छोटी-छोटी बातों पर हो रहा तलाक

रांची: राजधानी में छोटी-छोटी बातें तलाक का रूप ले रही हैं. रांची फैमिली कोर्ट में तलाक लेनेवाले दंपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2014 में जून माह तक लगभग 250 दंपतियों ने तलाक के लिए रांची फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया है. कोर्ट में प्रत्येक कार्य दिवस में औसतन तलाक के लिए चार […]
रांची: राजधानी में छोटी-छोटी बातें तलाक का रूप ले रही हैं. रांची फैमिली कोर्ट में तलाक लेनेवाले दंपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2014 में जून माह तक लगभग 250 दंपतियों ने तलाक के लिए रांची फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया है. कोर्ट में प्रत्येक कार्य दिवस में औसतन तलाक के लिए चार आवेदन दायर किये जा रहे हैं. तलाक के लिए आवेदन देनेवालों में डॉक्टर से लेकर टेंपो चालक तक शामिल हैं.
वर्ष 2007 में तलाक के लिए 258 आवेदन रांची फैमिली कोर्ट में दायर हुए थे. इसमें से कोर्ट ने 159 लोगों को अलग रहने का फैसला सुनाया था. इसी प्रकार वर्ष 2009 में तलाक के लिए 240 मामले कोर्ट पहुंचे. इसके बाद से लगातार फैमिली कोर्ट में तलाक के आवेदन में वृद्धि हो रही है. पिछले वर्ष लगभग 450 मामले पहुंचे. इनके अलावा सैकड़ों महिलाओं ने जीवन यापन भत्ते के लिए आवेदन दिया है. वकीलों के अनुसार अगर तलाक की यही रफ्तार रही, तो इस वर्ष यह आंकड़ा 500 तक पहुंच सकता है. यह आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि राजधानी रांची में परिवार बिखर रहे हैं.
आपसी रंजिश बन रही तलाक की वजह
राजधानी में छोटी-छोटी बातें तलाक की वजह बन रही है. ऑटो चालक किशोर (बदला नाम) ने तलाक के लिए इसलिए आवेदन दिया कि उसे अपनी पत्नी पर शक है. जब वह बाहर टेंपो चलाने जाता है, तो पत्नी अपने प्रेमी के साथ मौज करती है. इसी प्रकार प्रतिभा कुमारी (बदला नाम) ने अपने पति की शराब पीने की लत से परेशान होकर तलाक के लिए आवेदन दिया है. उसका कहना है कि शराब पीकर आने के बाद उसका पति उसे और उसके बच्चों को पीटता है. घरेलू समान खरीदने के लिए पैसा भी नहीं देता है. एक चिकित्सक की ओर से यह कहते हुए आवेदन दिया गया है कि पत्नी उसकी बात नहीं मानती. अच्छी कमाई होने के बावजूद पत्नी एक निजी कंपनी में काम करना चाहती है.
सुलह के लिए मिलता है छह माह का समय
पति-पत्नी अगर संयुक्त रूप से अलग रहने की इच्छा कोर्ट के समक्ष व्यक्त करते हैं, तो तलाक मिलने में परेशानी नहीं होती है. इसके बावजूद कोर्ट दंपतियों को छह माह का समय देता है, ताकि आपसी सुलह हो जाये और वे नये तरीके से जीवन गुजार सकें. अगर पति तलाक का आवेदन देता है, तो पत्नी की सहमति जरूरी होती है. पत्नी जब जीवन भत्ता की मांग करती है, तो कोर्ट तय करता है कि उसे कितना पैसा देना है. जीवन भत्ता पति की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है.
अहम के टकराव में टूट रहे रिश्ते : शुक्ल
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन राजेश शुक्ल ने कहा कि पति-पत्नी के बीच अहम (इगो) के टकराव को लेकर ही ज्यादातर रिश्ते टूट रहे हैं. अक्सर एक-दूसरे का इगो टकराता है और इनके एक साथ रहने में परेशानी बढ़ जाती है. एक-दूसरे के प्रति विश्वास कम होने के कारण बात तलाक तक पहुंच जाती है. यह प्रवृत्ति मध्यम और उच्च वर्ग में खास कर देखने को मिलती है.
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