इसके रखरखाव के लिये चारों ओर ट्रेंच बनवाये […]
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सारवां : डकाय दुबे बाबा मंदिर के बगल में सागवान के हरे-भरे जंगल पर माफिया की नजर पड़ गयी है. इस जंगल से धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं. वन विभाग ने करीब 10 साल पहले 15 एकड़ भूमि में सागवान के पौधे लगाये गये थे. इसके रखरखाव के लिये चारों ओर ट्रेंच बनवाये गये थे व केटल गार्ड की प्रतिनियुक्ति की गयी थी, ताकि इन पौधे को बचाया जा सके. छह-सात साल में ही पौधे बड़े हो गये.
देखते ही देखते यह सागवान के हरे-भरे जंगल में बदल गया. डकाय बाबा के दर्शन को आने वाले लोगों का बरबस ही अपनी और ध्यान आकृष्ट कराते थे, लेकिन जंगल माफिया की इस पर वक्र दृष्टि पड़ी तो देखते ही देखते एक साल के अंदर जंगल से सागवान के पेड़ों का सफाया होने लगा. अब अगर बचे हैं तो पेड़ों के अवशेष. मुख्य सड़क से गुजरने वालों को अपनी बर्बादी की दास्तां कह कर मुंह चिढ़ा रहे हैं. इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल माफिया रात के अंधेरे में पेड़ काट कर ले जाता है.
सभी गांव जंगल से काफी दूर हैं, इसलिये जंगली जानवरों के भय से रात के समय कोई उस ओर नहीं जाता है. इसका फायदा माफिया ने उठा कर हरे-भरे सागवान के जंगल का सफाया कर दिया. कहा कि एक साल पहले जंगल काफी हरा-भरा था. इसमें घास उगती थी. स्थानीय लोग अपने मवेशी चराते थे. अब पेड़ ही नहीं बचे तो घास कहां से उगेगी. पेड़ों के पत्ते गिर कर खेतों को उपजाऊ बनाते थे. इसके चलते खेतों में रासायनिक खाद के इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ती थी. माफिया ने लकड़ी काट कर विभाग को लाखों का चूना लगाया. लोगों ने कहा कि वन विभाग के लोगों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है.
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