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तीसरी लहर की आशंका से पूर्व 18 वर्ष से कम उम्र के 1202 बच्चे कोरोना संक्रमित, एक छात्रा की मौत, ये है तैयारी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Coronavirus In Jharkhand : बच्चों को संक्रमण से बचाव को लेकर की जा रही तैयारी
Coronavirus In Jharkhand : बच्चों को संक्रमण से बचाव को लेकर की जा रही तैयारी
प्रभात खबर

Coronavirus In Jharkhand, चाईबासा न्यूज (अभिषेक पीयूष) : कोरोना की तीसरी लहर को लेकर विशेषज्ञों ने आशंका जतायी है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ये अधिक घातक साबित होगी. अगस्त में कोरोना की संभावित तीसरी लहर भारत में दस्तक देगी. इधर, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में कोरोना की दूसरी लहर का कहर कम होने लगा है, वहीं पहली व दूसरी लहर के दौरान जिले में अब तक मिले 0 से 18 आयु वर्ष के कुल संक्रमितों की संख्या 1200 के पार चली गयी है, जबकि एक 16 वर्षीय छात्रा की इलाज के क्रम में मौत भी हो चुकी है.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में 0 से 18 आयु वर्ष के बीच अब तक कुल 1202 बच्चे कोरोना संक्रमित मिले हैं. कुल 1202 संक्रमितों में 624 लड़के, जबकि 578 लड़कियां शामिल हैं. दूसरी ओर कोरोना की पहली लहर में 0 से 18 वर्ष के बीच कुल 805 बच्चे संक्रमित हुए थे, जबकि दूसरी लहर ने अब तक 0 से 18 वर्ष के कुल 397 बच्चों को अपना शिकार बनाया है यानी जिले में अब तक मिले कुल संक्रमितों में से 10.79 फीसदी बच्चे संक्रमण की चपेट में आये हैं.

पश्चिमी सिंहभूम में 0 से 18 आयु वर्ग के बीच मिले अब तक कुल 1202 संक्रमित बच्चों में 0 से 15 वर्ष के बीच सबसे अधिक यानी कुल 758 बच्चे संक्रमण की चपेट में आये हैं. इनमें जिले में अब तक 0 से 3 वर्ष के 51 बच्चे, 4 से 6 वर्ष के 98 बच्चे, 7 से 9 वर्ष के भी 98 बच्चे, 10 से 12 वर्ष के 238 बच्चे, 13 से 15 वर्ष के 273 बच्चे एवं 16 से 18 वर्ष के बीच सर्वाधिक 444 बच्चों में संक्रमण पाया गया है.

पश्चिमी सिंहभूम जिले में कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान अब तक 0 से 10 आयु वर्ग के बीच कुल 323 बच्चे संक्रमित पाये गये हैं. वहीं केवल दूसरी लहर में 0 से 14 वर्ष के बीच कुल 397 बच्चे संक्रमित मिले हैं. उक्त संक्रमितों में बच्चियों के मुकाबले बच्चों की संख्या सर्वाधिक है. दरअसल जिले में 0 से 10 वर्ष के बीच मिले संक्रमितों में से 190 लड़कों को कोरोना ने अपना शिकार बनाया है, जबकि 133 बच्चियां भी संक्रमण की चपेट में आयी हैं. इस आयु वर्ग के बीच अब तक किसी भी बच्चे को जिले में जान-माल की क्षति नहीं पहुंची है.

जैसे-जैसे शहर व राज्य अनलॉक हो रहे हैं, वैसे-वैसे लोगों में कोरोना के प्रति लापरवाही भी बढ़ती जा रही है. चाईबासा में हाट-बाजार से लेकर निजी समेत सार्वजनिक वाहनों में सफर करते वक्त लोग मास्क तक पहनना भूल गये हैं. ऐसे में पुलिस प्रशासन का जांच अभियान भी सुस्त पड़ गया है. इधर, विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना की तीसरी लहर से करीब 50 फीसदी बच्चे प्रभावित हो सकते हैं. पश्चिमी सिंहभूम जिले में 0 से 15 आयु वर्ष के बीच करीब डेढ़ लाख बच्चे हैं. अगर विशेषज्ञों के दावे सच हुए तो, इनमें संभावित 50 हजार के करीब बच्चे संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. जिसे देखते हुए जिले में सामान्य बेड, ऑक्सीजन बेड समेत बच्चों के लिए पीआइसीयू बनाने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में आने वाली परिस्थिति से बचने के लिए लोगों को भी सर्तकता बरतना जरूरी है.

जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल चाईबासा में बच्चों को कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाने के लिए कुल 40 बेडेड पेडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) तैयार हो रहा है. यहां सेंट्रलाइज्ड पाइपलाइन के जरिये सभी बेडों पर ऑक्सीजन की सप्लाई की जायेगी. इसे लेकर सदर अस्पताल परिसर में प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है. पीएसए प्लांट स्थापित करने के लिए चाईबासा में पुणे से ऑक्सीजन जेनरेट करने वाली मशीन मंगायी गयी है. उक्त पीएसए प्लांट में प्राकृतिक हवा से ऑक्सीजन तैयार करने की तकनीक है. इसके अलावा बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए आइसीयू व वेंटिलेटर बेड भी तैयार कराया जा रहा है.

एक नजर में

- पश्चिमी सिंहभूम जिले में अब तक 0 से 18 आयु वर्ष के कुल 1202 बच्चे हो चुके हैं कोरोना संक्रमण के शिकार.

- 9 सितंबर 2020 को कराईकेला की 16 वर्षीय छात्रा की कोरोना संक्रमण के कारण टेल्को अस्पताल में हो चुकी है मौत.

- कोरोना की पहली लहर में जिले में 0 से 18 आयु वर्ग के मिले 805 संक्रमित, दूसरी लहर में अब तक 397 बच्चे संक्रमित.

तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए ये है तैयारी

- जिले के सरकारी चिकित्सकों, आरबीएसके चिकित्सक, ए-ग्रेड कर्मियों एवं सीएचओ को ऑक्सीजन व वेंटिलेटर संचालन का दिलाया जा रहा ऑन हैंड प्रशिक्षण.

- हेल्थ लाइन वर्कर्स एवं फ्रंट लाइन वर्करों को आइ-गोट मोबाइल एप्लीकेशन का दिया जा रहा प्रशिक्षण.

- बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को सदर अस्पताल में 40 बेडेड पीआईसीयू यूनिट के साथ ही जिले के सभी प्रखंडों में 5-5 ऑक्सीजन बेड की जा रही व्यवस्था.

- बच्चों का ऑक्सीजन लेबल सामान्य रखने के लिए जिले भर में कुल 286 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था की गयी है.

- सदर अस्पताल समेत जिलेभर के पांच प्रखंडों में बनाया जायेगा प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन प्लांट.

- बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कार्य करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रेन व जी-पेगो से लिया जा रहा सहयोग.

आयु वर्ग के बीच संक्रमितों की संख्या

00 से 03 51

04 से 06 98

07 से 09 98

10 से 12 238

13 से 15 273

16 से 18 444

कुल संक्रमित 1202

बच्चों के लिए बरतें ये सावधानी

- अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय घर में ही रखें.

- घूमने-फिरने या फिर रिश्तेदार, मित्रों के यहां जाने से बचें.

- बच्चों को बाहर खेलने या फिर किसी सामाजिक समारोह में न जाने दें.

- बच्चों को दिन में दो बार स्नान करायें व बार-बार साबुन से हाथ धुलवाएं.

- अपने व बच्चों के हाथों को नियमित तौर पर सैनिटाइज करें.

- हाथों को सैनिटाइज किये बगैर बच्चों को अपनी आंखों व नाक को न रगड़ने दें.

- वयस्क बाहर से घर आने पर खुद को सैनिटाइज किये बगैर बच्चों को न पकड़ें.

- मोबाइल फोन, प्लेइंग टॉय, कंप्यूटर की बोर्ड आदि को दिन में दो बार सैनिटाइज करें.

- हर दिन अपने घर के शौचालय को कीटाणुनाशक से साफ करें.

- घर में बिस्तर-चादर व तकिये को प्रत्येक दिन बदलें व साफ रखें.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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Published Date

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