रात को गांव में घुसा 20 हाथियों का झुंड, सुबह खेत में मिला हथिनी का शव, आखिर कैसे हुई मौत ?
कपड़े से ढका हथिनी का शव.
20 हाथियों के झुंड ने मचाया आतंक, सुबह खेत में मिला एक मृत हाथी. जानिए क्या है पूरा मामला और ग्रामीणों की चिंताएं.
नोवामुंडी : पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंकुरा बस्ती के बुरमा टोली में हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी. मंगलवार रात करीब 20 हाथियों का झुंड गांव में घुस आया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गयी. वहीं, बुधवार सुबह जंगल से सटे एक खेत में एक मादा हाथी का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गयी. मादा हाथी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है.
ग्रामीणों ने वन विभाग को दी थी सूचना
ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 20 हाथियों का झुंड गांव पहुंचा था. हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र में घुसता देख ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ेगी. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की कोई टीम मदद के लिए नहीं पहुंची. इसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाला. पूरी रात जागकर मशाल और अन्य पारंपरिक तरीकों से हाथियों के झुंड को गांव और घरों से दूर भगाने का प्रयास करते रहे. हाथियों की लगातार आवाजाही और उत्पात की आशंका के बीच ग्रामीण रातभर भय के साये में रहे.
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सुबह खेत में मिला हाथी का शव, इलाके में सनसनी
बुधवार सुबह ग्रामीणों को बुरमा टोली के समीप जंगल से सटे एक खेत में हाथी का शव पड़ा होने की जानकारी मिली. देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गयी. हाथी की मौत को लेकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं. हालांकि, उसकी मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है. हाथी की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है. मौत के कारणों का खुलासा घटनास्थल की जांच और पशु चिकित्सकों द्वारा किए जाने वाले पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकेगा.
कई महीनों से क्षेत्र में मंडरा रहा हाथियों का खतरा
बड़ाजामदा और आसपास के गांवों में पिछले कई महीनों से हाथियों के झुंड की आवाजाही बनी हुई है. कभी हाथी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो कभी मुख्य सड़कों पर आ जाते हैं. इससे ग्रामीणों के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के बावजूद वन विभाग की ओर से नियमित निगरानी और समय पर सहायता नहीं मिल रही है. उन्होंने मृत हाथी की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही, हाथियों के गांव में प्रवेश की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
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