पूर्व जेल सुपरिंटेंडेंट पर केस के लिए सरकार से मांगी अनुमति

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मामला चास जेल में बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत का बोकारो : न्यायिक हिरासत में चास जेल में बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत के मामले में चास जेल के तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट प्रवीण कुमार (वर्तमान में पलामू में पदस्थापित), जेलर व अन्य पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति […]

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मामला चास जेल में बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत का

बोकारो : न्यायिक हिरासत में चास जेल में बंद कैदी बसंत कुमार गुप्ता की मौत के मामले में चास जेल के तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट प्रवीण कुमार (वर्तमान में पलामू में पदस्थापित), जेलर व अन्य पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति मांगी गयी है. डीसी ने गृह व कारा विभाग के प्रधान सचिव को इस संबंध में पत्र लिखा है. गौरतलब है कि न्यायिक जांच के बाद बाद डीसी ने चास जेल के जेल सुपरिटेंडेंट को तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट व अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था. लेकिन इजेल सुपरिटेंडेंट के स्टेट कैडर के पदाधिकारी होने के कारण प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी थी. डीसी ने प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अनुमति मांगी है.
न्यायिक जांच में कहा गया है मौत की तहकीकात की आवश्यकता है : जिला प्रधान न्यायाधीश संजय प्रसाद ने एसीजेएम देवाशीष महापात्रा को मामले की न्यायिक जांच कराने के लिए नियुक्त किया था. न्यायिक जांच में जेल के अंदर हुई मौत की तहकीकात की आवश्यकता बतायी गयी थी. उसके बाद डीसी ने प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था. मृतक के भाई ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में यह मामला 1555/01/2014 के तहत चल रहा है. 25 सितंबर 2014 को वसंत को जेल से ले जाने के लिए उसका भतीजा शंकर व भाई त्रिभुवन आया था. दोनों ने जेल प्रशासन पर मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया था.
भाई ने कहा था : पैसे के लिए जेल में पीटकर मार डाला
चास जेल के कैदी वसंत कुमार गुप्ता (45 वर्ष) की मौत 25 सितंबर 2014 को जेल में हो गयी थी. मृतक बेरमो थाना क्षेत्र के नया मोड़, श्याम भंडार गली का रहने वाला था. उसका फुसरो-चंद्रपुरा रोड में वसंत फ्रूट नामक दुकान थी. उस पर बेरमो थाना में कांड संख्या 131/14 के तहत एनडीपीएस एक्ट (गांजा बेचने के आरोप ) का मामला दर्ज था. उसने 27 अगस्त 2014 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. उसके बाद से न्यायिक हिरासत में चास जेल बंद था. मामले में उसे तत्कालीन प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश अमिताभ कुमार की अदालत से बेल मिल गयी थी, लेकिन जेल से निकलने के पहले ही उसकी मौत हो गयी थी. भाई त्रिभुवन ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया था कि वसंत को अक्सर प्रताड़ित कर पैसा मांगा जाता था. दो बार जेल में पैसा दिया गया था. तीसरी बार भी पैसे की मांग हो रही थी. इसी बीच उसे बेल मिल गयी थी. बेल मिलने से आक्रोशित जेल के कर्मचारियों ने मारपीट की. इस कारण उसकी मौत हो गयी.
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