चिंता: पूजन सामग्री व प्रतिमाओं के विसर्जन से बढ़ा प्रदूषण, शिवगंगा में बिखरे आस्था के अवशेष

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देवघर : श्रद्धा व भक्ति के माहौल में दुर्गापूजा के समापन के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन हो रहा है. कुछेक प्रतिमाओं का और विसर्जन होना है. उत्साह व श्रद्धा के इस पर्व के समापन के साथ ही स्थानीय निवासी दीपावली और छठ की तैयारी में लग गये हैं. पर दूसरी ओर बाबानगरी के पवित्र कुंड […]

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देवघर : श्रद्धा व भक्ति के माहौल में दुर्गापूजा के समापन के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन हो रहा है. कुछेक प्रतिमाओं का और विसर्जन होना है. उत्साह व श्रद्धा के इस पर्व के समापन के साथ ही स्थानीय निवासी दीपावली और छठ की तैयारी में लग गये हैं. पर दूसरी ओर बाबानगरी के पवित्र कुंड शिवगंगा की सफाई से जुड़े कुछ कर्मियों की नींद उड़ गयी है.

कारण बना है विसर्जन के बाद शिवगंगा में जमा टनों मलबा. बता दें कि पूजा के बाद प्रतिमाअों का विसर्जन पवित्र शिवगंगा में किया जाता है. इससे शिवगंगा में प्रदूषण फैलता है. इसी कारण इसे साफ करने के लिए यहां 10.81 करोड़ में प्लांट की स्थापना की गयी है. सफाई का काम ओजोन रिसर्च एंड एप्लीकेशन प्रालि, नागपुर के जिम्मे है. सफाई के काम में लगे कर्मी वामन मागर दे दुखी हैं. पूछा कि हम लाख कोशिश करें, पर सभी का सहयोग नहीं होगा कैसे साफ रह पायेगी शिवगंगा ?

क्या है प्लांट की क्षमता
शिवगंगा को साफ रखने के लिए फिल्टरेशन प्लांट में हाइ पावर के छह पंप लगाये गये हैं. इनमें से चार पंप लगातार चलते रहते हैं और प्रत्येक घंटे 16 हजार लीटर पानी को साफ कर शिवगंगा में छोड़ते ंहैं. इसके बावजूद गंदगी होने पर मेंटनेंस स्टाफ ने बताया कि प्लांट संचालन से पहले आधे से अधिक तालाब में शैवाल जमा हो जाता था, अब साफ है.
मूर्ति विसर्जन की हो सकती है अलग व्यवस्था
अलग-अलग राज्यों में तालाब को साफ रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है. तालाब में मूर्ति विसर्जन के लिए बीच में बड़ा-सा टब के आकार का दीवार खड़ा कर दिया गया है. इसी दीवार के बीच में मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था है. इसे बाद में साफ कर दिया जाता है. रांची में भी यह व्यवस्था कई जगहों पर है.
कहां-कहां है ऐसी व्यवस्था
झारखंड के रांची, गुजरात, लुधियाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व ओड़िशा के भुवनेश्वर में इस प्रकार से मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था है. जबलपुर में नर्मदा नदी को साफ रखने के लिए बगल के एक तालाब में विसर्जन की व्यवस्था की गयी. यही नहीं प्रतिमाओं को लेकर नदी तक पहुंचनेवाली सभी गलियों तक हो बंद कर दिया गया था.
मूर्तिकार को भी रखना होगा ख्याल
प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों को भी पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए अहम भूमिका निभानी होगी. मूर्ति में हानिकारक केमिकल से बने रंगों के उपयोग से परहेज कर प्रदूषण को रोकने में मददगार इकोफ्रैंडली रंग का कर सकते हैं इस्तेमाल.
कैसे पूरा होगा स्वच्छता अभियान
पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है. ऐसे में पवित्र शिवगंगा काे स्वच्छ रखने की जिम्मेवारी भी हम सभी पर है. शिवगंगा की इस तसवीर को देख कर देवघर के तमाम बुद्धजीवियों व प्रशासनिक महकमे से जुड़े लोगाें को आत्ममंथन करने की जरूरत है.
भवरोग हर कुंड है शिवगंगा
शिवगंगा का अपना धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि इस तालाब का निर्माण रावण के मुस्टीका प्रहार से पाताल गंगा की वजह से हुआ है. इसी तालाब में भक्त स्नान कर सीधे बाबा भोले पर जलार्पण करने जाते हैं. इसे साफ रखने के लिए हमलोगों को निगम व राज्य सरकार से अधिक जागरूक होना होगा, तभी इसकी पवित्रता बरकरार रह सकती है.
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