आजादी के इतने साल बाद भी सड़क नसीब नहीं, 2 KM तक कीचड़ में स्ट्रेचर पर ढोना पड़ा शव
शव को खाट पर ढ़ोते परिजन
क्योंझर में सड़क की कमी के कारण एक परिवार को 2KM कीचड़ में शव स्ट्रेचर पर ढोना पड़ा. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों की दयनीय सड़क सुविधाओं की पोल खोल दी है.
जैंतगढ़: क्योंझर जिले के चंपुआ ब्लॉक की रिमुली पंचायत के तादुबहाल गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण एक व्यक्ति के शव को करीब दो किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोना पड़ा. घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.
जानकारी के अनुसार तादुबहाल गांव निवासी गोविंद माझी की कटक स्थित अस्पताल में कैंसर से मौत हो गयी थी. परिजन एंबुलेंस से उनका शव लेकर गांव पहुंचे, लेकिन गांव से करीब दो किलोमीटर पहले ही कच्ची सड़क पर कीचड़ होने के कारण एंबुलेंस के आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो गया.
घुटनों तक कीचड़ में स्ट्रेचर पर ढोया शव
मजबूरन परिजनों ने एंबुलेंस कर्मियों की मदद से शव को स्ट्रेचर पर रखा और घुटनों तक कीचड़ भरे रास्ते से करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचाया. इस दौरान परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. अपनों के अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच उन्हें इस दर्दनाक स्थिति से गुजरना पड़ा.
15 से अधिक जनजातीय परिवार सड़क सुविधा से वंचित
हेसलगुट साही में 15 से अधिक जनजातीय परिवार रहते हैं. ग्रामीण लंबे समय से गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सड़क के अभाव में एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं. इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
इस मामले में विस्तृत जानकारी नहीं मिली है. अभी मुझे पदभार ग्रहण किये सप्ताह भर ही हुआ है. मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित करवाई की जायेगी. - त्रिनाथ कुमार दास, बीडीओ, चंपुआ
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